बिना तकवा और परहेजगारी के बुजुर्गी नामुमकिन:-हजरत मारूफुर्रहमान उर्फ मारूफ मियां

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​    (फजलुर्रहमान)

गंजमुरादाबाद, उन्नाव।देश की प्रसिद्ध दरगाह ‘खानकाहे फजले रहमाँ’ गंजमुरादाबाद के सज्जादा नशीन और ख्याति प्राप्त सूफी बुजुर्ग हजरत मारूफुर्रहमान उर्फ मारूफ मियां साहब ने आज जुमा की नमाज के मौके पर दरगाह परिसर में मौजूद अकीदतमंदों को संबोधित करते हुए रूहानियत और जीवन के उच्च आदर्शों पर महत्वपूर्ण प्रकाश डाला।

​अपने संबोधन में हजरत मारूफ मियां साहब ने साफ शब्दों में कहा कि बिना तकवा और परहेजगारी के कोई भी इंसान सूफी या बुजुर्ग नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि रूहानियत का रास्ता पवित्रता से होकर गुजरता है। हजरत ने हराम की कमाई और भोजन के प्रति सचेत करते हुए कहा कि, “जिसने हराम का एक लुकमा (निवाला) भी खाया है, उसे बुजुर्गी मिलना तो दूर, बुजुर्गी की खुशबू तक नसीब नहीं हो सकती।” हजरत मारूफ मियां साहब ने कुरान और हदीस की रोशनी में समझाया कि अल्लाह इंसान के लिबास, शारीरिक बनावट या बाहरी खूबसूरती को नहीं देखता। उन्होंने स्पष्ट किया कि खुदा का ध्यान इंसान के दिल में छिपे ‘तकवा’ (परहेजगारी) पर होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकवा के कई दर्जे हैं और एक मुकम्मल इंसान बनने के लिए इन ऊंचाइयों को छूना आवश्यक है।​दरगाह में मौजूद बड़ी संख्या में जायरीन और स्थानीय लोगों ने हजरत की इन नसीहतों को बड़े गौर से सुना। हजरत के इस संदेश ने एक बार फिर समाज को ईमानदारी, सादगी और नैतिक जीवन जीने की प्रेरणा दी है। ​इस मौके पर दरगाह के अन्य जिम्मेदार लोग और बड़ी संख्या में मुरीदीन उपस्थित रहे।

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