मोहब्बत, अमन, भाईचारे और इंसानियत का दिया पैग़ाम
(सलाम शेख़)
मुंबई में हुज़ूर-ए-अकरम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की ज़िंदगी, उनकी तालीम और पूरी इंसानियत के लिए उनके मोहब्बत और रहमत के पैग़ाम को लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रॉफेट फॉर ऑल की ओर से पाँचवाँ सालाना नातिया मुशायरा आयोजित किया गया।
शनिवार को इस्लाम जिमख़ाना के सेलिब्रेशन हॉल में हुए इस खास कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें अलग-अलग धर्मों से जुड़े शायरों ने भी हिस्सा लिया और हुज़ूर-ए-अकरम ﷺ की शान में नात का कलाम पेश किया।
इन शायरों ने अपने कलाम के ज़रिए मोहब्बत, अमन, भाईचारे, एक-दूसरे के सम्मान और इंसानियत का पैग़ाम दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत में अरशिया सिद्दीक़ी ने हम्द और नात पेश की, जबकि अनुष्का निकम ने भी अपनी खूबसूरत नात से लोगों का दिल जीत लिया।
मुशायरे के इंचार्ज और प्रॉफेट फॉर ऑल कोर कमेटी के सदस्य फ़रीद अहमद ख़ान ने कहा कि इस नातिया मुशायरे का लोग पूरे साल इंतज़ार करते हैं। उन्होंने बताया कि इस साल यह कार्यक्रम अपने पाँचवें साल में पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि मुंबई के अलावा महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों से आने वाले दूसरे धर्मों के शायर जब हुज़ूर-ए-अकरम ﷺ की शान में कलाम पेश करते हैं तो यह हिंदुस्तान की गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी मोहब्बत की खूबसूरत मिसाल बन जाती है।
इस्लाम जिमख़ाना के सदर और प्रॉफेट फॉर ऑल मुहिम के सरपरस्त एडवोकेट यूसुफ़ अब्राहानी ने सभी शायरों का स्वागत किया और उन्हें तोहफ़े और ट्रॉफ़ी देकर सम्मानित किया।
उन्होंने प्रॉफेट फॉर ऑल के तहत इस साल हुए कार्यक्रमों और आने वाले कार्यक्रमों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि कमेटी के सदस्यों ने महाराष्ट्र के कई शहरों और ज़िलों का दौरा करके मोहब्बत, अमन, भाईचारे और इंसानियत का पैग़ाम लोगों तक पहुंचाया है।
दो हिस्सों में हुआ मुशायरा
मुशायरे के पहले हिस्से की निज़ामत मशहूर शायर इरफ़ान जाफ़री ने की। इस दौरान स्थानीय और मेज़बान शायरों ने नात पेश की। कार्यक्रम की अध्यक्षता मशहूर शायर और कई नातिया किताबों के लेखक डॉ. सागर त्रिपाठी ने की।
दूसरे हिस्से की निज़ामत मशहूर शायर माधव बी. नूर ने की, जबकि अध्यक्षता ऑल इंडिया ख़िलाफ़त कमेटी के चेयरमैन सरफ़राज़ आरज़ू ने की।
इस हिस्से में अलग-अलग धर्मों से जुड़े शायरों ने हुज़ूर-ए-अकरम ﷺ की शान में नात पेश की, जिसे सुनकर मौजूद लोगों ने जमकर दाद दी।
दूसरे धर्मों से जुड़े शायरों में डॉ. लक्ष्मण शर्मा, वाहिद अनंत नंदूरकर, ख़लिश हुकमचंद कोठारी, डॉ. गणेश गायकवाड़, डॉ. सोनल चौधरी, रवि केड़िया, संदीप यादव और हीरालाल हीरा शामिल थे।
स्थानीय शायरों में उबैद आज़म आज़मी, डॉ. क़मर सिद्दीक़ी, प्रोफेसर जमील कामिल, डॉ. ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर, एजाज़ हिंदी, सैयदा तबस्सुम नाडकर और मोहसिन साहिल ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में अलग-अलग तबक़ों से जुड़े महिला-पुरुषों के अलावा शायर, उर्दू से मोहब्बत रखने वाले लोग, इस्लाम जिमख़ाना के सदस्य और कई कॉलेजों के छात्र-छात्राएं और शिक्षक भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
महाराष्ट्र कॉलेज, अकबर पीरभाई कॉलेज और बुरहानी कॉलेज के छात्रों और शिक्षकों की मौजूदगी भी खास रही।
प्रॉफेट फॉर ऑल की कोर कमेटी के सदस्य सईद ख़ान, आमिर इदरीसी, डॉ. क़ासिम इमाम, डॉ. आबिद, प्रोफेसर ज़ैबा मलिक, फ़ारूक़ क्लाडिया, इमरान अलवी और मुहम्मद अली भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
नातिया मुशायरे का बड़ा संदेश
कार्यक्रम में कहा गया कि हुज़ूर-ए-अकरम ﷺ की ज़िंदगी और उनकी तालीम पूरी इंसानियत के लिए मोहब्बत, रहमत, अमन और भलाई का पैग़ाम है।
अलग-अलग धर्मों के शायरों का नात पेश करना इसी मोहब्बत और आपसी सम्मान की खूबसूरत मिसाल है।
कार्यक्रम की दूरदर्शन की टीम ने खास रिकॉर्डिंग भी की। इसे बाद में दूरदर्शन पर प्रसारित किया जाएगा।
आयोजकों ने कहा कि यह सिर्फ़ एक मुशायरा नहीं था, बल्कि हिंदुस्तान की साझा तहज़ीब, आपसी सम्मान, अमन, भाईचारे और इंसानियत को मज़बूत करने की एक कोशिश थी।

