इस्लाम और मुसलमानों की बेहतर तस्वीर पेश करने पर ज़ोर–मुंबई में जमाअत-ए-इस्लामी की मीडिया बैठक

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(शिब्ली रामपुरी)

मुंबई में जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के नेशनल मीडिया सेक्रेटरी सलमान अहमद ने कहा कि आज के दौर में इस्लाम और मुसलमानों के बारे में सही और सकारात्मक राय बनाने की ज़रूरत पहले से ज़्यादा है। इसके लिए मीडिया से बेहतर ताल्लुक, अच्छी और हक़ीक़ी कहानियों को सामने लाना और डिजिटल प्लेटफॉर्म का सही इस्तेमाल ज़रूरी है।

मुंबई में पत्रकारों और एडिटर्स के साथ हुई एक खास बैठक में उन्होंने कहा कि जमाअत-ए-इस्लामी ने आने वाले चार साल के अपने प्लान में इस बात को अहमियत दी है कि इस्लाम और मुसलमानों से जुड़ी गलतफहमियों को दूर किया जाए और समाज के सामने उनकी सामाजिक, तालीमी और इंसानी सेवाओं की सही तस्वीर रखी जाए।

बैठक में मीडिया, मौजूदा हालात, डिजिटल मीडिया, रीजनल लैंग्वेज के अखबारों और न्यूज चैनलों से ताल्लुक, प्रेस रिलीज, सोशल मीडिया और मीडिया स्ट्रेटेजी जैसे कई मुद्दों पर बातचीत हुई।

जमाअत-ए-इस्लामी महाराष्ट्र के मीडिया सेक्रेटरी अरशद शेख ने बैठक का मकसद बताते हुए कहा कि यह मुलाकात सिर्फ जमाअत का नजरिया पत्रकारों तक पहुंचाने के लिए नहीं है, बल्कि मीडिया से जुड़े लोगों की राय, तजुर्बे और मशवरों को समझना भी इसका अहम हिस्सा है।

सलमान अहमद ने कहा कि मुसलमानों की आबादी, तालीम, मदरसे, मसाजिद, शादी-ब्याह, तलाक और समाज में उनके किरदार जैसे कई मामलों को लेकर गलत धारणाएं मौजूद हैं। मीडिया के जरिए इन मुद्दों पर तथ्य और संतुलित जानकारी सामने लाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि जमाअत का मकसद सिर्फ अपने काम की पब्लिसिटी करना नहीं, बल्कि समाज में सही, संतुलित और हक़ीक़त पर आधारित बातचीत को बढ़ावा देना है।

मीडिया से बेहतर ताल्लुक की जरूरत

सीनियर पत्रकार सरफराज़ आरज़ू ने कहा कि मुस्लिम तंजीमें बड़े-बड़े प्रोग्राम करती हैं, लेकिन उनकी अच्छी गतिविधियां अगले दिन अखबारों में दिखाई नहीं देतीं। इसकी एक वजह मीडिया स्ट्रेटेजी की कमी है।

उन्होंने कहा कि हर प्रोग्राम के लिए अच्छी खबर, तस्वीरें, वीडियो और छोटी जानकारी तैयार करके अखबारों, न्यूज पोर्टल और सोशल मीडिया तक पहुंचाई जानी चाहिए। मुंबई के पत्रकारों और डिजिटल मीडिया से जुड़े लोगों की एक मुकम्मल मीडिया डायरेक्टरी भी तैयार होनी चाहिए।

पत्रकार जावेद जमालुद्दीन ने कहा कि मीडिया का रिश्ता सिर्फ उर्दू अखबारों तक सीमित नहीं होना चाहिए। मराठी, हिंदी, अंग्रेजी और दूसरी स्थानीय भाषाओं के मीडिया से भी लगातार संपर्क जरूरी है। प्रेस रिलीज के साथ तस्वीरें, छोटी वीडियो और दो से पांच मिनट के आसान वीडियो भी मीडिया को दिए जाने चाहिए।

