डायलॉग — सियोल की मस्जिद से मुहब्बत और संवाद का पैग़ाम

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हलाल खानपान से इस्लामी साहित्य तक, कोरिया की केंद्रीय मस्जिद में संस्कृति के ज़रिये संवाद की पहल; ग़ैर-मुस्लिम समाज को इस्लाम से परिचित कराने पर रहा ज़ोर

-(यासिर फतेह)

धर्मों और संस्कृतियों के बीच बेहतर समझ विकसित करने के लिए कभी-कभी एक खुला दरवाज़ा, एक किताब और बातचीत का छोटा-सा अवसर भी अहम भूमिका निभा सकता है। दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में केंद्रीय मस्जिद के इस्लामी संस्कृति दिवस का विचार इसी सामाजिक ज़रूरत से जुड़ा है। 24 अक्टूबर को कोरिया मुस्लिम फेडरेशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का मक़सद ग़ैर-मुस्लिम लोगों को इस्लाम की शिक्षाओं, मुस्लिम जीवनशैली और सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराना था।

सियोल के योंगसान ज़िले के इटेवोन क्षेत्र में स्थित केंद्रीय मस्जिद में 24 अक्टूबर, शनिवार को सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक आयोजित इस एक दिवसीय कार्यक्रम की घोषित रूपरेखा में पुस्तकों की प्रदर्शनी, व्याख्यान और इस्लामी उत्पादों, शालीन परिधानों तथा हलाल खाद्य पदार्थों का बाज़ार शामिल था।

इस आयोजन की अहमियत केवल धार्मिक पहचान के प्रदर्शन में नहीं, बल्कि इस सवाल में है कि अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग एक-दूसरे की संस्कृति को कितनी सहजता से समझ सकते हैं।

मस्जिद के आंगन से समाज तक पहुंचने की कोशिश

सियोल सेंट्रल मस्जिद दक्षिण कोरिया में इस्लाम के इतिहास की एक प्रमुख पहचान है। सियोल की आधिकारिक पर्यटन वेबसाइट के मुताबिक, यह देश की पहली मस्जिद है और 21 मई 1976 को इसका उद्घाटन हुआ था। मस्जिद परिसर में इबादत के साथ शिक्षा और सामुदायिक गतिविधियों से जुड़ी सुविधाएं भी मौजूद हैं।

इस्लामी संस्कृति दिवस जैसी पहल इसी व्यापक भूमिका को सामने लाती है। मस्जिद को केवल नमाज़ पढ़ने की जगह के बजाय ऐसे केंद्र के रूप में भी देखा जा सकता है, जहां लोग इस्लाम के बारे में जानकारी हासिल करें, सवाल पूछें और मुस्लिम समाज की परंपराओं को सीधे समझें।

दक्षिण कोरिया जैसे देश में, जहां विभिन्न देशों से आए मुस्लिम नागरिकों और प्रवासियों की मौजूदगी है, ऐसे कार्यक्रम धार्मिक समुदायों के बीच परिचय बढ़ाने का अवसर प्रदान करते हैं।

किताबें, व्याख्यान और सांस्कृतिक बाज़ार

कार्यक्रम की घोषित गतिविधियों में तीन प्रमुख पहलू शामिल थे।

किताबों की प्रदर्शनी

इस्लामी साहित्य और पुस्तकों के माध्यम से इस्लाम के इतिहास, धार्मिक शिक्षाओं और मुस्लिम समाज की सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर उपलब्ध कराने की योजना थी। किताबें किसी भी धर्म को उसके मूल विचारों और ऐतिहासिक संदर्भों के साथ जानने का उपयोगी माध्यम होती हैं।

व्याख्यान और जानकारी

इस्लाम से संबंधित विषयों पर व्याख्यान कार्यक्रम का दूसरा अहम हिस्सा था। ऐसे सत्रों का उद्देश्य धर्म के बारे में जानकारी साझा करना और जिज्ञासाओं के समाधान के लिए संवाद की गुंजाइश पैदा करना था।

