-(शिब्ली रामपुरी)
मुंबई। ईद मिलादुन्नबी ﷺ के मौके पर निकलने वाले जुलूसों को अनुशासन, शांति, भाईचारे और इंसानियत की सेवा का ज़रिया बनाने की अपील की गई है।
हज़रत मुईन मियां ने कहा कि पैग़ंबर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद ﷺ की ज़िंदगी पूरी इंसानियत के लिए मोहब्बत, रहमत, भाईचारे और खिदमत का पैग़ाम है। उन्होंने ज़ोर दिया कि मिलादुन्नबी के जुलूस सिर्फ़ धार्मिक आयोजन तक सीमित न रहें, बल्कि समाज में अमन, भाईचारा और ज़रूरतमंदों की मदद का संदेश भी पहुंचाएं।
ख़िलाफ़त हाउस में हुई एक अहम बैठक में ईद मिलादुन्नबी के जुलूसों की तैयारियों और बेहतर आयोजन पर चर्चा हुई। बैठक में पुलिस प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में जुलूसों को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से निकालने पर ख़ास तौर पर ज़ोर दिया गया।
हज़रत मुईन मियां ने बताया कि पैग़ंबर-ए-अकरम ﷺ की तालीमात इंसानियत की खिदमत और कमज़ोर तबक़े का सहारा बनने की प्रेरणा देती हैं। इसलिए मिलाद के मौके पर ग़रीबों और ज़रूरतमंदों की मदद, राशन पहुंचाना और समाज के लिए फ़ायदेमंद कामों को भी तरजीह दी जानी चाहिए।
बैठक में जुलूस के दौरान अनुशासन क़ायम रखने, पुलिस प्रशासन से पूरा सहयोग करने और क़ानून के दायरे में रहकर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने पर भी बात की गई।
उन्होंने कहा कि ईद मिलादुन्नबी ﷺ का असल पैग़ाम मोहब्बत, रहमत और इंसानियत है। इस पैग़ाम को समाज के हर तबक़े तक पहुंचाना हम सबकी ज़िम्मेदारी है।
खिलाफत हाउस के अध्यक्ष सरफराज आरजू. एमआईएम के नेता वारिस पठान आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए और सभी से शांतिपूर्ण तरीके से जुलूस में शामिल होने की अपील की.

