लखनऊ:आज के दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता हर जगह अपनी छाप छोड़ रही है। पढ़ाई-लिखाई से लेकर रिसर्च तक, AI अब बड़ा गेम चेंजर बन चुका है। इसी को मद्देनजर रखते हुए इंटीग्रल यूनिवर्सिटी, लखनऊ ने “AI@इंटेग्राल पहल के तहत एक खास फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित किया।
6 जुलाई से 10 जुलाई 2026 तक चला ये 5 दिन का कार्यक्रम “अनुसंधान, शिक्षण-अधिगम और शैक्षणिक नवाचार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता” पर फोकस था। यूनिवर्सिटी के ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट सेंटर ने इसे करवाया और कंप्यूटर एप्लीकेशन्स विभाग ने पूरा समन्वयन संभाला।
मकसद क्या था?
शिक्षकों को AI का आसान और असरदार इस्तेमाल सिखाना – चाहे क्लासरूम में पढ़ाना हो, स्टूडेंट्स का मूल्यांकन करना हो, नया कोर्स तैयार करना हो या रिसर्च में नई राहें निकालना हो।
उद्घाटन में जोश
प्रोग्राम का उद्घाटन यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर **डॉ. सैयद नदीम अख्तर** ने किया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में AI एक बड़ी क्रांति ला रहा है। शिक्षकों को नई तकनीक अपनानी चाहिए ताकि छात्रों का भविष्य और मजबूत बने। कुलपति **प्रो. फुरकान कमर** ने भी जोर दिया कि AI से शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार और संस्थागत विकास तेजी से हो सकता है।
पांच दिन की दिलचस्प ट्रेनिंग
कार्यक्रम में सिर्फ थ्योरी नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल वर्कशॉप, डेमो और हैंड्स-ऑन सेशन भी हुए। विशेषज्ञों ने **जनरेटिव AI**, **प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग**, AI से पढ़ाई और टेस्टिंग, कोर्स डिजाइन, रिसर्च प्लानिंग, लिटरेचर रिव्यू, साइंटिफिक राइटिंग, डेटा एनालिसिस, रिसर्च एथिक्स, पेटेंट और यूनिवर्सिटी लेवल पर AI के इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर विस्तार से समझाया।
माहिर वक्ता
**प्रो. पुनीत मिश्रा डॉ. सिद्धार्थ चौरसिया श्री मनीष राजपूत**, **श्री नीरज कुमार प्रो. समीक्षा शुक्ला प्रो. बिबेक कुमार डॉ. दीपक सिंह** और **श्री अभिषेक सक्सेना** जैसे विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए और शिक्षकों के सवालों का जवाब दिया।
समापन का जज्बा
समापन सत्र की अध्यक्षता HRDC निदेशक **प्रो. सैयद अकील अहमद ने की। उपनिदेशक **प्रो. ज़ीशान रज़ा खान** ने सभी का शुक्रिया अदा किया।
शिक्षकों की राय
प्रतिभागी शिक्षकों ने खुशी जताई कि इस FDP से उन्हें AI के कई आसान टूल्स और तरीके सीखने को मिले। अब वे क्लास में, रिसर्च में और स्टूडेंट्स के साथ बेहतर तरीके से काम कर सकेंगे।
ये कार्यक्रम इंटीग्रल यूनिवर्सिटी की नवाचार, बेहतर शिक्षा और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के प्रति मजबूत कमिटमेंट को दिखाता है। **AI@Integral** जैसी पहलें न सिर्फ शिक्षकों को तैयार करती हैं, बल्कि पूरे कैंपस को भविष्य के लिए तैयार करती हैं।
**AI के साथ इंसानियत** – यही असली तरक्की का मंत्र है!
*इंटीग्रल यूनिवर्सिटी की ये कोशिश मुबारकबाद के काबिल है। उम्मीद है कि आगे भी ऐसे कार्यक्रम चलते रहेंगे।*
–क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

