रिज़वी कॉलेज में सीरतुन्नबी ﷺ कार्यक्रम, इंसानियत और इंसाफ़ का पैग़ाम

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(रईस खान)

मुंबई: रिज़वी एजुकेशन सोसाइटी के रिज़वी कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स में सीरतुन्नबी ﷺ सेलिब्रेशन 2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय “पैग़म्बरे इंसानियत का पैग़ाम, इंसानियत के नाम” रखा गया। कार्यक्रम में पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद ﷺ की सीरत, इंसाफ़, वालिदैन के साथ हुस्ने सुलूक और इंसानियत के पैग़ाम को मौजूदा दौर की ज़िंदगी से जोड़कर समझाया गया।

कार्यक्रम की सरपरस्ती कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. अंजुम आरा एम. के. अहमद ने की, जबकि मुख्य मेहमान के तौर पर पूर्व सांसद मौलाना ओबैदुल्लाह खान आज़मी ने शिरकत की। कॉलेज की डायरेक्टर और इंतज़ामिया से जुड़े जिम्मेदार लोगों के साथ कॉलेज के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

मौलाना ओबैदुल्लाह खान आज़मी ने अपनी तक़रीर में कहा कि सिर्फ़ इल्म हासिल करना काफी नहीं है, बल्कि इल्म को अमल में लाना ज़रूरी है। उन्होंने सीरतुन्नबी ﷺ के हवाले से इंसाफ़, रहमदिली और इंसानियत को आम ज़िंदगी का हिस्सा बनाने पर ज़ोर दिया।

उन्होंने कहा कि आज हमें अपने मां-बाप को पहचानने और उनके एहसान को समझने की ज़रूरत है। इस्लाम ने वालिदैन के साथ अच्छे बर्ताव को बहुत ऊंचा मक़ाम दिया है। मां की तकलीफ़, बच्चे की परवरिश और दूध पिलाने से लेकर बुज़ुर्गी तक मां-बाप की कुर्बानियों को समझना हर इंसान की जिम्मेदारी है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि इंसाफ़ सिर्फ़ अपने लोगों के साथ नहीं, बल्कि हर इंसान के साथ होना चाहिए।

तक़रीर में सीरत के कई ऐतिहासिक वाक़ियात का भी ज़िक्र किया गया। खास तौर पर जंग-ए-हुनैन के बाद के हालात और क़ैदियों के साथ किए गए सुलूक से इंसाफ़ और रहमदिली का सबक़ सामने रखा गया। दाई हलीमा सादिया और उनके कबीले से जुड़ा वाक़िया बयान करते हुए यह समझाने की कोशिश की गई कि रिश्ते और एहसान इंसान को दूसरों के हक़ को पहचानने से रोकते नहीं, बल्कि इंसाफ़ का रास्ता दिखाते हैं।

मौलाना आज़मी ने कहा कि मीलादुन्नबी ﷺ के कार्यक्रमों में गैर-मुस्लिम भाइयों को भी बुलाया जाना चाहिए, ताकि पैग़म्बरे इस्लाम ﷺ का पैग़ाम सिर्फ़ मुसलमानों तक महदूद न रहे, बल्कि इंसानियत, अमन, मोहब्बत और भाईचारे का पैग़ाम हर समाज तक पहुंचे।

उन्होंने कहा कि आज समाज को सिर्फ़ तक़रीरों की नहीं, बल्कि अमल की ज़रूरत है। अगर हम सचमुच सीरतुन्नबी ﷺ से मोहब्बत करते हैं तो हमारे किरदार, हमारे रवैये और हमारे पड़ोसियों के साथ हमारे सुलूक में उसका असर दिखाई देना चाहिए।

उन्होंने मोहब्बत और इंसानियत के प्रतीक के तौर पर एक ऐसा शजर लगाने का संदेश भी दिया, जिसकी छाया पड़ोसियों समेत हर राहगीर को मिले। उनका कहना था कि इंसानियत का असल पैग़ाम यही है कि हमारी ज़िंदगी से दूसरे इंसानों को फायदा पहुंचे।

कार्यक्रम की तैयारी और संचालन में कॉलेज के उर्दू डिपार्टमेंट के अब्दुल हफ़ीज़ खान की अहम भूमिका रही। शेख़ शहाबुद्दीन, वाइस प्रिंसिपल, रिज़वी कॉलेज ने भी कार्यक्रम की कामयाबी में सहयोग किया।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने तक़रीर और नात के मुकाबलों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। तक़रीर के मुकाबले में शेख़ महबूब ने पहला, मोहम्मद मुबस्सिर ने दूसरा और सामिया बानो ने तीसरा स्थान हासिल किया।

नात-ए-पाक के मुकाबले में शाहदैन जमील शेख़ ने पहला, शेख़ महबूब ने दूसरा और हुज़ैफ़ा नसीम खान ने तीसरा स्थान हासिल किया।

कामयाब विद्यार्थियों के अलावा कार्यक्रम की तैयारी और इसमें हिस्सा लेने वाले दूसरे विद्यार्थियों को भी सर्टिफिकेट और मोमेंटो देकर उनकी हौसला-अफ़ज़ाई की गई।

सीरतुन्नबी ﷺ का यह कार्यक्रम इस पैग़ाम के साथ यादगार बना कि पैग़म्बर ﷺ की सीरत सिर्फ़ पढ़ने और सुनने के लिए नहीं, बल्कि अपनी ज़िंदगी में उतारने के लिए है। इंसाफ़, रहम, वालिदैन का एहतराम, पड़ोसियों का हक़ और हर इंसान के साथ अच्छा सुलूक ही सीरत के पैग़ाम को अमल में बदलने का रास्ता है।

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