सेमिनार —-युवाओं की मानसिक सेहत पर मंथन

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इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू, तनाव से निपटने और मानसिक मज़बूती पर हुई चर्चा

लखनऊ। आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में पढ़ाई का दबाव, रोज़गार की चिंता, परिवार की उम्मीदें और भविष्य को लेकर अनिश्चितता युवाओं की मानसिक सेहत पर असर डाल रही हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और युवाओं को तनाव से निपटने के तरीके बताना बेहद ज़रूरी हो गया है। इसी मक़सद से इंटीग्रल यूनिवर्सिटी, लखनऊ में मंगलवार को युवा मानसिक स्वास्थ्य, मनोवैज्ञानिक मज़बूती और खुशहाल जीवन पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी हुई।

विश्वविद्यालय के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित इस संगोष्ठी का उद्घाटन केंद्रीय सभागार में हुआ। 13 और 14 अक्टूबर को होने वाले इस कार्यक्रम में युवाओं की मानसिक परेशानियों, तनाव को संभालने और मुश्किल हालात में ख़ुद को मज़बूत बनाए रखने जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।

मानसिक सेहत भी ज़रूरी

संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य युवाओं को यह समझाना है कि जिस तरह शारीरिक सेहत का ख़याल रखना ज़रूरी है, उसी तरह मानसिक सेहत पर ध्यान देना भी अहम है। तनाव, घबराहट, उदासी और भावनात्मक परेशानियों को नज़रअंदाज़ करने के बजाय उन्हें समझना और ज़रूरत पड़ने पर सही मदद लेना चाहिए।

कार्यक्रम में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि युवाओं को ऐसा माहौल मिलना चाहिए, जहां वे अपनी परेशानियों को खुलकर बता सकें और उन्हें सही सलाह व सहयोग मिल सके।

विशेषज्ञों ने रखे विचार

उद्घाटन सत्र की शुरुआत मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. जेबा आकिल के स्वागत भाषण से हुई। उनके मार्गदर्शन में इस संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।

इस अवसर पर सामाजिक उद्यमी, शिक्षाविद्, महिला अधिकार कार्यकर्ता और लेखिका सुश्री उर्वशी साहनी ने अपने विचार रखे। उनका नाम वर्ष 2017 में बीबीसी की 100 प्रभावशाली महिलाओं की सूची में भी शामिल था।

लखनऊ विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष और हैप्पी थिंकिंग लैब की निदेशक प्रो. अर्चना शुक्ला तथा इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के आईआईएमएसआर की डीन प्रो. आभा चंद्रा ने भी विशेष संबोधन दिए।

मुख्य अतिथि ने किया संबोधित

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. राधाकृष्ण धीमान ने संबोधित किया। वह संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान , लखनऊ के निदेशक और एम्स पटना के अध्यक्ष हैं।

इस अवसर पर इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. फुरकान कमर ने भी अपने विचार रखे।

नाटक से दिया संदेश

संगोष्ठी के पहले दिन मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के विद्यार्थियों ने नाटक प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति के ज़रिए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को सामने लाने और लोगों को उनके प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।

इसके बाद निर्वाण हॉस्पिटल, लखनऊ के क्लिनिकल साइकोलॉजी विभाग की अध्यक्ष और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट सुश्री आस्था शर्मा ने तनाव प्रबंधन पर कार्यशाला आयोजित की। इसमें तनाव को समझने और उससे निपटने के व्यावहारिक तरीकों पर जानकारी दी गई।

जागरूकता से मिलेगी मदद

दो दिवसीय संगोष्ठी युवाओं की मानसिक सेहत, भावनात्मक संतुलन, मुश्किल हालात का सामना करने की क्षमता और तनाव प्रबंधन जैसे विषयों पर विचारों के आदान-प्रदान का मंच है।

ऐसे आयोजन युवाओं, शिक्षकों और समाज को यह समझने में मदद कर सकते हैं कि मानसिक परेशानियों को छिपाने के बजाय उनके बारे में बात करना और समय पर मदद लेना ज़रूरी है। इंटीग्रल यूनिवर्सिटी की यह पहल विद्यार्थियों के मानसिक कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक अहम प्रयास है।

–क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

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