मुंबई। राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा, मुंबई में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में “इंडियाज़ फ्रीडम लेगेसी: द अनसंग, द अनफॉरगॉटन” नाम से एक खास प्रदर्शनी का भव्य उद्घाटन हुआ। इस प्रदर्शनी का मकसद आजादी की लड़ाई में उन लोगों की कुर्बानियों और खिदमत को सामने लाना है, जिन्हें इतिहास में वह जगह नहीं मिल सकी जिसके वे हकदार थे।
इस प्रदर्शनी में खास तौर पर स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व मुंबई लोक निर्माण मंत्री बैरिस्टर मोहम्मद यासीन नूरी की जिंदगी, उनकी देशभक्ति और समाज के लिए की गई खिदमत को प्रमुखता से पेश किया गया है। नूरी साहब ने आजादी के दौर में देश के लिए काम किया और बाद में सार्वजनिक जीवन में भी अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। प्रदर्शनी के जरिए उनकी जिंदगी और उनके काम को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश की गई है।
प्रदर्शनी में 200 से ज्यादा दुर्लभ तस्वीरें, पुराने दस्तावेज, अखबारों की कतरनें और दूसरी पुरानी सामग्री रखी गई है। ये दस्तावेज उस दौर की राजनीतिक और सामाजिक जिंदगी की झलक पेश करते हैं और बताते हैं कि देश की आजादी और तरक्की में अलग-अलग लोगों ने किस तरह अपना योगदान दिया।
अंजुमन-ए-इस्लाम की खास मौजूदगी
इस ऐतिहासिक मौके पर अंजुमन-ए-इस्लाम के अध्यक्ष डॉ. जहीर काज़ी, पद्मश्री से सम्मानित, बतौर विशेष अतिथि मौजूद रहे। उनके साथ अंजुमन-ए-इस्लाम के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुश्ताक अंतुले, जनरल बोर्ड सदस्य डॉ. खालिद शेख, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा निदेशक सुश्री ऐनुल अत्तार और अंजुमन-ए-इस्लाम कंप्यूटर सेंटर के निदेशक डॉ. साबिर सैयद भी मौजूद रहे।
अंजुमन-ए-इस्लाम का यह प्रतिनिधिमंडल संस्था की तरफ से इस अहम ऐतिहासिक आयोजन में शामिल हुआ। उनकी मौजूदगी ने इस बात को भी जाहिर किया कि समाज की तालीम और तरक्की के साथ-साथ अपनी ऐतिहासिक विरासत को याद रखना और उसे आने वाली नस्लों तक पहुंचाना भी जरूरी है।
इतिहास से नई पीढ़ी को जोड़ने की जरूरत
अंजुमन-ए-इस्लाम का मानना है कि विरासत की हिफाजत और नई पीढ़ी की तालीम, दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। अगर युवा अपने इतिहास, आजादी की लड़ाई और देश के लिए कुर्बानी देने वाले लोगों के बारे में जानेंगे, तो उनमें देश के प्रति जिम्मेदारी और समाज के लिए कुछ करने का जज़्बा भी मजबूत होगा।
ऐसी प्रदर्शनियां सिर्फ पुरानी तस्वीरों और दस्तावेजों को देखने का मौका नहीं देतीं, बल्कि हमें यह सोचने का अवसर भी देती हैं कि आज का भारत किन लोगों की मेहनत, कुर्बानी और संघर्ष से बना है।
यह प्रदर्शनी 16 अगस्त से 31 अगस्त तक आम लोगों के लिए खुली रहेगी। इतिहास, कला, शिक्षा और देश की आजादी के सफर में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए यह प्रदर्शनी एक अहम मौका है। खास तौर पर युवाओं और विद्यार्थियों को यहां आकर देश की आजादी के उन गुमनाम और भुला दिए गए किरदारों के बारे में जानना चाहिए, जिनकी कुर्बानियों ने भारत के इतिहास को आकार दिया।
“इंडियाज़ फ्रीडम लेगेसी” जैसी पहल हमें याद दिलाती है कि आजादी सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि लाखों लोगों की मेहनत, संघर्ष और कुर्बानी की कहानी है। इस विरासत को याद रखना और अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।
–क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

