एसआईआर (SIR) में दो महीने की अवधि बढ़ाने, मौजूदा मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा, बीएलओ (BLO) को पूर्ण सुविधाएं तथा पारदर्शी शिकायत निवारण सहित कई महत्वपूर्ण मांगें; चुनाव आयोग ने गंभीरता से विचार और आवश्यक कदम उठाने का भरोसा दिया
मुंबई(निहाल सगीर)फेडरेशन ऑफ महाराष्ट्र मुस्लिम्स (FMM) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने आज महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (Chief Electoral Officer) से मुलाकात कर राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान आम नागरिकों को आने वाली समस्याओं तथा चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और जनहितैषी बनाने के उद्देश्य से एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि फेडरेशन ने एसआईआर की शुरुआत से ही पूरे राज्य में जागरूकता अभियान और सहायता केंद्र स्थापित किए हैं, जहां स्वयंसेवक नागरिकों को मतदाता पंजीकरण (Enumeration) की प्रक्रिया में मार्गदर्शन दे रहे हैं तथा बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) के साथ सहयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। इन्हीं सहायता केंद्रों और विभिन्न जिलों से प्राप्त जनशिकायतों एवं सुझावों के आधार पर यह ज्ञापन तैयार किया गया है।
ज्ञापन में सबसे पहले वर्तमान पंजीकरण अवधि को अपर्याप्त बताते हुए भारी वर्षा, कृषि कार्य, पुनर्निर्माण, बुलडोजर/ध्वस्तीकरण की कार्रवाइयों के कारण लोगों के विस्थापन तथा अन्य व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए पंजीकरण अवधि में कम से कम दो महीने की वृद्धि की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि फिलहाल राज्य में कोई तत्काल चुनाव प्रस्तावित नहीं है, इसलिए समय बढ़ाया जाना उचित होगा।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग की कि बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) पर अतिरिक्त कार्यभार कम करने के लिए उन्हें अस्थायी रूप से गैर-चुनावी सरकारी कार्यों से मुक्त किया जाए, जहां आवश्यकता हो वहां सहायक बीएलओ (Assistant BLOs) नियुक्त किए जाएं, सभी बीएलओ को रिफ्रेशर प्रशिक्षण दिया जाए, उनके संपर्क नंबर, कार्यालय और कार्यक्षेत्र की अद्यतन जानकारी सार्वजनिक की जाए तथा उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि वे नागरिकों की विसंगतियों (Anomalies) और अन्य समस्याओं के समाधान में सक्रिय सहयोग करें।
ज्ञापन में इस बात पर भी जोर दिया गया कि बड़ी संख्या में नागरिक अब तक एसआईआर की प्रक्रिया, अंतिम तिथियों और आवश्यक दस्तावेजों से अनभिज्ञ हैं, विशेषकर वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं, प्रवासी मजदूर, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तथा ग्रामीण आबादी। इसलिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक बहुभाषी जागरूकता अभियान चलाने, सहायता केंद्रों को मजबूत करने तथा मोबाइल सत्यापन इकाइयां स्थापित करने की मांग की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने दस्तावेजों और मैपिंग प्रक्रिया में मौजूद भ्रम की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए मांग की कि विभिन्न प्रकार की विसंगतियों तथा उनके समाधान के लिए आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में विस्तृत सार्वजनिक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। जहां पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं वहां दस्तावेजी आवश्यकताओं को सरल बनाया जाए, EPIC नंबर और नाम में कानूनी बदलाव को उचित महत्व दिया जाए, स्वीकार्य दस्तावेजों की सूची का विस्तार किया जाए तथा डुप्लीकेट पंजीकरण के मामलों में सभी फील्ड अधिकारियों के लिए समान लिखित निर्देश जारी किए जाएं।
फेडरेशन ने यह चिंता भी व्यक्त की कि कई ऐसे नागरिक जिन्होंने वर्ष 2024 के चुनाव में मतदान किया था, वे वर्तमान प्रक्रिया में अपना नाम या EPIC रिकॉर्ड नहीं खोज पा रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि ऐसे मतदाताओं को अनावश्यक रूप से दोबारा नया पंजीकरण कराने के लिए बाध्य न किया जाए तथा यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से हट गया हो तो उचित सत्यापन के बाद सरल और त्वरित प्रक्रिया के माध्यम से उसे पुनः मतदाता सूची में शामिल किया जाए।
ज्ञापन में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत बनाने के लिए नोटिस जारी करने, दस्तावेजी आवश्यकताओं और नाम हटाने के नियमों से संबंधित विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) प्रकाशित करने, प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करने, डेटा एंट्री एवं सत्यापन प्रक्रिया की निगरानी के लिए मजबूत ऑडिट और पर्यवेक्षण व्यवस्था लागू करने तथा पूरे एसआईआर अभियान की स्वतंत्र निगरानी सुनिश्चित करने की भी मांग की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने इस बात पर जोर दिया कि एसआईआर का मूल उद्देश्य प्रत्येक पात्र मतदाता को चुनावी प्रक्रिया में शामिल करना होना चाहिए, न कि प्रशासनिक, तकनीकी अथवा प्रक्रियागत कमियों के कारण किसी नागरिक को उसके संवैधानिक मतदान अधिकार से वंचित करना। इसलिए सभी चुनाव अधिकारियों को नागरिक हितैषी दृष्टिकोण अपनाने के निर्देश दिए जाने चाहिए।
इस अवसर पर भिवंडी के विधायक रईस शेख के साथ मौलाना हाफिज इकबाल चूनावाला (सदस्य, शूरा, दारुल उलूम देवबंद वक्फ), मौलाना ज़हीर अब्बास रिज़वी (उपाध्यक्ष, शिया पर्सनल लॉ बोर्ड), फरीद शेख (अध्यक्ष, अमन कमेटी मुंबई), शाकिर शेख तथा अब्दुल मजीब शेख भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने ज्ञापन में प्रस्तुत सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुना, सुझावों को रचनात्मक बताया तथा आश्वासन दिया कि जनहित और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए सभी मांगों पर उचित विचार कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

