बांगरमऊ में रामलीला समिति ने समाजसेवियों और पत्रकारों को भी किया सम्मानित, सामाजिक योगदान की हुई सराहना
बांगरमऊ, उन्नाव। बांगरमऊ की ऐतिहासिक रामलीला सिर्फ़ धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह आपसी भाईचारे और सामाजिक सद्भाव को मज़बूत करने का भी एक अहम मंच है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए रामलीला समिति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के वरिष्ठ अधिवक्ता और यश भारती सम्मान से सम्मानित फारूक अहमद का भव्य स्वागत कर उन्हें सम्मानित किया।

इस मौके पर समिति के पदाधिकारियों ने फारूक अहमद के सामाजिक कार्यों और जनहित से जुड़े मामलों में उनकी सक्रिय भूमिका की सराहना की। समारोह में नगर और आसपास के इलाक़ों के गणमान्य नागरिकों, पत्रकारों और रामलीला समिति के सदस्यों ने हिस्सा लिया।
जनसमस्याओं को अदालत तक पहुंचाने की कोशिश
फारूक अहमद की पहचान एक वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ-साथ समाजसेवी के रूप में भी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने जनहित से जुड़े कई मुद्दों को अदालत के सामने उठाया है। जनहित याचिकाओं के ज़रिए क्षेत्र की समस्याओं और विकास से जुड़े मामलों पर आवाज़ उठाने के उनके प्रयासों ने उन्हें स्थानीय स्तर पर एक अलग पहचान दिलाई है। इसी वजह से क्षेत्र में उन्हें ‘विकास पुरुष’ भी कहा जाता है।
जनहित के मुद्दों को सामने लाना और आम लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए क़ानूनी रास्ता अपनाना किसी भी लोकतांत्रिक समाज में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे प्रयासों से लोगों को अपने अधिकारों और न्याय पाने के रास्तों के बारे में जागरूक होने का मौक़ा मिलता है।
रामलीला समिति की पहल की सराहना
सम्मान समारोह में रामलीला समिति के अध्यक्ष चौधरी आशीष सिंह ‘गोलू’ और पूर्व मंत्री चौधरी अशोक कुमार सिंह ‘बेबी’ के सुपुत्र चौधरी भुवनेश कुमार समेत समिति के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। समिति की ओर से कहा गया कि समाज और जनहित के लिए काम करने वाले लोगों को सम्मान देना एक अच्छी परंपरा है। इससे दूसरों को भी सामाजिक ज़िम्मेदारी निभाने की प्रेरणा मिलती है।
रामलीला जैसे सांस्कृतिक आयोजन लोगों को एक साथ आने का अवसर देते हैं। जब ऐसे मंचों पर अलग-अलग सामाजिक क्षेत्रों में योगदान देने वाले लोगों का सम्मान होता है, तो आयोजन का दायरा धार्मिक परंपरा से आगे बढ़कर सामाजिक मेल-मिलाप तक पहुंच जाता है।
समाजसेवियों और पत्रकारों का भी सम्मान
इस अवसर पर नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष और समाजसेवी इज़हार ख़ां ‘गुड्डू’, समाजसेवी एवं पत्रकार फ़ज़लुर्रहमान, रामसेवक यादव, जमीर ख़ान और अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार शुक्ला को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने समिति की इस पहल की सराहना की। उनका मानना था कि सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ पत्रकारों का सम्मान भी ज़रूरी है, क्योंकि पत्रकारिता समाज के मुद्दों को सामने लाने और लोगों की आवाज़ संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती है।
आपसी सम्मान से मज़बूत होता है समाज
समारोह में सैयद सगीरुल हसन उर्फ़ मुन्ना भाई, नंदराम मौर्य, अहमद अली, रामशंकर, सुधीर कुमार मिश्रा ‘सिद्धू’, कृष्णकांत श्रीवास्तव ‘खजांची’ समेत कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
बांगरमऊ की रामलीला के दौरान आयोजित यह सम्मान समारोह इस बात को रेखांकित करता है कि सामाजिक जीवन में आपसी सम्मान, सहयोग और भाईचारे की अपनी अहमियत है। समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को एक मंच पर सम्मान देना ऐसी साझा परंपराओं को मज़बूत कर सकता है, जो लोगों को जोड़ती हैं और सामाजिक सद्भाव का रास्ता खोलती हैं।
-क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

