मुंबई का ग्रेटफुल फाउंडेशन समाज के सबसे कमजोर और जरूरतमंद तबके के लिए उम्मीद की एक नई किरण बनकर उभरा है। अप्रैल 2023 में कायम हुआ यह पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट किसी बड़े सरकारी या कॉरपोरेट फंड के भरोसे नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से जज्बे, ईमानदारी और इंसानी हमदर्दी की बुनियाद पर काम कर रहा है। सेहत , तालीम , और भुखमरी को मिटाने के मिशन के साथ शुरू हुआ यह सफर आज सैकड़ों परिवारों की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला रहा है।
मिशन के पीछे की सोच और जिम्मेदार लोग
इस फाउंडेशन की बुनियाद और इसकी सबसे बड़ी ताकत इसके पीछे काम करने वाले समर्पित लोग हैं:
• फाउंडर और मैनेजिंग ट्रस्टी: इस ट्रस्ट की कमान एक ऐसी महिला शिक्षाविद और एक्टिविस्ट एनी नूरिश शेख के हाथों में है, जो ऑल इंडिया मुस्लिम वुमेन एसोसिएशन की मेंबर रही हैं और मास कम्युनिकेशन व मार्केटिंग की प्रोफेसर के तौर पर भी जुड़ी रही हैं। उनके सामाजिक और धार्मिक मूल्यों की गहरी समझ ने ही इस फाउंडेशन को ‘खिदमत-ए-खल्क’ का जरिया बनाया है।
• जमीनी कार्यकर्ता और वॉलेंटियर्स: संस्था की कोर टीम में डॉक्टरों, समाजसेवियों और युवाओं का एक मजबूत नेटवर्क शामिल है, जो बिना किसी स्वार्थ के मुंबई की झुग्गियों और अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

खिदमत के मुख्य स्तंभ
मशीनी रफ्तार से दौड़ती मुंबई में यह फाउंडेशन समाज के दर्द को बांटने के लिए कई स्तरों पर काम कर रहा है:
सेवा का क्षेत्र प्रमुख पहल और गतिविधियां
हेल्थकेयर और मेडिकल सहायता गरीब मरीजों के लिए दवाओं का इंतजाम, इलाज का खर्च उठाना और भारी-भरकम हॉस्पिटल बिलों से राहत दिलाना।
भूख के खिलाफ जंग मुंबई के म्युनिसिपल अस्पतालों में आने वाले गरीब मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए सुबह का नाश्ता पोहा, उपमा और छाछ वगैरह और अनाथालयों में मुफ्त भोजन बांटना।
तालीम और स्कॉलरशिप आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की पढ़ाई न छूटे, इसके लिए जरूरतमंद और होनहार छात्रों की स्कूल-कॉलेज फीस भरना और उन्हें किताबें मुहैया कराना।
महिला सशक्तिकरण बेसहारा और जरूरतमंद महिलाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने और रोजगार हासिल करने में मदद करना।
फैमिली व करियर काउंसलिंग टूटने की कगार पर खड़े परिवारों की आपसी समस्याओं को सुलझाना और नौजवानों को सही करियर चुनने के लिए सही गाइडेंस देना।
इंटरव्यू
मदद को सिर्फ दान नहीं, इंसानी जिम्मेदारी मानता हैं ‘ग्रेटफुल फाउंडेशन’
मुंबई के जोगेश्वरी स्थित हाईवे के पास एचबीटी ट्रॉमा केयर सेंटर पर ऐसा ही एक मानवीय प्रयास देखने को मिला। ‘ग्रेटफुल फाउंडेशन’ की टीम यहां पहुंची और मरीजों तथा उनके परिजनों के लिए फल वितरण की गतिविधि में शामिल हुई।
इस अवसर पर क़ौमी फ़रमान के साहित्य संपादक शिबली रामपुरी ने संस्था प्रमुख एनी नूरिश शेख से विशेष बातचीत की। बातचीत में संस्था की सोच, सामाजिक सेवा के उद्देश्य, उसकी गतिविधियों और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने के प्रयासों को समझने का मौका मिला।
सवाल: ‘ग्रेटफुल फाउंडेशन’ की शुरुआत के पीछे मूल विचार क्या है?
