बियॉन्ड द स्कोर’ थीम पर हुआ 12वां सालाना आयोजन, गवर्नेंस, जोखिम और जवाबदेही पर चर्चा
(शमा ईरानी)
मुंबई के ताज लैंड्स एंड में 10 अक्टूबर को 12वें सालाना कंप्लायंस 10/10 सिम्पोजियम और अवॉर्ड्स का आयोजन किया गया। लेगैसिस की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम की थीम ‘बियॉन्ड द स्कोर’ थी। इसमें कारोबार में नियमों के पालन, बेहतर प्रबंधन, जवाबदेही और भरोसे की अहमियत पर चर्चा की गई।
आज कंप्लायंस का मतलब सिर्फ़ नियमों का पालन करना या काग़ज़ी कार्रवाई पूरी करना नहीं है। असली चुनौती यह है कि कंपनियों के फ़ैसलों, कामकाज और व्यवस्था में नियमों व नैतिक मूल्यों का पालन किस हद तक हो रहा है।
कंपनियों के बोर्ड, नियामक संस्थाएं और दूसरे संबंधित पक्ष चाहते हैं कि कारोबार में बेहतर प्रबंधन और जवाबदेही केवल काग़ज़ों तक सीमित न रहे, बल्कि हर स्तर पर दिखाई दे। डेटा, क्लाउड टेक्नोलॉजी, तीसरे पक्ष की सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल ने इस चुनौती को और जटिल बना दिया है।
टेक्नोलॉजी में तेज़ बदलाव, अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक अनिश्चितता और नियमों से जुड़ी बढ़ती ज़िम्मेदारियों के कारण कंपनियों को अब लगातार निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की ज़रूरत है।
GRACE का अहम रोल
कार्यक्रम में जीआरएसीई यानी गवर्नेंस, रिस्क, एश्योरेंस, कंप्लायंस और एथिक्स के ज़रिए बेहतर प्रबंधन की ज़रूरत को समझाया गया। इसमें इस बात पर ज़ोर दिया गया कि किसी नियम का पालन करना ही काफ़ी नहीं है, बल्कि उसके पीछे के उद्देश्य को भी कंपनी के कामकाज और नेतृत्व के फ़ैसलों में शामिल करना ज़रूरी है।
क्विज़ से हुई शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत कंप्लायंस क्विज़ के फ़ाइनल राउंड से हुई। इसका मक़सद नियमों की जानकारी और उनकी व्यावहारिक समझ को परखने के साथ सीखने की प्रक्रिया को दिलचस्प बनाना था।
इस साल के सिम्पोजियम में इस बात पर भी चर्चा हुई कि कंपनियों की नीतियों, जोखिमों पर नियंत्रण, जवाबदेही और नैतिक मूल्यों के बीच कहाँ अंतर रह जाता है। साथ ही, इन कमियों को दूर करने और नियमों के पालन को बेहतर बनाने के तरीक़ों पर विचार किया गया।
चार पैनल में अहम मुद्दों पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान चार पैनल में कारोबार से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें डेटा की सुरक्षा, निजता और साइबर सुरक्षा के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में भरोसा बनाए रखने जैसे विषय शामिल थे।
चर्चा में कंपनी के डेटा पर नियंत्रण, टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल और एआई के ज़रिए लिए जाने वाले फ़ैसलों के प्रति जवाबदेही जैसे सवालों पर भी ध्यान दिया गया।

