(फजलुर्रहमान)
बांगरमऊ, उन्नाव.प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट के बीच अब चुनाव टलने की चर्चाओं ने स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्नाव जिले के बांगरमऊ, गंजमुरादाबाद और फतेहपुर 84 ब्लॉक में चुनावी तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा रही हैं। पिछले कई महीनों से क्षेत्र में सक्रिय दावेदार, जिन्होंने प्रचार-प्रसार और जनसंपर्क में पानी की तरह पैसा बहाया है, अब अनिश्चितता के भंवर में फंसते नजर आ रहे हैं।
बांगरमऊ क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों चुनावी सरगर्मी शबाब पर थी। प्रधान, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य पद के प्रत्याशी अपनी जमीन मजबूत करने के लिए दावतों और मेल-मुलाकातों का दौर चला रहे थे। लेकिन हाल ही में शासन स्तर और न्यायालयी प्रक्रियाओं के हवाले से चुनाव आगे बढ़ने की खबरों ने दावेदारों के उत्साह पर ब्रेक लगा दिया है। कई प्रत्याशी पोस्टर, होर्डिंग्स और जनसंपर्क अभियानों में लाखों रुपये खर्च कर चुके हैं। चुनाव टलने का मतलब है कि उन्हें फिर से नए सिरे से खर्च करना पड़ेगा। दावेदारों को डर है कि चुनाव लंबा खिंचने से समर्थकों को एकजुट रखना मुश्किल होगा और विपक्षी खेमे को सेंधमारी का मौका मिल जाएगा। चुनावी तारीखों में बदलाव के साथ-साथ आरक्षण की नई सूची को लेकर भी संशय बना हुआ है, जिससे कई सीटों के समीकरण बिगड़ने की आशंका है। हालांकि, जिला प्रशासन की ओर से अभी तक चुनाव टलने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसके बावजूद, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कार्यकाल की तकनीकी गणना और कुछ प्रशासनिक अड़चनों के कारण चुनाव अपनी तय समय सीमा से कुछ महीने आगे खिसक सकते हैं।फिलहाल, बांगरमऊ की राजनीति ‘वेट एंड वॉच’ (इंतजार करो और देखो) की स्थिति में है। अब सबकी नजरें शासन के अगले आदेश पर टिकी हैं कि क्या लोकतंत्र का यह सबसे निचला और महत्वपूर्ण चुनाव समय पर होगा या फिर दावेदारों का इंतजार और लंबा होगा।

