प्रयागराज शहर के करैली इलाके में अदबी संस्था ‘गुफ़्तगू’ की ओर से मशहूर शायर फ़िराक़ गोरखपुरी के जन्मदिन के मौके पर एक अदबी बैठक का आयोजन किया गया। इस मौके पर शहर के जाने-माने साहित्यकार, शायर और पत्रकारों ने फ़िराक़ गोरखपुरी की शायरी और उनकी शख्सियत पर अपने विचार रखे।
बैठक में शहर के मशहूर अदीब और पत्रकार लायक़ रिज़वी ने कहा कि फ़िराक़ गोरखपुरी उर्दू अदब की दुनिया के पहले शायर थे, जिन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि फ़िराक़ से पहले किसी उर्दू शायर को यह बड़ा सम्मान नहीं मिला था।
लायक़ रिज़वी ने कहा कि फ़िराक़ गोरखपुरी ने अपनी शायरी के जरिए एक अलग सोच और अंदाज़ पेश किया, जिसने उन्हें दूसरे शायरों से अलग पहचान दी। खास तौर पर ग़ज़ल के मैदान में उन्होंने नया रंग पैदा किया। उनकी रुबाइयों का अंदाज़ भी अपनी अलग पहचान रखता था।
अदबी बैठक की अध्यक्षता करते हुए डॉ. इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी ने फ़िराक़ गोरखपुरी को अपने दौर का बड़ा शायर बताया। उन्होंने कहा कि फ़िराक़ जितने अपनी शायरी के लिए मशहूर थे, उतने ही अपनी खास शख्सियत के लिए भी जाने जाते थे। उनके घर पर साहित्यकारों, शायरों और चाहने वालों का आना-जाना लगा रहता था।
सीनियर शायर सुनील दानिश ने कहा कि फ़िराक़ गोरखपुरी की शायरी को पढ़कर और सुनकर बहुत कुछ सीखा और समझा जा सकता है। वहीं हकीम रशादुल इस्लाम ने बताया कि फ़िराक़ के इंतकाल के बाद जब वह उनके घर गए तो वहां प्रयागराज के कई मशहूर हिंदी और उर्दू शायरों और साहित्यकारों की मौजूदगी देखने को मिली।
‘गुफ़्तगू’ की ओर से आयोजित इस अदबी बैठक में शहर की कई दूसरी साहित्यिक हस्तियों ने भी हिस्सा लिया और फ़िराक़ गोरखपुरी की अदबी खिदमतों को याद किया।
इस मौके पर धीरेन्द्र सिंह नागा, डॉ. एस.एम. अब्बास, अफसर जमाल सहित अन्य साहित्यकार और शायर मौजूद रहे।
–क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

