नई दिल्ली, 5 नवंबर 2026। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत तैयार की गई मतदाता सूचियों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने कहा है कि चुनाव कराने से पहले मतदाता सूचियों में हुई कथित गड़बड़ियों और पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने की शिकायतों का पारदर्शी तरीके से समाधान किया जाना चाहिए, ताकि चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा बहाल हो सके।
जमाअत की मासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) के सचिव नदीम खान ने कहा कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में SIR से पहले मतदाताओं की संख्या लगभग 18.71 करोड़ बताई गई थी, जो अंतिम सूची में घटकर करीब 16.43 करोड़ रह गई। उनके अनुसार करीब 2.29 करोड़ मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है।
नदीम खान ने दावा किया कि इस कमी का सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश में है, जहां मतदाताओं की संख्या में लगभग 2.04 करोड़ की कमी बताई गई है। उन्होंने पंजाब में करीब 14 लाख, उत्तराखंड में 8 लाख, मणिपुर में 1.3 लाख और गोवा में लगभग 1.27 लाख की कमी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर नामों के हटने की वजहों की राज्यवार और पारदर्शी समीक्षा जरूरी है।
उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को लेकर उठ रही आशंकाओं का जिक्र करते हुए कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची से जुड़े सभी सवालों का समाधान किया जाना चाहिए। जमाअत ने मांग की कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हटाए गए हैं, उन्हें वापस शामिल किया जाए और नाम हटाने, जोड़ने, बहाल करने, आपत्तियों तथा उनके नतीजों से संबंधित स्पष्ट राज्यवार जानकारी सार्वजनिक की जाए।
संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से SIR प्रक्रिया को लेकर उठी चिंताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेने और इस्तीफा देने की भी मांग की। जमाअत का कहना है कि विधानसभा चुनाव निर्धारित समय पर होने चाहिए, लेकिन इससे पहले यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि मतदाता सूची निष्पक्ष, पारदर्शी और समावेशी हो।
नेताओं और असहमति रखने वालों को निशाना बनाने का आरोप
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने नेताओं, कार्यकर्ताओं और सरकार से असहमति रखने वालों के खिलाफ आपराधिक मामलों और जांच एजेंसियों के कथित इस्तेमाल पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कानून का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिशोध के लिए नहीं बल्कि समान रूप से और निष्पक्ष तरीके से किया जाना चाहिए।
उन्होंने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हुए और उन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। उन्होंने मुहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़ी सरकारी कार्रवाई और आजम खान को जमानत मिलने के बाद प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दोबारा गिरफ्तार किए जाने का भी जिक्र किया।
प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि जांच एजेंसियों की शक्तियों के इस्तेमाल की निगरानी जरूरी है, ताकि उनका इस्तेमाल राजनीतिक विरोध को दबाने या शांतिपूर्ण असहमति को हतोत्साहित करने के लिए न हो।
सर्दियों की तैयारियों और प्रदूषण पर भी चिंता
जमाअत ने आने वाली सर्दियों को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से समय रहते राहत और स्वास्थ्य संबंधी तैयारियां शुरू करने की अपील की। संगठन ने रैन बसेरों की संख्या बढ़ाने, वहां जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने, जरूरतमंदों को गर्म कपड़े और कंबल उपलब्ध कराने तथा जोखिम वाले इलाकों में मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयां स्थापित करने की मांग की।
प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि सर्दियों में राहत कार्यों में धर्म, जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने लोगों से भी अपने आसपास रहने वाले बुजुर्गों, अकेले लोगों और बेघर लोगों की मदद करने की अपील की।
जमाअत ने वायु प्रदूषण पर भी चिंता जताते हुए निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल और खुले में कचरा जलाने पर सख्ती की मांग की। संगठन ने कहा कि प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंचने का इंतजार करने के बजाय पहले से निगरानी, जन-जागरूकता और स्वास्थ्य सुरक्षा के उपाय किए जाने चाहिए, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए।
–क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

