- भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को एक बेहद जरूरी खत भेजा है। विपक्षी नेताओं ने मुख्य न्यायाधीश से मिलकर चुनाव आयोग, छात्रों की गिरफ्तारी और ट्रेन मेट्रो बंद होने जैसे मुद्दों पर एक ज्ञापन सौंपने के लिए वक्त मांगा था। मुख्य न्यायाधीश ने इस मुलाकात से इंकार करते हुए दोनों नेताओं को कानून और संविधान के दायरे में रहकर अदालत का रास्ता अपनाने की सलाह दी है।
सूर्य कांत,
भारत के मुख्य न्यायाधीश
तारीख ग्यारह अक्टूबर दो हजार छब्बीस
आदरणीय श्री मल्लिकार्जुन खड़गे, विपक्ष के नेता, राज्यसभा और श्री राहुल गांधी, विपक्ष के नेता, लोकसभा
मुझे आपका दस अक्टूबर दो हजार छब्बीस का खत मिला है जिसमें आपने सोमवार बारह अक्टूबर दो हजार छब्बीस को शाम चार बजे से पांच बजे के बीच मिलने का वक्त मांगा था ताकि आप इन मुद्दों पर मुझे एक ज्ञापन सौंप सकें।
पहला मुख्य चुनाव आयुक्त और भारत का चुनाव आयोग।
दूसरा कई छात्रों की मनमानी गिरफ्तारी।
तीसरा मेट्रो स्टेशनों का बंद किया जाना।
चौथा ट्रेनों का रद्द होना और इसके अलावा दूसरे मसले।
शुरुआत में ही यह साफ कर देना जरूरी है कि जिन मसलों का आपने ऊपर जिक्र किया है वे सभी मामले पहले से ही भारत के सुप्रीम कोर्ट के सामने विचाराधीन हैं यानी अदालत की कार्यवाही के दायरे में हैं। इसलिए इन लटके हुए मामलों पर चर्चा करने के लिए कोई मीटिंग बुलाना पूरी तरह से शक्तियों के बँटवारे के सिद्धांत के खिलाफ होगा। यह सिद्धांत भारत के संविधान के बुनियादी ढांचे का एक बेहद जरूरी हिस्सा है। ऐसा करना तय की गई नैतिकताओं और अदालत की मर्यादा के भी खिलाफ होगा।
इसी सिलसिले में मैं आपको यह भी याद दिलाना चाहता हूँ कि हमारे संवैधानिक ढांचे के तहत भारत के सुप्रीम कोर्ट के पास आपके खत में उठाई गई दिक्कतों से सीधे निपटने की कोई प्रशासनिक यानी दफ्तरी ताकत नहीं है।
इसके बावजूद हमारे संविधान के अनुच्छेद बत्तीस के तहत मिलने वाले अधिकार क्षेत्र और न्यायिक समीक्षा यानी कानूनों को परखने की ताकत के साथ दूसरी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए हम कानूनी तौर पर भारत के नागरिकों को प्रभावित करने वाले गंभीर मुद्दों पर विचार करने के लिए पूरी तरह पाबंद हैं।
भारत का सुप्रीम कोर्ट देश के हर नागरिक के बुनियादी अधिकारों की हिफाजत करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है। देश के नागरिकों को यह पूरा हक है कि वे कानून में दी गई तय प्रक्रिया के जरिए किसी भी वक्त अपने इन अधिकारों को लागू करवाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएं। इसलिए आपकी तरफ से दफ्तरी स्तर पर कोई ज्ञापन सौंपने के बजाय सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक शक्तियों यानी अदालती रास्ते का इस्तेमाल करना और सही कानूनी जरिया अपनाना ज्यादा बेहतर होगा।
वैसे इसी तरह के मसलों से जुड़े कुछ मामलों की सुनवाई मंगलवार तेरह अक्टूबर दो हजार छब्बीस को होनी तय है। अगर आपको ठीक लगे तो आप सोमवार को सुबह साढे दस बजे से शाम साढे चार बजे के बीच सुप्रीम कोर्ट में खुद आकर या फिर इंटरनेट के जरिए ई फाइलिंग विकल्प का इस्तेमाल करके अपनी औपचारिक याचिका जमा कर सकते हैं।
ई फाइलिंग के जरिए किसी भी दिन और किसी भी वक्त याचिका दर्ज की जा सकती है। मैं आपको पूरा यकीन दिलाता हूँ कि कानून के मुताबिक ऐसी किसी भी याचिका पर जल्द से जल्द सुनवाई की जाएगी।
सादर
सूर्य कांत
-क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