जवाब: संस्था का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाना और उन्हें यह एहसास दिलाना है कि वे समाज में अकेले नहीं हैं। मदद केवल पैसे देने का नाम नहीं है। कई बार किसी को सही मार्गदर्शन चाहिए, किसी को शिक्षा में सहयोग चाहिए, किसी परिवार को मुश्किल समय में सहारे की जरूरत होती है और किसी बुजुर्ग को सिर्फ किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है जो उसकी बात सुन सके।
सवाल: संस्था किन लोगों के लिए काम कर रही है?
जवाब: हमारा ध्यान अलग-अलग जरूरतों वाले लोगों पर है। जरूरतमंद परिवार, बच्चे, विद्यार्थी, बुजुर्ग और ऐसे लोग जिन्हें किसी आपात स्थिति में सहायता की जरूरत पड़ती है, इन सभी तक पहुंचने की कोशिश की जाती है।
सवाल: आज के समय में ऐसी संस्थाओं की जरूरत क्यों बढ़ गई है?
जवाब: समाज में बहुत से लोग ऐसे हैं जो अपनी परेशानी खुलकर बता नहीं पाते। कई बार परिवार आर्थिक संकट में होता है लेकिन बाहर से सब सामान्य दिखाई देता है। ऐसे लोगों तक पहुंचना जरूरी है। हमारा प्रयास यही है कि मदद सम्मान के साथ पहुंचे और किसी जरूरतमंद को अपनी मजबूरी साबित करने के लिए बार-बार परेशान न होना पड़े।
सवाल: क्या आपकी संस्था सिर्फ आर्थिक मदद करती है?
जवाब: नहीं। हमारी कोशिश व्यापक स्तर पर काम करने की है। शिक्षा, मार्गदर्शन, जरूरतमंद परिवारों की सहायता, बुजुर्गों का सहयोग और इमरजेंसी सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में भी काम किया जा रहा है। हमारा मानना है कि किसी व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश केवल तत्काल आर्थिक मदद देने से ज्यादा महत्वपूर्ण है।
सवाल: समाज के लोगों से आपकी क्या अपील है?
जवाब: समाज में बहुत से लोग मदद करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें सही जगह और सही व्यक्ति तक पहुंचने का माध्यम नहीं मिलता। हम चाहते हैं कि लोग अपनी क्षमता के अनुसार समाज के जरूरतमंद लोगों की मदद करें। किसी की मदद के लिए हमेशा बड़ी रकम की जरूरत नहीं होती। समय देना, किसी विद्यार्थी को मार्गदर्शन देना, किसी बुजुर्ग की मदद करना या किसी जरूरतमंद परिवार तक सही सहायता पहुंचाना भी बहुत बड़ी सेवा है।
सवाल: आपकी नजर में किसी संस्था की सबसे बड़ी सफलता क्या है?
जवाब: सबसे बड़ी सफलता तब होती है जब जिस व्यक्ति की मदद की गई है, वह आगे चलकर अपने पैरों पर खड़ा हो जाए और किसी दूसरे जरूरतमंद की मदद करने लगे। मदद की यह श्रृंखला आगे बढ़ती रहे, यही सबसे बड़ी कामयाबी है।
सवाल: आगे ‘ग्रेटफुल फाउंडेशन’ की क्या योजना है?
जवाब: हमारा प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद लोगों तक पहुंचा जाए और समाज के अलग-अलग वर्गों को इस काम से जोड़ा जाए। संस्था के काम को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवारों की सहायता को मजबूत करना हमारी प्राथमिकताओं में है।
एक छोटी-सी पहल, बड़ा असर
‘ग्रेटफुल फाउंडेशन’ की सोच की खास बात यही है कि सामाजिक सेवा को केवल चंदे या आर्थिक सहायता तक सीमित न रखा जाए। किसी जरूरतमंद की समस्या को समझना, उसके सम्मान को बनाए रखना और उसे आगे बढ़ने का अवसर देना,सामाजिक सेवा का यही मानवीय पक्ष इस पहल को महत्वपूर्ण बनाता है।

