मदनपुरा से मस्तान तालाब तक निकलेगा जलूस, उलेमा और मशाएख़ करेंगे क़ियादत
मुंबई। ऑल इंडिया सुन्नी जमीअत उल उलेमा की ओर से हर साल मदनपुरा से निकाला जाने वाला जलूस-ए-ग़ौसिया इस साल 27 सितंबर को निकाला जाएगा। यह जलूस अपनी 27वीं कड़ी पूरी करेगा। जलूस में बड़ी संख्या में उलेमा, मशाएख़ और आम लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
इस साल जलूस की खास बात यह होगी कि उलेमा-ए-अहल-ए-सुन्नत अमामे सजाकर पैदल इसकी क़ियादत करेंगे। जलूस मदनपुरा स्थित सुन्नी जमीअत उल उलेमा के मरकज़ी दफ़्तर से शुरू होकर तयशुदा रास्तों से गुजरते हुए मस्तान तालाब पहुंचेगा। वहां उलेमा और मशाएख़ की दुआ के बाद जलूस का इख़्तेताम होगा।
जलूस की तैयारियों को लेकर 13 सितंबर को सुन्नी जमीअत उल उलेमा के मरकज़ी दफ़्तर में उलेमा, दानिश्वरान और ज़िम्मेदारान की बैठक हुई। बैठक की सदारत अमीर-ए-मिल्लत अल-हाज मोहम्मद सईद नूरी ने की, जबकि मौलाना फ़रीदुल ज़मां क़ादरी ने क़ियादत की।
बैठक में जलूस की तैयारियों और उसके दीनी व रूहानी मक़ासिद पर बातचीत हुई। इस मौके पर मोहम्मद सईद नूरी ने कहा कि मदनपुरा से जलूस-ए-ग़ौसिया निकालने की यह रिवायत लंबे समय से चली आ रही है। उन्होंने बताया कि इसकी बुनियाद मुफ़्ती-ए-आज़म हिंद हज़रत मुस्तफ़ा रज़ा ख़ान बरेलवी, सैयद अल-मुस्तफ़ा मारहरवी, मुहद्दिस-ए-आज़म हिंद हज़रत बुरहान-ए-मिल्लत कछौछवी, हज़रत महबूब-ए-मिल्लत और दूसरे अकाबरीन-ए-अहल-ए-सुन्नत से जुड़ी है।
नूरी के मुताबिक जलूस का मकसद ग़ौस-ए-आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की सीरत, तालीमात और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ के पैग़ाम को लोगों तक पहुंचाना है।
उन्होंने जलूस में शामिल होने वालों से बा-वुज़ू होकर आने, खुशबू लगाने और पाकीज़ा लिबास पहनने की अपील की। उन्होंने कहा कि ग़ौस-ए-आज़म की निस्बत से निकाले जाने वाले इस जलूस में अदब, वक़ार और पाकीज़गी का खास ख्याल रखा जाना चाहिए।
27 सितंबर को होने वाले जलूस को लेकर मदनपुरा और आसपास के इलाकों में तैयारियां शुरू हो गई हैं।
-क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

