(रईस खान)
उन्नाव जिले के जाजमऊ गंगापार स्थित अखलाक नगर में 10 फरवरी 2026 को तालीम के मैदान में एक अहम और उम्मीद जगाने वाली बैठक का आयोजन हुआ। यह बैठक डॉ. नसीम अहमद के आवास पर शुरू हुई, जिसमें शिक्षा के क्षेत्र में नई पहल और सामाजिक सुधार पर गंभीर चर्चा की गई। इस खास मौके पर शाहीन एजुकेशन ग्रुप कर्नाटका के चेयरमैन डॉ. अब्दुल कदीर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
बैठक में शाहिद कामरान, डॉ. मुबारक अली, मुशीर आलम खां और मसरूर अहमद जैसे इलाके के जिम्मेदार और शिक्षाप्रेमी लोग शामिल हुए। चर्चा का मरकज़ कानपुर और आसपास के जिलों के उन बच्चों और युवाओं को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना रहा, जो किसी वजह से पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं या मदरसों से हिफ्ज़ पूरा कर चुके हैं।
डॉ. अब्दुल कदीर ने बताया कि ऐसे छात्रों को हाई स्कूल तक पढ़ाना और आगे की पढ़ाई के लिए एक साफ और आसान रोडमैप तैयार करना शाहीन ग्रुप का मकसद है। उन्होंने कहा कि अगर सही मार्गदर्शन मिले तो यही बच्चे आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर, अफसर और समाज के जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं।
शाहीन एजुकेशन ग्रुप देश का एक जाना माना शिक्षण संस्थान है, जिसकी नींव डॉ. अब्दुल कदीर ने करीब 35 साल पहले रखी थी। उन्होंने अल्पसंख्यक और कमजोर तबकों को तालीम के ज़रिये मजबूत करने का बीड़ा उठाया। आज यह ग्रुप किंडरगार्टन से लेकर ग्रेजुएशन तक की आधुनिक शिक्षा देता है, जिसमें लेटेस्ट लैब, प्रोफेशनल कोर्स और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शामिल है। डॉ. कदीर को सर सैयद अहमद खान उत्कृष्टता पुरस्कार से भी नवाज़ा जा चुका है।
बैठक के बाद डॉ. अब्दुल कदीर ने अखलाक नगर में एकिन किड स्कूल की शुरुआत की और इलाके में फैली सामाजिक बुराइयों पर खुलकर बात की। उन्होंने सुझाव दिया कि हर मस्जिद में जागरूकता के लिए ज़िक्र शुरू किया जाए और कमेटियां बनाकर काम किया जाए। तंबाकू और हर तरह के नशे पर सख्त पाबंदी, दहेज जैसी बुराई को खत्म करना, शादियों को सादगी से मस्जिद में करना, बिना दावत के निकाह को बढ़ावा देना और मस्जिदों व मोहल्लों की सफाई पर खास ध्यान देने की बात कही।
डॉ. कदीर ने कहा कि शाहीन ग्रुप की सोच सिर्फ तालीम तक सीमित नहीं है, बल्कि तालीम के साथ सामाजिक सुधार को भी जरूरी मानती है। इसी सोच के तहत ग्रुप देशभर में तालीमी बेदारी कारवां जैसे अभियान चला रहा है, जिससे ड्रॉपआउट बच्चों को फिर से स्कूल से जोड़ा जा सके, मदरसों में आधुनिक विषय शामिल हों और जरूरतमंद छात्रों को स्कॉलरशिप मिल सके।
यह बैठक शाहीन एजुकेशन ग्रुप के उत्तर भारत में विस्तार की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है। जानकारों का कहना है कि अगर इस तरह की पहल को सरकारी योजनाओं और स्थानीय सहयोग से आगे बढ़ाया जाए, तो ड्रॉपआउट दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अखलाक नगर की यह कोशिश दूसरे जिलों के लिए भी एक मिसाल बन सकती है, जहां तालीम, स्वच्छता और सामाजिक सुधार साथ साथ आएंगे।

