गुजरात में एंटी रेडिकलाइजेशन सेल पर सवाल

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            मौलाना उबैदुल्ला खान आज़मी ने कहा, मुस्लिम समाज की प्रोफाइलिंग मंजूर नहीं

मुंबई, 10 अगस्त 2026: इंडियन मुस्लिम पब्लिक अफेयर्स कमेटी यानी इम्पैक,आईएमपीएसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना उबैदुल्ला खान आज़मी ने गुजरात सरकार की ओर से एंटी रेडिकलाइजेशन सेल को सक्रिय किए जाने पर कड़ी चिंता जताई है।

मुंबई स्थित इम्पैक की ओर से जारी बयान में मौलाना आज़मी ने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था के जरिए मुसलमानों की धार्मिक पहचान और रोजमर्रा की गतिविधियों को शक की नजर से देखने का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे संस्थागत तौर पर मुस्लिम समाज की प्रोफाइलिंग बताया।

सोशल मीडिया की निगरानी पर सवाल

इम्पैक के मुताबिक गुजरात स्टेट इंटेलिजेंस ब्यूरो की एक गोपनीय एसओपी यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत जिलों की पुलिस को सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप और आम नागरिकों की गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

मौलाना आज़मी ने खास तौर पर इस बात पर सवाल उठाया कि अगर किसी व्यक्ति की रोजमर्रा की धार्मिक गतिविधि, अरबी शब्दों का इस्तेमाल, मुस्लिम देशों के हालात पर राय रखना या वीपीएन जैसी तकनीक का इस्तेमाल भी शक की वजह बन सकता है, तो इसका दायरा बहुत व्यापक हो जाएगा।

उनका कहना है कि ऐसी व्यवस्था में आम नागरिक और किसी वास्तविक सुरक्षा खतरे के बीच साफ फर्क होना जरूरी है।

संविधान का हवाला

मौलाना आज़मी ने संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 25 का हवाला देते हुए कहा कि देश के हर नागरिक को बराबरी, अपनी बात कहने, निजी जिंदगी की हिफाजत और अपने धर्म को मानने की आजादी हासिल है।

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी व्यवस्था में रेडिकलाइजेशन या रेडिकल संगठन की साफ कानूनी परिभाषा नहीं है, तो पुलिस और दूसरी एजेंसियों के पास इसकी व्याख्या का बहुत बड़ा अधिकार आ सकता है।

इम्पैक का कहना है कि ऐसी स्थिति में गलत इस्तेमाल की आशंका को दूर करना जरूरी है।

सरकार से वापस लेने की मांग

इम्पैक ने गुजरात सरकार से मांग की है कि मुसलमानों को निशाना बनाने वाली बताई जा रही इस एसओपी को वापस लिया जाए और ऐसी किसी भी निगरानी व्यवस्था को संविधान और नागरिक अधिकारों के दायरे में रखा जाए।

मौलाना आज़मी ने कहा कि देश की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर किसी एक समुदाय के आम नागरिकों को शक की नजर से देखना सही नहीं है।

उन्होंने कहा कि अगर यह व्यवस्था वापस नहीं ली गई तो इम्पैक नागरिक अधिकारों से जुड़े संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों के साथ मिलकर कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से इसका विरोध करेगी।

सुरक्षा और आजादी के बीच संतुलन जरूरी

इम्पैक के बयान का मुख्य सवाल यही है कि आतंकवाद और कट्टरपंथ से मुकाबला करते हुए आम नागरिकों की धार्मिक आजादी और निजी जिंदगी की हिफाजत भी कायम रहनी चाहिए।

-क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

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