वक्फ से शिक्षा तक बड़ी पहल — पटना की इंटेलेक्चुअल मीट में मुस्लिम समाज के सामने शिक्षा, वक्फ और कानूनी अधिकारों पर मंथन

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(रईस खान)

मुस्लिम समाज के सामने मौजूद सामाजिक, शैक्षिक, कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों पर गंभीर विचार-विमर्श के लिए पटना में इंडियन मुस्लिम पब्लिक अफेयर्स कमेटी यानी इम्पैक (IMPAC) की ओर से एक अहम इंटेलेक्चुअल मीट आयोजित की गई। कार्यक्रम में बिहार के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों से आए सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, नेताओं और कानूनी जानकारों ने हिस्सा लिया।

पटना के उर्दू भवन में मौजूद गवर्नमेंट उर्दू लाइब्रेरी और उर्दू अकादमी के ऐतिहासिक हॉल में हुई इस बैठक का मुख्य संदेश था कि सिर्फ जज़्बाती प्रतिक्रिया देने के बजाय समाज को मजबूत संस्थाएं खड़ी करने और जमीन पर लगातार काम करने की जरूरत है।

‘सिर्फ जज़्बाती होने से काम नहीं चलेगा’

कार्यक्रम की अध्यक्षता इम्पैक के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना उबैदुल्लाह खान आज़मी ने की। अपने संबोधन में उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि वह केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया तक सीमित न रहे, बल्कि मजबूत संस्थाएं बनाए और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़े।

उन्होंने वक्फ संपत्तियों की हिफाजत, मुस्लिम समाज के कानूनी अधिकारों और धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई। साथ ही उन्होंने युवाओं को बेहतर शिक्षा और ऊंची पढ़ाई से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया।

उनका कहना था कि समाज की समस्याओं का स्थायी समाधान केवल नारों से नहीं, बल्कि पढ़े-लिखे युवाओं, मजबूत संस्थाओं और कानूनी तैयारी के जरिए तलाशना होगा।

वक्फ से लेकर शिक्षा तक कई मुद्दों पर चर्चा

बैठक में इम्पैक के नेताओं ने संगठन की ओर से किए जा रहे कामों की जानकारी भी दी। ऑल इंडिया सेक्रेटरी जनाब वासिम खान ने संगठन की गतिविधियों का जिक्र करते हुए एसआईआर हेल्प डेस्क, असम में लोगों के पुनर्वास के लिए जनहित याचिका, स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने और देश के अहम मुद्दों पर लगातार आवाज उठाने की जानकारी दी।

शूरा सदस्य और असम के पूर्व विधायक एडवोकेट अमीनुल इस्लाम ने असम समेत देश के विभिन्न हिस्सों में मुस्लिम समाज के सामने मौजूद समस्याओं पर बात की। उन्होंने कानूनी लड़ाई के लिए इम्पैक जैसे सक्रिय मंच की जरूरत पर जोर दिया।

युवाओं की पढ़ाई और रोजगार पर जोर

इम्पैक के ऑल इंडिया वाइस प्रेसिडेंट डॉ. अनीस अहमद ने शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने और स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ने की जरूरत बताई। उन्होंने मुस्लिम युवाओं को नए दौर के प्रोफेशनल कोर्स और आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर भी जोर दिया।

यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि किसी भी समाज की तरक्की में शिक्षा और रोजगार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। बैठक में इस बात पर जोर दिखाई दिया कि युवाओं को केवल राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाने के बजाय उन्हें शिक्षा, हुनर और रोजगार के अवसरों से जोड़ना जरूरी है।

वक्फ संपत्तियों और महिलाओं के अधिकारों पर चर्चा

इम्पैक की ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी डॉ. अस्मा ज़हरा ने वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा, समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी और मुस्लिम महिलाओं के शरीयत से जुड़े अधिकारों पर अपनी बात रखी।

उन्होंने गरीबी और बेरोजगारी से युवाओं में पैदा हो रही निराशा का जिक्र किया। साथ ही वक्फ संपत्तियों पर कथित अवैध कब्जों का मुद्दा उठाया। महिलाओं की शिक्षा, पहचान और अधिकारों से जुड़े सवालों पर भी उन्होंने चिंता जताई।

उन्होंने सामाजिक सुधार के लिए पुरुषों और महिलाओं की मिलकर भागीदारी को जरूरी बताया और कहा कि समुदाय की सुरक्षा और तरक्की के लिए जमीन पर लगातार काम करने की जरूरत है।

उत्तर प्रदेश की चुनौतियों पर भी मंथन

इम्पैक की उत्तर प्रदेश इकाई से जुड़े जनाब इरम रब्बानी और डॉ. आरताब आलम ने उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समाज के सामने मौजूद राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने राज्य में इम्पैक की मौजूदगी और सक्रिय भूमिका की जरूरत पर जोर दिया।

बिहार की प्रमुख हस्तियों ने दिया समर्थन

कार्यक्रम के आखिरी हिस्से में बिहार की कई जानी-मानी हस्तियों ने हिस्सा लिया और इम्पैक के कामकाज पर अपने सुझाव दिए। इनमें पूर्व बीपीएससी चेयरमैन इम्तियाज करीमी, विधायक अख्तरुल ईमान, पूर्व विधायक अली अशरफ फातमी, विधायक सरवर, सीए इमरान, शिक्षाविद आरिफ इमाम, एआईएमडब्ल्यूए महिला विंग की प्रतिनिधि बहनें, तनवीर, आज़मी तारी, फिरोज, पूर्व मंत्री मोहम्मद आरिफ खान और यूनुस हुसैन हकीमी समेत कई लोग शामिल थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन मेहमानों ने इम्पैक के एजेंडे की सराहना की और बिहार में संगठन को मजबूत करने के लिए सहयोग का भरोसा दिलाया।

अब सवाल है, बात से आगे जमीन पर कितना काम?

पटना की यह बैठक सिर्फ भाषणों तक सीमित न रहने का संदेश देती है। इसका सबसे अहम पहलू यही रहा कि समाज की समस्याओं के समाधान के लिए मजबूत संस्थाओं, बेहतर शिक्षा, कानूनी तैयारी और लगातार जमीन पर काम करने की जरूरत महसूस की गई।

कार्यक्रम के संयोजक डॉ. इज़हार अहमद और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना की गई। कार्यक्रम के अंत में मौलाना उबैदुल्लाह खान आज़मी ने पूरी टीम का शुक्रिया अदा किया और कहा कि बैठक के बाद इम्पैक बिहार में जमीनी स्तर पर काम को आगे बढ़ाएगा। कार्यक्रम का समापन दुआ के साथ हुआ।

एक बैठक, कई सवाल

पटना की इस बैठक ने मुस्लिम समाज के सामने मौजूद कई पुराने और नए सवालों को एक साथ सामने रखा, शिक्षा कैसे मजबूत हो, युवाओं को रोजगार से कैसे जोड़ा जाए, वक्फ संपत्तियों की हिफाजत कैसे हो, कानूनी अधिकारों की लड़ाई कैसे लड़ी जाए और समाज को मजबूत संस्थाओं के जरिए कैसे आगे बढ़ाया जाए।

अब असली परीक्षा इस बात की होगी कि बैठक में उठाए गए मुद्दे कितनी जल्दी ठोस योजनाओं और जमीनी काम में बदलते हैं।

–क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

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