रीढ़ की हड्डी में नस दबने से हैं परेशान, डॉक्टरों ने आराम की सलाह दी
–जावेद जमालुद्दीन
मुंबई, 2 नवंबर। मशहूर ख़त्तात और पत्रकार असलम किरतपुरी की तबीयत फिलहाल स्थिर है। रीढ़ की हड्डी में नस दबने के कारण उन्हें तकलीफ़ हो रही है। डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह आराम करने की सलाह दी है।
रविवार को उर्दू जर्नलिस्ट एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने मीरा रोड स्थित उनके घर पहुंचकर उनका हालचाल जाना और जल्द स्वस्थ होने की दुआ की। प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई वरिष्ठ पत्रकार और दैनिक हिंदुस्तान के संपादक सरफराज़ अहमद आरज़ू ने की।
इस मौके पर यूजेए के अध्यक्ष और उर्दू टाइम्स के संपादक फारूक़ अंसारी, उपाध्यक्ष जावेद जमालुद्दीन, साप्ताहिक हुमा शमा के संपादक अकलीम शेख और साप्ताहिक तिरछी नज़र के संपादक मुशर्रफ शम्सी मौजूद थे।
50 साल से अधिक का सफर
असलम किरतपुरी ने 1970 के दशक में दैनिक इंक़लाब से बतौर कातिब अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत की थी। बाद में वे दैनिक हिंदुस्तान से जुड़े। अपनी मेहनत और लगातार अभ्यास से उन्होंने ख़त्ताती यानी खूबसूरत लिखावट के इस खास फन में महारत हासिल की। धीरे-धीरे उनकी पहचान मुंबई के जाने-माने ख़त्तातों में होने लगी।
उन्होंने साप्ताहिक ‘अल-फ़तह’ भी निकाला और ख़त्ताती के क्षेत्र में कई नई शैलियां विकसित कीं। पत्रकारिता और ख़त्ताती के साथ वे शिक्षा और समाज से जुड़े कामों में भी सक्रिय रहे। मुस्लिम समाज में शिक्षा और जागरूकता बढ़ाने की कई कोशिशों में उन्होंने अहम भूमिका निभाई।
छात्रों को दे रहे हैं तालीम
असलम किरतपुरी पिछले चार-पांच वर्षों से मुंबई यूनिवर्सिटी के उर्दू विभाग में छात्रों को ख़त्ताती सिखा रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र इस पुराने कला रूप को सीख रहे हैं और उसमें अपनी कुशलता बढ़ा रहे हैं।
उनकी बीमारी की खबर से पत्रकारिता और साहित्य जगत में चिंता है। उनके साथी, छात्र और चाहने वाले उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं, ताकि वे फिर से अपने इल्मी और फन्नी काम जारी रख सकें।
-क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

