इनोवेशन –ऊर्जा बचाने वाले भवनों की ओर कदम

Date:

इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण

यूपी नेडा और इंटीग्रल यूनिवर्सिटी की पहल, पर्यावरण-अनुकूल और कम ऊर्जा खर्च करने वाले भवनों पर हुई खास चर्चा

लखनऊ। आने वाले समय में मकान और बड़ी इमारतें सिर्फ खूबसूरत ही नहीं, बल्कि ऐसी भी होंगी जो बिजली कम खर्च करें, पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाएं और रहने वालों के लिए ज्यादा आरामदायक हों। इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण यूपी नेडा के सहयोग से इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के वास्तुकला, नियोजन एवं डिजाइन संकाय द्वारा “ऊर्जा संरक्षण एवं सतत भवन संहिता 2024” विषय पर यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 1 और 2 सितंबर 2026 को आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं कुलाधिपति प्रो. सैयद वसीम अख्तर तथा अतिरिक्त प्रो-चांसलर सैयद अदनान अख्तर के संरक्षण में किया गया।

सिर्फ इमारत नहीं, पर्यावरण की भी चिंता

आज शहर तेजी से फैल रहे हैं और बड़ी-बड़ी इमारतों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में बिजली की खपत, एयर कंडीशनिंग, रोशनी और दूसरे संसाधनों का इस्तेमाल भी बढ़ता जा रहा है। इस प्रशिक्षण का मकसद यही था कि भविष्य की इमारतें इस तरह डिजाइन की जाएं कि उनमें ऊर्जा की बचत हो और पर्यावरण पर कम बोझ पड़े।

कार्यक्रम में विशेषज्ञों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। यहां यह समझाया गया कि भवन बनाते समय शुरुआत से ही ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण को डिजाइन का हिस्सा बनाया जा सकता है।

इन विषयों पर हुई खास ट्रेनिंग

दो दिनों के प्रशिक्षण में भवन की बाहरी बनावट और साइट प्लानिंग, ऊर्जा प्रणालियां, इमारत के अंदर का वातावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

मास्टर ट्रेनर नवनीत शर्मा, कंसल्टेंट आर्किटेक्ट तुषार श्रीवास्तव और कंसल्टेंट इंजीनियर विवेक कुमार वर्मा ने प्रतिभागियों को तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी दी।

विशेषज्ञों ने बताया कि सही डिजाइन, प्राकृतिक रोशनी और हवा का बेहतर इस्तेमाल, ऊर्जा-कुशल तकनीक और संसाधनों की बचत से इमारतों को ज्यादा बेहतर और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकता है।

सतत शहरों की दिशा में पहल

यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों से भी जुड़ा रहा। विशेष रूप से सतत शहर एवं समुदाय और जिम्मेदार उपभोग एवं उत्पादन जैसे लक्ष्यों पर ध्यान दिया गया।

आसान शब्दों में कहें तो मकसद ऐसा शहर और ऐसी इमारतें बनाना है, जो आज की जरूरतें पूरी करें लेकिन आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्राकृतिक संसाधन सुरक्षित रखें।

विशेषज्ञों और शिक्षकों की टीम ने संभाली जिम्मेदारी

कार्यक्रम का आयोजन प्रो. ज़ेबा निसार, डीन, वास्तुकला, नियोजन एवं डिजाइन संकाय द्वारा किया गया। कार्यक्रम को प्रो. डॉ. सफीउल्लाह खान का सहयोग प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम के समन्वय में आर्किटेक्ट खुर्रम अशरफ, आर्किटेक्ट श्वेता वर्मा, आर्किटेक्ट तारिकुल इस्लाम, आर्किटेक्ट उमैर अली और डॉ. उमा प्रसाद पाण्डेय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भविष्य की इमारतों के लिए जरूरी सोच

यह प्रशिक्षण केवल विद्यार्थियों और वास्तु विशेषज्ञों तक सीमित कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह उस भविष्य की तैयारी है जहां हर नई इमारत से यह सवाल पूछा जाएगा, क्या यह इमारत सिर्फ सुंदर है या पर्यावरण के लिए भी जिम्मेदार है?

इंटीग्रल यूनिवर्सिटी और यूपी नेडा की यह संयुक्त पहल बताती है कि अब भवन निर्माण की दुनिया में बदलाव की जरूरत को गंभीरता से समझा जा रहा है। कम बिजली खर्च करने वाले, प्राकृतिक संसाधनों को बचाने वाले और इंसानों के लिए बेहतर वातावरण देने वाले भवन ही भविष्य की असली जरूरत बनेंगे।

-क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_img

पॉपुलर

और देखे
और देखे

पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की विलादत, रहमत, खुशी और बरकत की निशानियां

इस्लामी तारीख में पैगंबर हज़रत मुहम्मद ﷺ की विलादत...

जब पूरा देश सो रहा था, भारत अंतरिक्ष में इतिहास लिख रहा था!

4 सितंबर की अलसुबह करीब 2:55 बजे, जब देश के...

हज फंड और ठेकों में गड़बड़ी के आरोप

हाल के दिनों में हज यात्रा के इंतजाम को...