इस्लामी उत्पाद और हलाल खानपान

सांस्कृतिक बाज़ार में इस्लामी परिधान, शालीन कपड़े, संबंधित उत्पाद और हलाल खाद्य पदार्थ शामिल किए गए थे। इस तरह के स्टॉल मुस्लिम समाज की रोज़मर्रा की जीवनशैली के उन पहलुओं से परिचित कराते हैं, जिन्हें लोग अक्सर केवल दूर से देखते या सुनते हैं।

आयोजन-पूर्व प्रकाशित सूचना के अनुसार, विक्रेताओं के लिए स्टॉल का पंजीकरण शुल्क 30,000 दक्षिण कोरियाई वॉन रखा गया था।

ग़ैर-मुस्लिम दोस्तों को साथ लाने की अपील

कोरिया मुस्लिम फेडरेशन की ओर से मुसलमानों से अपने ग़ैर-मुस्लिम दोस्तों और परिचितों को कार्यक्रम में आमंत्रित करने की अपील की गई थी। यह पहल इसलिए उल्लेखनीय है, क्योंकि सांस्कृतिक परिचय का सबसे प्रभावी रास्ता अक्सर सीधा संवाद होता है।

जब लोग किसी समुदाय के धार्मिक स्थलों, साहित्य, भोजन और सामाजिक परंपराओं को करीब से देखते हैं, तो उन्हें अपने सवाल पूछने और प्रचलित धारणाओं को परखने का अवसर मिलता है। इससे आपसी सम्मान की गुंजाइश बढ़ सकती है।

यह प्रक्रिया किसी एक आयोजन से पूरी नहीं होती। इसके लिए लगातार संवाद, विश्वसनीय जानकारी और एक-दूसरे की धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान आवश्यक है।

दक्षिण कोरिया में इस्लाम की ऐतिहासिक पहचान

सियोल की केंद्रीय मस्जिद केवल स्थानीय मुस्लिम समुदाय का धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि कोरिया में इस्लामी उपस्थिति के इतिहास का भी प्रतीक है। कोरिया फाउंडेशन के एक प्रकाशित लेख के अनुसार, मस्जिद की स्थापना ने देश में इस्लामी संस्कृति के परिचय और धार्मिक गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र उपलब्ध कराया।

मस्जिद से जुड़े शिक्षा-कक्ष, इस्लामी केंद्र और सामुदायिक सुविधाएं इसकी बहुआयामी भूमिका को दर्शाते हैं। ऐसे संस्थानों के लिए धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ व्यापक समाज के साथ संपर्क बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।

इस संदर्भ में इस्लामी संस्कृति दिवस को कोरिया के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में मुस्लिम समुदाय की मौजूदगी को समझने के एक अवसर के रूप में देखा जा सकता है।

पहचान से परिचय और परिचय से सम्मान तक

धार्मिक सद्भाव का अर्थ मतभेदों को मिटाना नहीं, बल्कि मतभेदों के बावजूद एक-दूसरे को समझने और सम्मान देने की क्षमता विकसित करना है। इस्लामी संस्कृति दिवस की घोषित मंशा इसी दिशा में थी, इस्लाम के बारे में जानकारी को लोगों तक पहुंचाना और विभिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों के बीच संवाद के अवसर उपलब्ध कराना।

सियोल की केंद्रीय मस्जिद का यह आयोजन एक व्यापक संदेश की ओर ध्यान दिलाता है: किसी धर्म को समझने के लिए उसके अनुयायियों से संवाद करना, उसकी शिक्षाओं को पढ़ना और उसकी परंपराओं को उनके वास्तविक संदर्भ में जानना आवश्यक है।

दुनिया के किसी भी समाज में स्थायी सामाजिक सौहार्द केवल अपीलों से नहीं बनता। वह तब मजबूत होता है, जब लोगों के बीच मिलने, सुनने, सवाल पूछने और एक-दूसरे को समझने के अवसर लगातार पैदा किए जाएं।

-क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

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