हादसा –सपनों की लाइब्रेरी जलकर राख, युवा जिंदगियां बुझ गईं

Date:

(रईस खान)

22 जून 2026 को लखनऊ का अलीगंज इलाका, उषा मेहता मार्ग, सेक्टर-डी। दोपहर करीब 3 बजे एक तीन मंजिला इमारत में भीषण आग लग गई। नीचे पेट शॉप और क्लिनिक थे, ऊपर दूसरी मंजिल पर ‘लर्निंग स्पेस’ नाम की लाइब्रेरी-कोचिंग चल रही थी, जहां एनिमेशन, थ्रीडी आर्ट और गेमिंग से जुड़े कोर्स पढ़ाए जाते थे। आग तेजी से फैली। धुआं, चीखें और अफरा-तफरी का मंजर बन गया।

13-15 युवा जिंदगियां चली गईं

ज्यादातर स्टूडेंट्स, उम्र 15 से 21 साल के बीच। कुछ घायल हुए, जिनमें एक युवक ने बचने के लिए छलांग लगाई और लोहे की ग्रिल पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। लाशें निकालने का काम चल रहा था, फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें घंटों जूझती रहीं। दीवार तोड़कर कुछ लोगों को बचाया गया। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक मौके पर पहुंचे । उन्होंने 14 मौतों की पुष्टि की।

आग कैसे लगी?

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक शॉर्ट सर्किट से आग लगी। इमारत में फायर एग्जिट, सेफ्टी उपकरण या पर्याप्त निकास द्वार नहीं थे। कोचिंग-लाइब्रेरी जैसे जगहों पर इतने स्टूडेंट्स भरे होने के बावजूद बुनियादी सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा गया था। कई स्टूडेंट्स धुएं से बचने के लिए बाथरूम में बंद हो गए थे।

यह कोई पहली बार नहीं। देश में कोचिंग सेंटर्स में ऐसी घटनाएं बार-बार होती रहती हैं, चाहे दिल्ली का बेसमेंट फ्लडिंग वाला हादसा हो या सूरत का पुराना अग्निकांड। युवा सपने देखते हैं, माता-पिता महंगे कोर्स में भर्ती कराते हैं, लेकिन सुरक्षा की अनदेखी आम बात बन गई है।

सरकारी प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताया। पीएमओ ने एक्स पर पोस्ट किया और मुआवजे का ऐलान किया। उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं, सेफ्टी लापरवाही की जांच होगी।

लेकिन शोक संदेश और मुआवजे से जिंदगियां वापस नहीं आतीं। मरने वाले ज्यादातर स्टूडेंट्स उन परिवारों के थे जो बेहतर भविष्य की उम्मीद में शहर आए थे।

बड़े सवाल

– क्यों इतनी आसानी से अनधिकृत या असुरक्षित कोचिंग चल रही थी?

– फायर सेफ्टी नॉर्म्स की जांच कौन करता है? नियमों का पालन क्यों नहीं होता?

– क्या हम वाकई अपने बच्चों को सुरक्षित पढ़ाई का माहौल दे पा रहे हैं?

लखनऊ को ‘कोचिंग हब’ कहा जाता है। यहां हजारों स्टूडेंट्स सपने संजोते हैं। लेकिन आज एक लाइब्रेरी की राख में कई सपने जल गए। यह सिर्फ एक हादसा नहीं, सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है।

परिवारों के लिए  

जिनके बच्चे चले गए, उनके आंसू शब्दों से परे हैं। घायलों के जल्द स्वस्थ होने की दुआ। समाज और सरकार दोनों को अब सिर्फ जांच नहीं, ठोस बदलाव चाहिए – ताकि कोई और मां-बाप अपना बच्चा ऐसी लाइब्रेरी में खोने को मजबूर न हो।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_img

पॉपुलर

और देखे
और देखे

दो बेटियाँ एमबीबीएस कर रही हैं, मां की राहुल गांधी से मदद की गुहार

पुणे: एक तलाकशुदा महिला अपनी दो बेटियों की एमबीबीएस...

इस्लाम और मुसलमानों की बेहतर तस्वीर पेश करने पर ज़ोर–मुंबई में जमाअत-ए-इस्लामी की मीडिया बैठक

(शिब्ली रामपुरी) मुंबई में जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के नेशनल मीडिया सेक्रेटरी...

रिज़वी कॉलेज में सीरतुन्नबी ﷺ कार्यक्रम, इंसानियत और इंसाफ़ का पैग़ाम

(रईस खान) मुंबई: रिज़वी एजुकेशन सोसाइटी के रिज़वी कॉलेज ऑफ...