नौमान अशरफ अध्यक्ष, नसरा नईम उपाध्यक्ष और मोहम्मद हमदान सचिव चुने गए
–अब्दुल कलाम
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी यानी एएमयू में आठ साल के लंबे इंतजार के बाद छात्रसंघ चुनाव आखिरकार संपन्न हो गया। 5 नवंबर को हुए मतदान के बाद 6 नवंबर को नतीजे सामने आए। इन चुनावों ने न सिर्फ विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति की वापसी कराई, बल्कि महिला भागीदारी के मामले में भी एक नया इतिहास बना दिया।
सबसे बड़ी खबर यह रही कि नसरा नईम एएमयू छात्रसंघ की पहली महिला उपाध्यक्ष चुनी गई हैं। 105 साल के छात्रसंघ इतिहास में पहली बार किसी महिला ने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या मानद सचिव जैसे तीन प्रमुख पदों में से किसी एक पर जीत हासिल की है। नसरा नईम को 7,091 वोट मिले, जबकि उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 5,818 वोट मिले। इस तरह उन्होंने 1,273 वोट के अंतर से जीत दर्ज की।
अध्यक्ष पद पर शोध छात्र मोहम्मद नौमान अशरफ ने बड़ी जीत हासिल की। उन्हें 7,797 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी मोहम्मद इंतिखाब को 3,676 वोट मिले। नौमान अशरफ ने 4,121 वोट के अंतर से अध्यक्ष पद जीता।
मानद सचिव के पद पर बीटेक के छात्र मोहम्मद हमदान निर्वाचित हुए। उन्हें 8,385 वोट मिले, जबकि उनके मुकाबले में अहमद फ़राज़ रज़ी को 6,882 वोट मिले। हमदान की जीत का अंतर 1,503 वोट रहा।
आठ साल का इंतजार खत्म
एएमयू में पिछली बार छात्रसंघ चुनाव 2018 में हुए थे। इसके बाद अलग-अलग कारणों से चुनाव नहीं हो सके। इस दौरान विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले हजारों छात्रों ने बिना निर्वाचित छात्रसंघ के अपनी पढ़ाई पूरी की।
2026 में चुनाव कराने की मांग ने फिर जोर पकड़ा। छात्रों के आंदोलन और लगातार दबाव के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 9 अक्टूबर को चुनाव कराने का फैसला किया और 5 नवंबर की तारीख तय की। चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए प्रोफेसर जावेद तालिब को मुख्य चुनाव अधिकारी बनाया गया था।
इस चुनाव में करीब 20,754 मतदाता थे और 15,523 छात्रों ने मतदान किया। यानी लगभग 74.65 प्रतिशत मतदान हुआ। आठ साल बाद चुनाव होने के कारण छात्रों में काफी उत्साह दिखाई दिया और कई जगह मतदान के लिए लंबी कतारें भी देखने को मिलीं।
महिलाओं की मजबूत मौजूदगी
इस बार एएमयू छात्रसंघ चुनाव का एक खास पहलू महिलाओं की बढ़ी हुई भागीदारी रही। नसरा नईम की जीत तो ऐतिहासिक है ही, इसके अलावा छात्रसंघ के 10 कैबिनेट पदों में से पांच पर महिला उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।
इसका मतलब साफ है कि एएमयू की छात्र राजनीति में महिलाओं की भूमिका अब केवल भागीदारी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वे नेतृत्व की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। नसरा नईम की जीत को इसी बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल माना जा रहा है।
महिला कॉलेज में भी नई टीम
एएमयू के महिला कॉलेज छात्रसंघ के चुनाव भी इसी प्रक्रिया के तहत हुए। अनाम रियाज़ अध्यक्ष, आयशा खान उपाध्यक्ष और मरियम जान मानद सचिव चुनी गईं। महिला कॉलेज की कैबिनेट में भी आठ छात्राओं ने जीत हासिल की।
अब असली परीक्षा शुरू
चुनाव जीतना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है, लेकिन नवनिर्वाचित छात्र नेताओं के सामने अब उससे बड़ी जिम्मेदारी है। आठ साल से निर्वाचित छात्रसंघ का इंतजार कर रहे छात्रों की उम्मीदें अब नई टीम से जुड़ी हैं।
फीस, हॉस्टल, लाइब्रेरी, कैंपस की सुविधाएं, छात्रवृत्ति, सुरक्षा, पढ़ाई का माहौल और प्रशासन के साथ छात्रों की बातचीत जैसे मुद्दे नई टीम के सामने रहेंगे। इसके साथ ही एएमयू जैसे ऐतिहासिक और संवेदनशील विश्वविद्यालय में छात्रसंघ की जिम्मेदारी केवल कैंपस की समस्याओं तक सीमित नहीं होगी। छात्रों के बीच संवाद, लोकतांत्रिक माहौल और अलग-अलग विचारों के लिए जगह बनाए रखना भी बड़ी चुनौती होगी।
नौमान अशरफ, नसरा नईम और मोहम्मद हमदान के सामने अब यह साबित करने का मौका है कि आठ साल बाद लौटा छात्रसंघ केवल चुनाव और जीत का नाम नहीं, बल्कि छात्रों की आवाज को सही तरीके से विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचाने का मजबूत माध्यम बन सकता है।
एएमयू के लिए एक नए दौर की शुरुआत
इन चुनावों को सिर्फ तीन पदों पर जीत और हार के तौर पर देखना शायद पर्याप्त नहीं होगा। आठ साल बाद मतदान के जरिए छात्रों को अपनी पसंद के प्रतिनिधि चुनने का मौका मिला है। सबसे अहम बात यह है कि इस बार महिला नेतृत्व ने भी इतिहास में अपनी जगह बनाई है।
एएमयू प्रशासन ने चुनाव के शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होने को विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक परंपरा की सफलता बताया है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि नई छात्रसंघ टीम अपने कार्यकाल में छात्रों की उम्मीदों और विश्वविद्यालय की पुरानी लोकतांत्रिक परंपरा के बीच कितना बेहतर तालमेल बना पाती है।
-क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

