मुंबई, 28 अगस्त 2026:इंडियन मुस्लिम पब्लिक अफेयर्स कमेटी (IMPAC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत मौलाना उबैदुल्लाह खान आज़मी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया फैसले पर गहरी मायूसी और चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि एक मुस्लिम छात्रा को स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने के अधिकार से वंचित किया जाना चिंता की बात है।
मौलाना आज़मी ने अदालत की उस राय को खारिज किया, जिसमें हिजाब को इस्लाम की “अनिवार्य धार्मिक प्रथा” नहीं माना गया है। उन्होंने कहा कि कुरआन और सुन्नत की रोशनी में हिजाब इस्लाम का जरूरी और बुनियादी हिस्सा है। उनके मुताबिक, मुस्लिम महिलाओं के धार्मिक विश्वास और सम्मान से जुड़े इस मामले को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्ष अदालतों द्वारा इस्लामी मान्यताओं और धार्मिक मामलों की व्याख्या किया जाना चिंता का विषय है। उनके अनुसार, हिजाब के धार्मिक महत्व से इनकार करने से देश की करोड़ों मुस्लिम महिलाओं की धार्मिक भावनाएं भी आहत हुई हैं।
शिक्षा और धार्मिक आज़ादी दोनों जरूरी
मौलाना आज़मी ने कहा कि मुस्लिम छात्राओं को शिक्षा के अधिकार और धार्मिक आज़ादी में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में अनुशासन और एकरूपता जरूरी है, लेकिन इसे छात्रों की इज़्ज़त, निजी आज़ादी और धार्मिक पहचान की कीमत पर लागू नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने मुस्लिम छात्राओं को क्लासरूम से दूर रखने के लिए कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले का हवाला दिए जाने पर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक, यह अल्पसंख्यकों के लिए शिक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों के मामले में एक चिंताजनक रुझान को दिखाता है।
सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी IMPAC
IMPAC ने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही छात्राओं के साथ पूरी एकजुटता जताई है। संगठन ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ उसके वकीलों की टीम जल्द ही भारत के सुप्रीम कोर्ट में औपचारिक अपील दायर करेगी।
संगठन ने कहा कि वह नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर मुस्लिम समुदाय के धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा तथा हर तरह के संस्थागत भेदभाव के खिलाफ लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से संघर्ष जारी रखेगा।
–क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

