मलिक मोतसिम खान बोले, धर्मनिरपेक्षता के नाम पर ऐतिहासिक इबादतगाह को नहीं मिटाया जा सकता
नई दिल्ली, 4 नवंबर। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने दिल्ली के कृषि भवन परिसर स्थित करीब सौ साल पुरानी कदीमी मस्जिद को हटाने के प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का मतलब सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करना है, न कि किसी ऐतिहासिक इबादतगाह को हटाने के लिए इसका इस्तेमाल करना।
जमाअत की ओर से जारी बयान में मलिक मोतसिम खान ने कहा कि मस्जिद के इतिहास, लंबे समय से वहां नमाज अदा किए जाने और 1940 के समझौते तथा 1970 की वक्फ अधिसूचना पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मस्जिद कृषि भवन परिसर के निर्माण से पहले से मौजूद है और सरकार को उसके धार्मिक इस्तेमाल के अधिकारों का ध्यान रखना चाहिए।
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि यह धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है। सरकार को अदालत में मामला लंबित रहने के दौरान ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए, जिसे बाद में बदला न जा सके।
मलिक मोतसिम खान ने कहा कि मस्जिद समिति सेंट्रल विस्टा परियोजना को रोकना नहीं चाहती, बल्कि चाहती है कि पुनर्विकास योजना में मौजूदा मस्जिद की सुरक्षा और उसके इस्तेमाल की व्यवस्था की जाए। उन्होंने केंद्र सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने और मस्जिद को सुरक्षित रखने की अपील की।
–क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

