उर्स-ए-गौस-ए-आज़म बड़ी अकीदत व एहतराम के साथ मनाया गया

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 (फजलुर्रहमान)

बांगरमऊ, उन्नाव। नगर की प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक सूफी दरगाह खानकाह-ए-आलिया कादरिया यासीनिया में बुधवार को उर्स-ए-गौस-ए-आजम बड़ी अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। उर्स के अवसर पर दरगाह में दिनभर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में मुरीदों, अकीदतमंदों और जायरीनों ने शिरकत की।

पीरजादा सैयद गयासुद्दीन उर्फ गौसी मियां साहब की सरपरस्ती एवं जेरे निगरानी में सुबह करीब 9 बजे मजार-ए-पाक हजरत गुलजार शाह रहमतुल्लाह अलैह का गुस्ल कराया गया। इसके बाद दरगाह में मौजूद निशाने कादरिया की परचम कुशाई की रस्म अदा की गई। धार्मिक रस्मों के दौरान अकीदतमंदों ने पूरी श्रद्धा एवं सम्मान के साथ अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। इसके पश्चात महफिल-ए-समा और कुल शरीफ का आयोजन हुआ। महफिल में सूफियाना कलाम और आध्यात्मिक प्रस्तुतियों के माध्यम से माहौल को रूहानी बनाया गया। अकीदतमंदों ने बड़ी श्रद्धा के साथ महफिल में हिस्सा लिया और बुजुर्गों की शिक्षाओं को याद किया। बाद नमाज-ए-जोहर लंगर-ए-कादरिया का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने लंगर ग्रहण किया। आयोजन के दौरान आने वाले जायरीनों और अकीदतमंदों की सेवा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं। वहीं, बाद नमाज-ए-इशा महफिल-ए-समा एवं कुल शरीफ का पुनः आयोजन किया गया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर विशेष दुआ कराई गई। दुआ में देश और प्रदेश में अमन-चैन, खुशहाली, तरक्की, आपसी भाईचारे और सद्भाव के लिए विशेष रूप से प्रार्थना की गई। लोगों ने मुल्क में शांति और समाज में आपसी प्रेम एवं सौहार्द कायम रहने की दुआ की। उर्स के दौरान खानकाह परिसर में अकीदतमंदों की काफी भीड़ रही। दूर-दराज से पहुंचे जायरीनों ने दरगाह पर हाजिरी देकर फातिहा पढ़ी और अपनी मुरादों के लिए दुआ की। पूरे कार्यक्रम में धार्मिक एवं रूहानी माहौल बना रहा। इस अवसर पर पीरजादा सैयद गयासुद्दीन उर्फ गौसी मियां साहब, मौलाना मुबीन, मौलाना जीशान, मौलाना जियाउल हक, मौलाना गुलाम नबी, हाफिज दिलशाद, हाफिज सज्जाद बरकाती, हाफिज युसूफ मलिक, हाफिज सरताज, हाफिज फरहान, हाफिज जावेद अली, समाजसेवी फजलुर्रहमान सहित बड़ी संख्या में मुरीद, अकीदतमंद एवं जायरीन मौजूद रहे। उर्स के सफल आयोजन में खानकाह से जुड़े लोगों एवं सेवादारों ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने बुजुर्गों की तालीम और उनके बताए रास्ते पर चलने तथा समाज में प्रेम, भाईचारा और इंसानियत को बढ़ावा देने का संकल्प भी व्यक्त किया।

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