अब्दुल अल्लाह के सिवा किसी की गुलामी नहीं करता.अब दरी नहीं बिछाएंगे-अमेरिका में अब्दुल की जीत से गदगद ओवैसी

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ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए अब्दुल अल-सयद की जीत को उत्तर प्रदेश की सियासत से जोड़ दिया। उन्होंने लिखा, “एक अब्दुल मिशिगन में जीत गया, अब उत्तर प्रदेश के अब्दुल को अपनी सियासी पहचान मजबूत करनी होगी।” उन्होंने आगे लिखा, “संघियों ने ‘अब्दुल’ को एक तंज में बदलने की बहुत कोशिश की है। वक्त आ गया है कि हम दिखाएं कि अब्दुल अल्लाह के सिवा किसी की गुलामी नहीं करता। अब दरी नहीं बिछाएंगे।

अल-सैयद ने मिशिगन यूनिवर्सिटी और कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई की है। उन्होंने रोड्स स्कॉलर के तौर पर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की है। अल-सैयद ने सारा जकाकू से शादी की है, जिनके माता-पिता भारतीय मूल के हैं। अल-सैयद खुद को एक ‘पूंजीवादी’ बताते हैं। उनके चुनाव अभियान का मुख्य फोकस जीवन-यापन की लागत और अन्य मुद्दों पर था। उनके इस अभियान पर पिछले साल न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी के चुनाव अभियान का भी प्रभाव देखने को मिला।

उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में सभी नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ‘मेडिकेयर फॉर ऑल’, इजरायल को दी जाने वाली सैन्य सहायता समाप्त करने और चुनावी फंडिंग में सुधार जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। मिशिगन में गवर्नर पद के लिए 2018 में हुए डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव में ग्रेचेन व्हिटमर से 20 फीसदी से अधिक मतों के अंतर से हारने के करीब सात साल बाद अब्दुल अल-सयद ने दोबारा राजनीतिक मैदान में वापसी की। हार के बाद वह कुछ समय तक सक्रिय राजनीति से दूर रहे। इस दौरान उन्होंने अपना पॉडकास्ट शुरू किया, एक किताब लिखी और यूट्यूब व टेलीविजन पर नियमित रूप से नजर आने लगे।

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