(रईस खान)
कांग्रेस पार्टी की काबिल-ए-तारीफ वरिष्ठ नेत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष और पूर्व राज्य सभा सांसद श्रीमती मोहसिना किदवई साहिबा का आज दिल्ली में इंतकाल हो गया। यह खबर पूरे देश खासकर उत्तर प्रदेश के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और ख्वातीनों के लिए बेहद अफसोसनाक है। ९४ साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली।
श्रीमती मोहसिना किदवई साहिबा का जन्म १ जनवरी १९३२ को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में एक शरीफ और एलीट मुस्लिम परिवार में हुआ था। अवध के इस कुलीन खानदान से ताल्लुक रखने वाली मोहसिना साहिबा ने महज २८ साल की उम्र में यानी १९६० में उत्तर प्रदेश विधान परिषद की सदस्यता हासिल कर राजनीति में कदम रखा। तब से लेकर आज तक उन्होंने कांग्रेस पार्टी की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी।
वे इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के दौर में केंद्रीय मंत्री रहीं। कई अहम मंत्रालय संभाले। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने पार्टी को मुश्किल वक्त में संभाला। १९७८ में आजमगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर वे उस इलाके की पहली महिला सांसद बनीं। इसके बाद लोकसभा की तीन लगातार टर्म्स में सेवा की। बाद में राज्य सभा सांसद भी रहीं।
मोहसिना किदवई साहिबा ने खास तौर पर मुस्लिम ख्वातीनों को राजनीति में आगे आने का हौसला दिया। न जाने कितनी बहनों-बेटियों को उन्होंने हिम्मत दी और मंच पर खड़ा किया। वे नेहरू-गांधी परिवार की करीबी रहीं और पार्टी के लिए हमेशा एक भरोसेमंद स्तंभ साबित हुईं। अपनी आत्मकथा “माई लाइफ इन इंडियन पॉलिटिक्स” में उन्होंने अपनी राजनीतिक जिंदगी के उतार-चढ़ाव साफ-साफ लिखे।
कांग्रेस की इस दिग्गज नेत्री ने हमेशा गरीबों, महिलाओं और कमजोर तबके के लिए आवाज उठाई। उनका इंतकाल न सिर्फ कांग्रेस परिवार बल्कि पूरे मुल्क के लिए एक बड़ा नुकसान है।
ख़ुदा उनको जन्नत-उल-फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए। उनके घर वालों, रिश्तेदारों और लाखों चाहने वालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
अल्लाह उनकी मगफिरत फरमाए। आमीन।

