मुंबई: महाराष्ट्र में 28 अगस्त से लागू होने वाले महाराष्ट्र धर्मस्वातंत्र्य कानून 2026 के खिलाफ संयुक्त नागरिक समाज ने अपनी कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई आगे भी जारी रखने का ऐलान किया है। इस सिलसिले में सोमवार को मुंबई मराठी पत्रकार संघ में पत्रकार परिषद आयोजित की गई।
पत्रकार परिषद में वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता तुषार गांधी, फादर फ्रेजर मस्करेन्हास, संध्या गोखले, एडवोकेट इरफान इंजीनियर, एडवोकेट लारा जेसानी, सलीम खान समेत करीब 30-35 सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
वक्ताओं ने कहा कि कानून से धार्मिक आज़ादी, अपनी पसंद, शादी, आस्था और निजता जैसे बुनियादी अधिकारों पर सरकारी दखल बढ़ने का खतरा है। उन्होंने सवाल उठाया कि महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर जबरन धर्मांतरण होने का दावा किया जाता है, लेकिन सरकार ने अब तक इसके समर्थन में भरोसेमंद आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं।
वक्ताओं के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति का धर्म जबरदस्ती, धोखे या लालच से बदला जाता है तो मौजूदा आपराधिक कानूनों के तहत कार्रवाई की व्यवस्था पहले से मौजूद है। ऐसे में नए और सख्त कानून की जरूरत क्यों पड़ी, यह सवाल भी उठाया गया।
तुषार गांधी ने कहा कि यह मामला किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि हर नागरिक के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने लोगों से लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने की अपील की।
एडवोकेट इरफान इंजीनियर ने कानून की कुछ धाराओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि आरोपी पर ही अपनी बेगुनाही साबित करने की जिम्मेदारी डालना न्याय व्यवस्था के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ हो सकता है। उन्होंने धर्मांतरण से पहले पुलिस को सूचना देने और जांच की प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जताई।
फादर फ्रेजर मस्करेन्हास ने कहा कि गरीब और जरूरतमंद विद्यार्थियों को फीस में मदद देना, शिक्षा या सामाजिक सेवा करना अपने आप में धर्मांतरण का लालच नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने धार्मिक संस्थाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और समाजसेवा की भूमिका पर भी बात रखी।
पत्रकार परिषद में कानून को वापस लेने अथवा इसकी विवादित धाराओं पर दोबारा विचार करने की मांग की गई। साथ ही महिला संगठनों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, कानून विशेषज्ञों और विभिन्न धर्मों के नागरिकों से मिलकर लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से जनजागृति जारी रखने का आह्वान किया गया।
28 अगस्त से कानून लागू होने की पृष्ठभूमि में नागरिक समाज ने इसके अमल पर नजर रखने और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की हिफाज़त के लिए कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया।
–क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