उर्दू टाइम्स के एडिटर फारूक अंसारी ने कहा कि आज मीडिया का दायरा सिर्फ अखबार तक नहीं रहा। डिजिटल मीडिया और मोबाइल जर्नलिज्म ने खबर पहुंचाने का तरीका बदल दिया है। मुस्लिम तंजीमों को ऐसे पत्रकारों और कंटेंट क्रिएटर्स का नेटवर्क बनाना चाहिए जो समाज के मुद्दों को समझते हों।

उन्होंने कहा कि किसी प्रोग्राम से पहले ही एडिटर, चीफ रिपोर्टर और संबंधित पत्रकार से संपर्क करना चाहिए। सिर्फ प्रेस रिलीज भेज देना काफी नहीं है। अपनी बात को पत्रकारिता के अंदाज में पेश करने की जरूरत है।

हसन शम्सी ने भी मराठी और दूसरे स्थानीय मीडिया से लगातार संपर्क बनाने तथा पत्रकारों की मुकम्मल सूची तैयार करने पर जोर दिया।

डिजिटल मीडिया पर खास ध्यान

बैठक में डिजिटल मीडिया को खास अहमियत दी गई। सलमान अहमद ने कहा कि आज खबर बहुत तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहुंचती है। इसलिए जमाअत और दूसरी मुस्लिम तंजीमों को सोशल मीडिया, मोबाइल जर्नलिज्म और नए डिजिटल साधनों का बेहतर इस्तेमाल करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रेस रिलीज और छोटे-छोटे बयान रोजाना डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंचाए जाएं, ताकि लोगों को जमाअत के कामों की लगातार जानकारी मिलती रहे।

उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े पत्रकारों और कंटेंट क्रिएटर्स के साथ लगातार बातचीत होनी चाहिए और यह समझना चाहिए कि किस तरह जमाअत के अच्छे कामों को ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वीडियो कंटेंट, मोबाइल जर्नलिज्म और डिजिटल ट्रेनिंग पर भी बात हुई। पत्रकारों और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए कम खर्च में ट्रेनिंग और साझा डिजिटल वर्कस्पेस बनाने की जरूरत पर भी विचार किया गया।

सलमान अहमद ने बताया कि जमाअत के डिस्कोर्स एंड नैरेटिव बिल्डिंग के तहत हर तीन महीने में ऐसे विषय चुने जाते हैं जिन पर कम बात होती है। उन पर रिसर्च करके तथ्य और आंकड़ों के साथ सामग्री तैयार की जाती है, जिसे पत्रकार खबर, फीचर, वीडियो या विश्लेषण के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं।

बैठक में यह राय भी सामने आई कि मुस्लिम समाज की तालीम, कारोबार, उद्योग, सेहत, सामाजिक सेवा और संस्कृति में योगदान को आंकड़ों और असली कहानियों के साथ सामने लाया जाना चाहिए। साथ ही उन गैर-मुस्लिम लोगों से भी संपर्क बढ़ाया जाए जो मुस्लिम समाज से जुड़े मुद्दों पर संतुलित और तथ्य आधारित बात करते हैं।

बैठक में जमाअत के मीडिया कोऑर्डिनेटर निहाल सगीर, मुंबई उर्दू न्यूज के फरहान हनीफ, हमाशमा के अकलीम शेख, जावेद शेख, मुजम्मिल क़ौर, नईम शेख ,सियासी तकदीर, बसीरत ऑनलाइन के गुफरान अहमद सहित कई पत्रकारों ने हिस्सा लिया।

अंत में सलमान अहमद ने कहा कि इस बैठक का मकसद कोई नई पॉलिसी का ऐलान करना नहीं, बल्कि पत्रकारों के तजुर्बे से सीखना और मीडिया के साथ बेहतर ताल्लुक कायम करने की आगे की रणनीति तैयार करना है। उन्होंने कहा कि जमाअत के अच्छे कामों और सामाजिक सेवाओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए डिजिटल मीडिया पर खास तौर पर ध्यान दिया जाएगा।

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