(मोअज्जम अली)
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के सेक्टर-18 स्थित रक्षा प्रदर्शनी मैदान में 11 से 13 सितंबर तक आयोजित आरईवी प्रदर्शनी उत्तर प्रदेश 2026 में अक्षय ऊर्जा और बिजली-चलित गाड़ियों के क्षेत्र की नई तकनीकों ने लोगों का ध्यान खींचा। तीन दिवसीय इस मेले के तीसरे संस्करण का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और विधान परिषद सदस्य राम चंद्र प्रधान ने मिलकर किया। उद्घाटन के बाद उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण कर सूरज की रोशनी से बिजली बनाने, नवीकरणीय ऊर्जा और बिजली-गाड़ियों से जुड़ी नई तरकीबों की जानकारी ली।
प्रदर्शनी में सूरज की रोशनी को भविष्य की जरूरत बताते हुए सूरज की प्लेटें, सीधे बिजली-लाइन से जुड़ा और मिश्रित बिजली-परिवर्तक, ऊर्जा की थैली और ऊर्जा-भंडारण यंत्र, ऊर्जा-थैली नियंत्रण व्यवस्था, सूरज से चलने वाला पानी-पंप, चार्जिंग का ढाँचा और बिजली-गाड़ियों से जुड़ी तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। आयोजकों के अनुसार आरईवी प्रदर्शनी का मकसद उद्योग, तकनीक, निवेश और बाजार से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाकर स्वच्छ ऊर्जा और बिजली-गाड़ियों को बढ़ावा देना है।
इस बार प्रदर्शनी में ऊर्जा को संजोकर रखने की तकनीक सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रही। विभिन्न कंपनियों ने लिथियम-आयन और एलएफपी ऊर्जा-थैलियाँ, बीईएसएस यानी ऊर्जा-थैली भंडारण यंत्र तथा स्मार्ट ऊर्जा-नियंत्रण जैसे समाधान दिखाए। इन तकनीकों का इस्तेमाल घर के सूरज-सिस्टम से लेकर बड़े कारखानों और व्यावसायिक परियोजनाओं तक में किया जा सकता है।
प्रदर्शनी में भारत के साथ-साथ विदेशी तकनीकी कंपनियों की भागीदारी ने भी इसे व्यापक बनाया। चीन की वेइची जैसी कंपनी ने सूरज-पंप बिजली-परिवर्तक और स्मार्ट सूरज-सिंचाई के समाधान पेश किए। इससे साफ संकेत मिलता है कि सूरज की रोशनी अब सिर्फ बिजली बनाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि खेती, उद्योग, यातायात और ऊर्जा-प्रबंधन के कई क्षेत्रों में फैल रही है।
आरईवी प्रदर्शनी में सीधे बिजली-लाइन से जुड़े और मिश्रित सूरज-सिस्टम को लेकर भी खास रुचि दिखी। मिश्रित तकनीक ऐसे सिस्टम देती है जिनमें सूरज की रोशनी, ऊर्जा-थैली और बिजली-लाइन की बिजली को जरूरत के हिसाब से एक साथ संभाला जा सकता है। इससे बिजली की उपलब्धता और ऊर्जा-प्रबंधन और भी आसान हो जाता है।
प्रदर्शनी में कारोबार और तकनीकी सहयोग के मौके भी खूब रहे। कंपनियों ने डीलरों, ईपीसी कंपनियों (यानी इंजीनियरिंग-खरीद-निर्माण करने वाली कंपनियाँ), निवेशकों, उद्योग प्रतिनिधियों और संभावित ग्राहकों से बातचीत की। आयोजकों के मुताबिक आरईवी प्रदर्शनी का मकसद सिर्फ सामान दिखाना नहीं, बल्कि तकनीक और कारोबार के बीच नए रिश्ते बनाना भी है।

गौरतलब है कि वर्ष 2025 में आयोजित आरईवी प्रदर्शनी के दूसरे संस्करण में आयोजकों के अनुसार 15 हजार से ज्यादा व्यापारिक आगंतुक पहुँचे थे, जिनमें उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों के उद्यमी, निवेशक और पेशेवर शामिल थे। इस पृष्ठभूमि में 2026 का तीसरा संस्करण उत्तर भारत में अक्षय ऊर्जा और बिजली-गाड़ियों के बढ़ते बाजार का महत्वपूर्ण मंच बनकर सामने आया।
सूरज की रोशनी से ऊर्जा के नए कारोबार तक
लखनऊ में संपन्न हुआ यह ऊर्जा-मेला इस बदलाव की तस्वीर पेश करता है कि आने वाले वर्षों में बिजली की जरूरत पूरी करने में सूरज की रोशनी, ऊर्जा-भंडारण और स्मार्ट बिजली-नियंत्रण की भूमिका लगातार बढ़ने वाली है। सरकार की स्वच्छ ऊर्जा और बिजली-गाड़ियों को बढ़ावा देने की नीतियों के बीच ऐसे आयोजन उद्योग और आम लोगों के बीच तकनीकी जानकारी और बाजार के अवसरों का महत्वपूर्ण पुल बन रहे हैं।

