बेमिसाल – इंसानियत की मिसाल:बदायूं में मुंहबोले भाई ने निभाई बहन की शादी की पूरी जिम्मेदारी

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(रईस खान)

बदायूं जिले के उझानी कस्बे में 8 जुलाई की रात एक ऐसी शादी हुई जो सिर्फ दो दिलों का मिलन नहीं थी। ये नफरत के इस दौर में मोहब्बत और भाईचारे की सबसे खूबसूरत कहानी बन गई। माता-पिता के साए से महरूम हिंदू लड़की दीपांशी की शादी हिंदू रीति-रिवाज से हुई, लेकिन कन्यादान किया उसके मुंहबोले मुस्लिम भाई रियासत उर्फ बबलू सिद्दीकी ने। खून का रिश्ता नहीं था, मगर दिल का रिश्ता इतना गहरा था कि पूरा पंडाल भावुक हो गया।

दीपांशी कुछ साल पहले एक हादसे में मां-बाप को खो चुकी थी। उस वक्त मुश्किल घड़ी में उझानी के ही रहने वाले बबलू सिद्दीकी आगे आए। उन्होंने दीपांशी और उसके भाई को अपना लिया। बबलू ने दीपांशी को अपनी बहन मान लिया और वादा किया कि उसकी शादी की सारी जिम्मेदारी वो खुद उठाएंगे। सालों तक इस रिश्ते को निभाते रहे और जब शादी का वक्त आया तो बबलू ने एक सगे भाई की तरह सब कुछ संभाला।

एसएस ग्रीन पैलेस में धूमधाम से हुई शादी

8 जुलाई को एसएस ग्रीन पैलेस में दीपांशी और कमलकांत की शादी हुई। बबलू ने शादी का पूरा खर्च उठाया। हिंदू रस्मों के मुताबिक कन्यादान किया, मंडप में खड़े होकर बहन का हाथ दूल्हे को सौंपा। विदाई के वक्त दीपांशी और बबलू दोनों एक-दूसरे से लिपटकर रो पड़े। वो पल देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। लोग कह रहे थे, “ये तो असली भाई है, मजहब का नामोनिशान नहीं दिखा।”

बबलू सिद्दीकी मुस्लिम समाज से हैं, लेकिन उन्होंने कभी धर्म की दीवार नहीं खड़ी की। दीपांशी को बचपन से बहन की तरह प्यार दिया, उसकी पढ़ाई-लिखाई का ख्याल रखा और अब शादी भी धूमधाम से कर दी। दीपांशी के पति कमलकांत और परिवार भी बबलू की इस इंसानियत को सलाम करते हैं।

ये कहानी बताती है कि रिश्ते हमेशा खून से नहीं, भरोसे और प्यार से बनते हैं। आजकल जब लोग छोटी-छोटी बातों पर बंट जाते हैं, तब बबलू और दीपांशी की कहानी याद दिलाती है कि इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता। भाई-बहन का रिश्ता किसी मजहब का मोहताज नहीं।

सोशल मीडिया पर वायरल

इस शादी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। लोग तारीफों के पुल बांध रहे हैं। कोई कह रहा है “ये असली भारत है”, तो कोई लिख रहा है “नफरत फैलाने वालों को देखना चाहिए”। बबलू जैसे लोग समाज में उम्मीद जगाते हैं कि मोहब्बत अभी भी जिंदा है।

दीपांशी अब नई जिंदगी की शुरुआत कर रही है, लेकिन बबलू का वो वादा हमेशा याद रहेगा, “बहन, तेरा भाई हमेशा तेरे साथ है।”

ये कहानी सिर्फ एक शादी की नहीं, बल्कि उस जज्बे की है जो नफरत की दीवारों को तोड़कर इंसानियत का पैगाम देती है। बदायूं की ये रात लंबे समय तक याद रहेगी।

इंसानियत ज़िंदाबाद!

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