यूनानी दिवस :केमिकल दवाओं के जहर से बचाव, यूनानी इलाज की ताकत और खेती से कारोबार की नई राहें

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(रईस खान)

आज पूरा मुल्क यूनानी दिवस मना रहा है। ये दिन हकीम अजमल खान की याद में मनाया जाता है, जो यूनानी तिब्ब के बड़े आलिम और आजादी के मतवाले थे। 11 फरवरी उनकी पैदाइश का दिन है, और 2016 से भारत सरकार ने इसे यूनानी दिवस घोषित किया है। इस साल का थीम है “यूनानी तिब्ब में नए इनोवेशन और इंटीग्रेटिव हेल्थ सॉल्यूशंस”, जो बताता है कि पुरानी इलाज की राहें आज की सेहत मुश्किलों से निपटने में कितनी कारगर हैं। लेकिन आज कल के केमिकल वाले खानों और दवाओं के नकली होने से सेहत को कितना बड़ा खतरा है? यूनानी दवाएं कैसे मदद करती हैं? और यूनानी हर्ब्स की खेती से लेकर बिज़नेस तक की क्या पॉसिबिलिटी हैं? आइए गहराई से जानें।

केमिकल खानों और दवाओं के नकली होने का जहर, सेहत का दुश्मन नंबर वन

आज कल बाजार में केमिकल से भरे खाने और दवाएं हर जगह मिलती हैं, लेकिन इनमें से कई नकली या मिलावटी होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, नकली दवाओं से हर साल लाखों लोग बीमार पड़ते हैं या मर जाते हैं। ये दवाएं गलत मटेरियल से बनती हैं, कभी कम ऐक्टिव इंग्रीडिएंट्स, कभी जहर जैसे फेंटनिल, मरकरी, आर्सेनिक या रोड पेंट तक मिलाया जाता है। नतीजा? इलाज फेल हो जाता है, बीमारी बढ़ जाती है, या पॉइजनिंग से मौत हो जाती है।

खाने की बात करें तो मिलावटी फूड सप्लिमेंट्स में सिबुट्रामाइन जैसी खतरनाक चीजें मिलती हैं, जो वजन कम करने का वादा करती हैं लेकिन दिल की बीमारी या मौत का सबब बनती हैं। नकली दवाओं से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस बढ़ता है, जो आने वाली नस्लों के लिए बड़ा खतरा है। अमेरिका में तो नकली दवाओं से सालाना 320 बिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान होता है, और भारत जैसे मुल्कों में ये सेहत सिस्टम पर बोझ डालती हैं। हकीमों का कहना है कि केमिकल दवाओं के साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए नेचुरल इलाज बेहतर है, जैसे यूनानी तिब्ब।

यूनानी दवाओं का एप्लीकेशन 

पुरानी बीमारियों का नेचुरल इलाज

यूनानी तिब्ब ग्रीक और आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर बेस्ड है, जो बॉडी के चार ह्यूमर्स,बलगम, दम, सफरा, सौदा वगैरह को बैलेंस करके सेहत बनाए रखता है। ये सिस्टम क्रॉनिक डिजीज के लिए मशहूर है, आर्थराइटिस, अस्थमा, हार्ट प्रॉब्लम्स, यूरिनरी इंफेक्शन, स्किन डिजीज, सेक्शुअल डिसॉर्डर्स, और यहां तक कि हेपेटाइटिस बी, मलेरिया जैसी बीमारियां।

इलाज के तरीके बड़े सिम्पल और नेचुरल 

हर्बल मिक्सचर, मेडिटेशन, कपिंग (हिजामा), ब्लडलेटिंग (फसद), मसाज (दलक), और हमाम (स्टीम बाथ)। मिसाल के तौर पर, जोड़ों के दर्द (वजा-अल-मफासिल) के लिए हब्ब-ए-सुरंजान जैसी दवा इस्तेमाल होती है, जो गाउट और न्यूराल्जिया में राहत देती है। ओरल डिजीज में हल्दी, लौंग, और दालचीनी जैसे हर्ब्स एंटी-इंफ्लेमेटरी और एनाल्जेसिक असर दिखाते हैं। यूनानी में रोकथाम पर जोर है, हवा, पानी, खाना जैसे सितता जरूरिया को बैलेंस करके इम्यूनिटी बढ़ाई जाती है। आज कल ये इंटीग्रेटिव हेल्थ में यूज हो रहा है, जहां मॉडर्न मेडिसिन के साथ मिलाकर क्रॉनिक पेन, डायजेस्टिव प्रॉब्लम्स, और इम्यून डिसॉर्डर्स का इलाज होता है। भारत में यूनानी कॉलेज और रिसर्च सेंटर्स जैसे CCRUM इसे प्रमोट कर रहे हैं।

खेती से बिज़नेस, यूनानी हर्ब्स की नई गोल्ड माइन

यूनानी दवाओं के लिए हर्ब्स की डिमांड बढ़ रही है, और भारत में ये बड़ा बिज़नेस ऑपर्चुनिटी है। ग्लोबल यूनानी मेडिसिन मार्केट 2021 में 1.5 बिलियन डॉलर था, जो 2028 तक 3.1 बिलियन पहुंचेगा 10% ग्रोथ रेट से। आयुर्वेद और यूनानी हर्ब्स का मार्केट 2020 में 9.5 बिलियन डॉलर था, जो 2028 तक 21.6 बिलियन हो जाएगा।

खेती से शुरू करें दालचीनी, लौंग, हल्दी, अश्वगंधा, कुटकी, शंखपुष्पी, डैंडेलियन जैसी हर्ब्स उगाएं। एक एकड़ डैंडेलियन से 3 लाख रुपये कमाई हो सकती है, जबकि लैवेंडर से 2 लाख। भारत में नौ हजार से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं, ज्यादातर आयुर्वेद-यूनानी। सरकार AYUSH स्कीम्स से फंडिंग देती है, रिसर्च, क्वालिटी सर्टिफिकेशन, एक्सपोर्ट इंसेंटिव्स।

बिज़नेस मॉडल,हर्बल फार्मिंग से प्रोडक्शन तक

स्टार्टअप्स जैसे हर्बल हिल्स थर्ड-पार्टी मैन्युफैक्चरिंग ऑफर करते हैं, लो कॉस्ट रॉ मटेरियल्स से हाई प्रॉफिट। एक्सपोर्ट में मौका,एशिया-पैसिफिक सबसे तेज ग्रोइंग मार्केट है। भारत में हमदर्द लैबोरेटरीज जैसी कंपनियां अपनी फार्मलैंड्स में हर्ब्स उगाती हैं। छोटे स्केल पर पोल्ट्री या फोन एक्सेसरीज से कम, लेकिन हर्बल प्रोडक्ट्स में रेगुलर इनकम है। नकली दवाओं से तंग आकर लोग नेचुरल की तरफ मुड़ रहे हैं, तो ये बिज़नेस फ्यूचर का है।

यूनानी तिब्ब सेहत और तरक्की की चाबी

यूनानी दिवस हमें याद दिलाता है कि पुरानी हिकमत आज की केमिकल दुनिया में भी कारगर है। नकली केमिकल्स के नुकसान से बचकर, यूनानी इलाज अपनाएं और हर्ब्स की खेती से बिज़नेस बनाएं। सरकार और हकीम मिलकर इसे आगे बढ़ा रहे हैं। सेहत की सच्ची राह यही है।

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