मुलायम सिंह यादव की पुण्यतिथि पर ऑल इंडिया मुशायरा व कवि सम्मेलन, देशभर के शायरों और कवियों ने पेश किया कलाम
(फजलुर्रहमान)
बांगरमऊ, उन्नाव शेरो-शायरी, कविता और अदबी तहजीब से सजी एक शाम। कहीं उम्दा अशआर पर वाह-वाह की आवाजें गूंज रही थीं, तो कहीं कविताओं पर तालियों से रचनाकारों का हौसला बढ़ाया जा रहा था। बांगरमऊ के शांति मिल मैदान में आयोजित ऑल इंडिया मुशायरा एवं कवि सम्मेलन में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए शायरों और कवियों ने अपनी रचनाओं के जरिए इंसानी रिश्तों, समाज और जिंदगी के अलग-अलग पहलुओं को पेश किया।
सपा संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम का संयोजन सपा नेता गुलिस्तान खान ने किया। देर रात तक चली इस साहित्यिक महफिल में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। शेरो-शायरी और कविता के शौकीनों ने रचनाकारों की हौसलाअफजाई की और कार्यक्रम में अदब व तहजीब का रंग दिखाई दिया।
दीप प्रज्वलन से हुई शुरुआत
कार्यक्रम का उद्घाटन सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल, सपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष शकील खान नदवी और सहारनपुर के सपा विधायक आशु मलिक ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित करके किया।
बलिया से आईं कवयित्री प्रतिभा यादव ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद मालेगांव के शायर अल्ताफ जिया ने नात-ए-पाक पेश की। इस तरह कार्यक्रम की शुरुआत में कविता, शायरी और धार्मिक भावनाओं की झलक देखने को मिली।
रचनाओं ने बांधा समां
मुशायरे में अपूर्व विक्रम शाह, तबरेज राणा, हिमांशी बावरा सहित कई शायरों और कवियों ने अपनी रचनाएं पेश कीं। अलग-अलग अंदाज में पेश किए गए कलाम ने श्रोताओं का ध्यान खींचा। अच्छी शायरी और प्रभावशाली कविताओं पर देर तक तालियां बजती रहीं।
कार्यक्रम ने यह भी दिखाया कि मुशायरा और कवि सम्मेलन केवल मनोरंजन का जरिया नहीं, बल्कि समाज की भावनाओं, इंसानी रिश्तों और विचारों को सामने रखने का एक अहम माध्यम हैं। ऐसी महफिलों में अलग-अलग भाषाओं और साहित्यिक परंपराओं से जुड़े रचनाकारों को एक मंच मिलता है और लोगों को अपनी बात शेरों व कविताओं के जरिए सुनने का मौका मिलता है।
मुशायरे का संचालन नदीम फर्रुख ने किया, जबकि अध्यक्षता शकील खान नदवी ने की।
कई जानी-मानी हस्तियां रहीं मौजूद
कार्यक्रम में श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर काशीनाथ दास महाराज, पूर्व विधायक बदलू खान, सपा नेता आलोक त्रिपाठी, डॉ. पंकज गौतम, शशांक शेखर शुक्ला, फैसल रहमान सफवी, रामचंद्र वर्मा, धर्मेंद्र यादव, अल्वी मिश्रा, बृजेश उर्फ टिल्लू भैया, डॉ. मुन्ना अल्वी, मनोज पाल, आशीष कटियार, नासिर खान, सलीमुर्रहमान, रईस अहमद, मुशीर अली और मेराज खान सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम के आखिर में आयोजक गुलिस्तान खान ने अतिथियों और कार्यक्रम में शामिल लोगों का आभार जताया।
बड़े नेताओं के न पहुंचने से समर्थक निराश
साहित्यिक कार्यक्रम के बीच राजनीतिक हलकों में भी चर्चा रही। आयोजकों की ओर से घोषित मुख्य अतिथियों में पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव, महाराष्ट्र के सपा विधायक अबू आसिम आजमी और सांसद इकरा हसन के नाम शामिल थे। इन नेताओं को देखने और सुनने की उम्मीद लेकर पहुंचे समर्थकों को उनके कार्यक्रम में शामिल न होने से निराशा हुई।
मैदान में मौजूद कई लोग अपने पसंदीदा नेताओं की एक झलक पाने की आस लगाए बैठे थे, लेकिन उनके नहीं पहुंचने से समर्थकों की उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं। इस तरह कार्यक्रम में एक ओर जहां शेरो-शायरी की महफिल सजी, वहीं दूसरी ओर बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी रही।
-क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

