लखनऊ, 12 अगस्त। जापान की मशहूर वासेदा यूनिवर्सिटी और लखनऊ की इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के बीच बढ़ते शैक्षणिक रिश्तों का एक और उदाहरण बुधवार को देखने को मिला। इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में जापान की वासेदा यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट डीन प्रो. तानिया हुसैन ने “उत्तर औपनिवेशिकता से एआई तक: हाशियाकरण की नई सीमाएं” विषय पर विशेष व्याख्यान दिया।
कार्यक्रम ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज विभाग ने जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन विभाग के सहयोग से आयोजित किया। इसमें यूनिवर्सिटी के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
एआई और समाज पर चर्चा
अपने व्याख्यान में प्रो. तानिया हुसैन ने बताया कि तकनीक और खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तेजी से हमारी जिंदगी का हिस्सा बन रहा है। लेकिन इसके साथ कुछ नए सवाल भी पैदा हो रहे हैं।
उन्होंने इस बात पर चर्चा की कि क्या एआई के इस्तेमाल से समाज के कुछ वर्गों को बराबर मौके मिल रहे हैं या कहीं वे और पीछे तो नहीं छूट रहे। उन्होंने सामाजिक बराबरी, लोगों की सही नुमाइंदगी और तकनीक तक पहुंच जैसे मुद्दों को भी सामने रखा।
उन्होंने उत्तर औपनिवेशिक दौर से लेकर आज के एआई के दौर तक हाशियाकरण के बदलते रूप को समझाने की कोशिश की। कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए यह चर्चा खास तौर पर इसलिए अहम रही क्योंकि एआई अब पढ़ाई, नौकरी, मीडिया और रोजमर्रा की जिंदगी में तेजी से जगह बना रहा है।
दुनिया से जुड़ता इंटीग्रल
कार्यक्रम के स्वागत भाषण में प्रो. सैयद अकील अहमद, डायरेक्टर, एचआरडीसी ने कहा कि इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के विकास में संस्थापक और चांसलर प्रो. सैयद वसीम अख्तर की दूरदर्शी सोच की अहम भूमिका रही है।
उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी पढ़ाई के साथ रिसर्च, इनोवेशन और नई तकनीकों पर भी लगातार काम कर रही है। देश और विदेश के जाने माने शिक्षाविदों का यूनिवर्सिटी में आना इसी कोशिश का हिस्सा है।
जापान और भारत के बीच अकादमिक रिश्ता
यह कार्यक्रम सिर्फ एक व्याख्यान तक सीमित नहीं रहा। इससे जापान और भारत के बीच शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में बढ़ते रिश्तों का भी संदेश मिला।
इंटीग्रल यूनिवर्सिटी का कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग को आगे बढ़ाना चाहती है, ताकि विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को दुनिया के अलग अलग हिस्सों में हो रहे नए काम और विचारों से जुड़ने का मौका मिले।
कार्यक्रम की कन्वीनर प्रो. जेबा अकील, हेड ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज थीं, जबकि को कन्वीनर डॉ. राशिद अंसारी, हेड जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन रहे। डॉ. अराफात हसन रिजवी और डॉ. मोहम्मद शाहवेज ने कार्यक्रम के आयोजन में अहम भूमिका निभाई।
आने वाले दौर के सवाल
आज एआई सिर्फ कंप्यूटर और मोबाइल की तकनीक नहीं रह गया है। यह शिक्षा, मीडिया, रोजगार, कारोबार और सामाजिक जिंदगी को भी प्रभावित कर रहा है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि तकनीक का फायदा समाज के हर वर्ग तक कैसे पहुंचे।
इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में हुआ यह कार्यक्रम इसी बड़े सवाल की ओर ध्यान खींचता है कि तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, क्या समाज के सभी लोग उसके साथ बराबरी से आगे बढ़ पा रहे हैं?
यही सवाल आने वाले समय में एआई और समाज के रिश्ते को समझने में सबसे अहम साबित हो सकता है।
–क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

