नई दिल्ली, 25 सितंबर। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने कथित तौर पर अन्य दो चुनाव आयुक्तों को शामिल किए बिना अहम फैसले लिए।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार वोटर रजिस्ट्रेशन, नाम हटाने, डेटाबेस और फॉर्म 6 जैसे मुद्दों पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी। फिर भी उन्हें कई महत्वपूर्ण फैसलों से दूर रखा गया।
प्रो. सलीम ने सुप्रीम कोर्ट के 1995 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग बहु-सदस्यीय संस्था है और मुख्य चुनाव आयुक्त ‘बराबर वालों में प्रथम’ हैं। वे आयोग को अपना निजी संस्थान नहीं बना सकते।
उन्होंने बताया कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन के कारण देशभर में करीब 13 करोड़ नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। पश्चिम बंगाल में ही लगभग 27 लाख नाम काटे गए। फॉर्म 6 में नई शर्त जोड़ने और डेटाबेस को केंद्रित करने पर भी दोनों आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी।
इसके अलावा जनवरी 2024 से सालाना स्पेशल समरी रिविजन नहीं कराया गया है, जबकि युवा मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए यह जरूरी प्रक्रिया है।
प्रो. सलीम ने कहा कि योग्य नागरिकों के लिए वोट देना आसान होना चाहिए। अगर आरोप सही पाए गए तो निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग संविधान और जनता का है, किसी एक व्यक्ति का नहीं।
–क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

