इस्लामी तारीख में पैगंबर हज़रत मुहम्मद ﷺ की विलादत को पूरी इंसानियत के लिए एक अज़ीम रहमत माना जाता है। सीरत और दलाइल-ए-नुबुव्वत की किताबों में आपकी विलादत से पहले, विलादत के वक्त और बाद में दिखाई देने वाली कई निशानियों का जिक्र मिलता है।
मशहूर मुहद्दिस और इतिहासकार अल-सखावी ने लिखा है कि पैगंबर ﷺ की आमद से जुड़ी निशानियां बहुत ज्यादा हैं। कई उलमा और मुहद्दिसीन, जैसे अबू नईम और सुहैली, ने इन रिवायतों और निशानियों को जमा करने का काम किया है।
नीचे इन्हीं रिवायतों को आसान उर्दू लफ्जों में पेश किया जा रहा है।
मक्का में खुशी और बरकत का साल
रिवायतों में आता है कि पैगंबर ﷺ की विलादत से एक साल पहले कुरैश के लोगों के लिए बड़ा मुश्किल दौर था। सूखा पड़ा हुआ था और लोग परेशान थे।
लेकिन जब हज़रत आमिना रज़ियल्लाहु अन्हा के गर्भ में पैगंबर मुहम्मद ﷺ तशरीफ लाए, तो हालात बदलने लगे। जमीन हरी-भरी होने लगी, चरागाहों में हरियाली आई और पेड़ों पर फल आने लगे।
मक्का के लोगों ने उस साल को “आमुल फत्ह वस्सुरूर”, यानी जीत और खुशी का साल कहा।
रिवायतों में हज़रत अब्दुल मुत्तलिब का भी जिक्र मिलता है, जो उस समय कुरैश के बड़े सरदार थे। वे काबा शरीफ के पास जाकर अल्लाह का शुक्र अदा करते और आने वाले उस महान बच्चे की खुशखबरी का जिक्र करते थे।
कायनात में खुशी की खबर
कुछ रिवायतों में हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से बयान मिलता है कि उस दौर में कुरैश के जानवरों तक ने पैगंबर ﷺ की आमद की खुशी की खबर दी।
इन रिवायतों में बताया गया है कि अल्लाह की इस बड़ी नेमत की खुशखबरी जमीन और आसमान में फैल गई।
यह उस अज़ीम हस्ती की आमद थी, जिन्हें अल्लाह तआला ने रहमतुल्लिल आलमीन, यानी पूरी दुनिया के लिए रहमत बनाकर भेजा।
पैगंबर ﷺ की विलादत का मंज़र
मशहूर मुहद्दिस इमाम बैहकी ने अपनी किताब दलाइलुन नुबुव्वत में पैगंबर ﷺ की विलादत से जुड़ी रिवायतें बयान की हैं।
एक रिवायत में हज़रत फातिमा बिन्त अब्दुल्लाह सकफिया रज़ियल्लाहु अन्हा बयान करती हैं कि वह हज़रत आमिना रज़ियल्लाहु अन्हा के पास मौजूद थीं।
वह कहती हैं कि उन्होंने सितारों को बहुत करीब महसूस किया और उन्हें लगा कि शायद सितारे जमीन पर गिर पड़ेंगे। फिर जब पैगंबर ﷺ की विलादत हुई तो एक नूर जाहिर हुआ, जिससे घर और उसके आसपास का इलाका रोशन हो गया।
कुछ दूसरी रिवायतों में पैगंबर ﷺ की विलादत के वक्त आपकी खास कैफियत का भी जिक्र मिलता है।
हज़रत अब्दुल मुत्तलिब की खुशी
जब पैगंबर ﷺ की विलादत हुई तो हज़रत आमिना रज़ियल्लाहु अन्हा ने आपके दादा हज़रत अब्दुल मुत्तलिब को इसकी खबर भेजी।
वे खुशी-खुशी अपने पोते को देखने आए। हज़रत आमिना रज़ियल्लाहु अन्हा ने उन्हें विलादत के दौरान देखी गई निशानियों के बारे में बताया।
हज़रत अब्दुल मुत्तलिब ने बच्चे को गोद में लिया, अल्लाह का शुक्र अदा किया और उसके लिए दुआ की।
