कानपुर में ‘तालीमी बेदारी’ का राष्ट्रीय सेमिनार, वक्ताओं ने शिक्षा, हुनर और सामाजिक जिम्मेदारी को बताया तरक्की की बुनियाद
-(शाहिद कामरान)
कानपुर। किसी देश का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी से बनता है और युवाओं का भविष्य अच्छी शिक्षा से संवरता है। शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का जरिया नहीं, बल्कि इंसान को बेहतर सोच, आत्मविश्वास और समाज के लिए कुछ करने का हौसला देने वाली ताकत है। इसी संदेश के साथ कानपुर में सामाजिक संस्था ‘तालीमी बेदारी’ की ओर से राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया।
सिविल लाइंस स्थित मर्चेंट चैंबर हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय था, ‘डॉ. कलाम के सपनों का भारत: शिक्षा और युवा सशक्तिकरण की भूमिका।’ कार्यक्रम में शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक सेवा और दूसरे क्षेत्रों से जुड़ी हस्तियों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने युवाओं को शिक्षा के साथ हुनर हासिल करने, बड़े लक्ष्य तय करने और देश की तरक्की में अपनी भूमिका निभाने का संदेश दिया।

शिक्षा से ही खुलेगी तरक्की की राह
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज विभाग के राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
उन्होंने अपने संबोधन में युवाओं की शिक्षा और कौशल विकास को देश की तरक्की के लिए जरूरी बताया। आज के दौर में केवल पढ़ाई पूरी करना ही काफी नहीं है, बल्कि युवाओं को आधुनिक तकनीक, रोजगार से जुड़े हुनर और बदलती जरूरतों के मुताबिक खुद को तैयार करना भी जरूरी है।
उन्होंने सरकारी योजनाओं और युवाओं के लिए उपलब्ध अवसरों का जिक्र करते हुए शिक्षा को बेहतर भविष्य की बुनियाद बताया।
डॉ. कलाम के सपनों को पूरा करने की जिम्मेदारी
सेमिनार की अध्यक्षता जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सैयद जफर महमूद ने की। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि मजबूत भारत बनाने के लिए समाज के हर वर्ग तक अच्छी शिक्षा पहुंचाना जरूरी है।
उन्होंने खास तौर पर उन लोगों की शिक्षा पर ध्यान देने की जरूरत बताई, जिन्हें आर्थिक और सामाजिक मुश्किलों के कारण आगे बढ़ने के बराबर अवसर नहीं मिल पाते।
उनका संदेश था कि युवाओं को बड़े सपने देखने के साथ उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत भी करनी चाहिए। सिविल सर्विसेज और उच्च पदों तक पहुंचने के लिए मजबूत तैयारी, लगन और लगातार सीखते रहने की जरूरत होती है।
डॉ. कलाम का जीवन इस बात की मिसाल है कि सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत, ज्ञान और दृढ़ संकल्प से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है।
प्रशासनिक सेवाओं में युवाओं की भूमिका
कार्यक्रम में लखनऊ के सतर्कता निदेशालय के अपर महानिदेशक मंजूर अली अंसारी, आईआरएस, विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं में शिक्षा और योग्यता के महत्व पर विचार रखे।
कानपुर के पूर्व डीआईजी रतन कुमार श्रीवास्तव, आईपीएस सेवानिवृत्त, ने युवाओं को अनुशासन, जिम्मेदारी और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने की प्रेरणा दी।
वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि युवाओं को अपनी पढ़ाई और करियर के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों को भी महत्व देना चाहिए। एक जिम्मेदार नागरिक वही है, जो अपने अधिकारों के साथ दूसरों के अधिकारों का भी सम्मान करे और देश की तरक्की में योगदान दे।
डिजिटल दौर में शिक्षा के नए अवसर
पुणे की संस्था एडीसीआई की अकादमिक प्रमुख डॉ. फरहाना अलमेल ने शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे बदलावों और डिजिटल दौर में युवाओं के सामने मौजूद अवसरों पर अपने विचार रखे।
आज इंटरनेट, डिजिटल तकनीक और आधुनिक शिक्षण साधनों ने सीखने के नए रास्ते खोले हैं। छोटे शहरों और सामान्य परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए भी ज्ञान हासिल करने के कई नए अवसर उपलब्ध हुए हैं।
लेकिन इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए डिजिटल जानकारी, सही मार्गदर्शन और मेहनत जरूरी है। युवाओं को तकनीक का इस्तेमाल केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि पढ़ाई, हुनर सीखने और रोजगार की तैयारी के लिए भी करना चाहिए।
शहीद अशफाक उल्लाह खान की विरासत का संदेश
कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानी शहीद अशफाक उल्लाह खान के पौत्र अशफाक उल्लाह खान की मौजूदगी भी खास रही।
शहीद अशफाक उल्लाह खान का जीवन देश की आजादी, साहस और बलिदान की याद दिलाता है। उनका संघर्ष बताता है कि देश से मोहब्बत का अर्थ केवल भावनाओं तक सीमित रहना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर देश और समाज के लिए अपना योगदान देना भी है।
ऐसे महापुरुषों की विरासत नई पीढ़ी को देशभक्ति, आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश देती है।
‘तालीमी बेदारी’ की पहल
कार्यक्रम में वक्ताओं ने शिक्षा को समाज में बदलाव का सबसे प्रभावी माध्यम बताया। उनका संदेश था कि बच्चों और युवाओं को अच्छी शिक्षा के साथ सही मार्गदर्शन मिले, तो वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के साथ समाज और देश के विकास में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।
खास तौर पर जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि आर्थिक कमजोरी उनकी प्रतिभा और भविष्य के रास्ते में रुकावट न बने।
डिग्री नहीं, बेहतर इंसान बनाना भी है शिक्षा का मकसद
आज युवाओं के सामने रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और बदलती तकनीक के साथ कदम मिलाने जैसी कई चुनौतियां हैं। ऐसे समय में शिक्षा को केवल परीक्षा पास करने या नौकरी पाने तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
शिक्षा का असली उद्देश्य ऐसी पीढ़ी तैयार करना है, जिसमें ज्ञान के साथ ईमानदारी, मेहनत, आत्मविश्वास और समाज के प्रति जिम्मेदारी का एहसास भी हो।
डॉ. कलाम के सपनों का भारत बनाने के लिए जरूरी है कि गांवों और शहरों के युवाओं को समान अवसर मिलें, लड़के और लड़कियां अपनी प्रतिभा के मुताबिक आगे बढ़ सकें और किसी बच्चे का भविष्य केवल उसके परिवार की आर्थिक स्थिति से तय न हो।
कानपुर में आयोजित ‘तालीमी बेदारी’ का यह सेमिनार इसी बड़े सवाल की ओर ध्यान दिलाता है कि देश की तरक्की के लिए युवाओं को शिक्षा, हुनर और सही दिशा देना कितना जरूरी है।
क्योंकि जब युवा शिक्षित, हुनरमंद और जिम्मेदार बनेंगे, तभी देश विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकेगा। यही डॉ. कलाम के सपनों के भारत की बुनियाद है।
–क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

