कृषि भवन परिसर में मौजूद मस्जिद को हटाने की केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में दी दलील, मस्जिद को सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के खिलाफ बताया
नई दिल्ली। दिल्ली के कृषि भवन परिसर में मौजूद करीब 100 साल पुरानी क़दीमी मस्जिद को लेकर विवाद सामने आया है। केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा है कि सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) के पुनर्विकास के लिए इस मस्जिद को हटाना जरूरी है।
सरकार का कहना है कि सरकारी जमीन पर इस मस्जिद का होना उचित नहीं है और यह सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के अनुकूल नहीं है।
बताया जाता है कि यह मस्जिद 1912 से पहले से मौजूद है। उस समय कृषि भवन का निर्माण भी नहीं हुआ था। ऐसे में मस्जिद के पुराने इतिहास और वहां उसकी मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
इस मामले पर सांसद और एआईएमआईएम प्रमुख बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पर सरकार के रुख पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा है कि एक तरफ सेंट्रल विस्टा परियोजना की शुरुआत भूमि पूजन जैसे धार्मिक अनुष्ठान के साथ की गई, वहीं दूसरी तरफ एक पुरानी मस्जिद को सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के खिलाफ बताया जा रहा है।
ओवैसी ने इस विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाते हुए सवाल उठाया है कि अगर सरकारी परियोजना में एक धर्म के धार्मिक अनुष्ठान से धर्मनिरपेक्षता प्रभावित नहीं होती, तो दशकों से मौजूद मस्जिद से धर्मनिरपेक्षता को खतरा कैसे हो सकता है?
यह मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
-क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