उनके दिल में इस नवजात बच्चे के लिए खास मोहब्बत और अज़मत का एहसास था।
फारस की आग बुझने की रिवायत
सीरत की किताबों में एक मशहूर रिवायत यह भी मिलती है कि पैगंबर ﷺ की विलादत की रात पारसियों की वह आग बुझ गई, जिसकी वे सदियों से पूजा करते थे।
कहा जाता है कि यह आग लंबे समय से लगातार जल रही थी और उसे कभी बुझने नहीं दिया जाता था। लेकिन उस रात वह बुझ गई।
इसे उस दौर की पुरानी दुनिया और गलत मान्यताओं के खत्म होने तथा तौहीद के नूर के फैलने की एक निशानी के रूप में बयान किया जाता है।
शैतानों पर आसमान की निगरानी
कुछ रिवायतों में आता है कि पैगंबर ﷺ की विलादत की रात आसमान की हिफाजत का सिलसिला और सख्त कर दिया गया और शैतानों को आसमानी खबरें सुनने से रोका गया।
कुरआन में भी आसमान की हिफाजत और शिहाब यानी चमकते सितारों जैसी चीजों का जिक्र मिलता है।
रिवायतों में यह भी कहा गया है कि शैतान को कई मौकों पर गहरा सदमा पहुंचा, जिनमें पैगंबर ﷺ की विलादत और आपकी नुबुव्वत का एलान भी शामिल है।
अहले किताब को भी थी आने वाले नबी की खबर
यहूदी और ईसाई धार्मिक किताबों के जानकारों को भी आने वाले नबी की निशानियों का इल्म होने की रिवायतें मिलती हैं।
कुछ रिवायतों में एक यहूदी आलिम का जिक्र आता है, जिसने पैगंबर ﷺ की विलादत की रात मक्का में यह खबर दी कि इस शहर में एक बड़े नबी का जन्म हुआ है।
इसके अलावा पैगंबर ﷺ के दोनों कंधों के बीच मौजूद मुहर-ए-नुबुव्वत भी आपकी विशेष निशानियों में शामिल थी। कई रिवायतों में आता है कि अहले किताब के लोग इस निशानी के बारे में पूछते थे।
किसरा के महल में दरार
कुछ रिवायतों में यह भी बयान हुआ है कि पैगंबर ﷺ की विलादत के आसपास फारस के बादशाह किसरा के महल में जोरदार हलचल हुई और उसकी इमारत का एक हिस्सा टूट गया।
रिवायतों में महल के कई बुर्जों या हिस्सों के गिरने का भी जिक्र मिलता है।
इस घटना को उस समय की बड़ी-बड़ी सल्तनतों और जुल्म पर आधारित ताकतों के दौर में बदलाव की निशानी के तौर पर देखा गया।
नबी ﷺ की आमद: इंसानियत के लिए नई सुबह
पैगंबर हज़रत मुहम्मद ﷺ की विलादत सिर्फ अरब की एक घटना नहीं थी। आपकी आमद ने पूरी दुनिया के इतिहास का रुख बदल दिया।
जिस समाज में इंसानियत कमजोर हो रही थी, जहां ताकतवर कमजोरों पर जुल्म करते थे, बेटियों को जिंदा दफन किया जाता था और इंसान इंसान का दुश्मन बन गया था, ऐसे दौर में पैगंबर ﷺ ने मोहब्बत, इंसाफ, रहमत और इंसानी बराबरी का पैगाम दिया।
आप ﷺ ने लोगों को बताया कि इंसान की असली पहचान उसकी दौलत, रंग, नस्ल या खानदान नहीं, बल्कि उसका अखलाक और परहेजगारी है।
इसीलिए आपकी विलादत को पूरी इंसानियत के लिए रहमत की आमद कहा जाता है।
पैगाम साफ है,
पैगंबर ﷺ की सीरत को सिर्फ पढ़ना ही नहीं, बल्कि उनकी मोहब्बत, रहमत, इंसाफ और इंसानियत के पैगाम को अपनी जिंदगी में अपनाना ही सबसे बड़ी मोहब्बत है।
सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम।
-डॉ ताहिरुल क़ादरी की किताब से

