नास्तिकता के दौर में नई पीढ़ी के ईमान की हिफ़ाज़त पर ज़ोर

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इमारत-ए-शरिया हिंद की मजलिस-ए-शूरा में अहम फ़ैसले, मदरसों को वैचारिक चुनौतियों का जवाब देने के लिए बजट तय करने की सलाह

(नासिरा सहरावत)

इमारत-ए-शरिया हिंद की मजलिस-ए-शूरा की एक अहम बैठक में इस्लामी मान्यताओं के ख़िलाफ़ उठने वाले सवालों का इल्मी और तार्किक जवाब देने तथा नई पीढ़ी के ईमान की हिफ़ाज़त के लिए विशेष प्रयास करने पर ज़ोर दिया गया। अमीर-उल-हिंद मौलाना सैयद अरशद मदनी ने मदरसों और दूसरे धार्मिक संस्थानों से अपील की कि वे मौजूदा दौर की वैचारिक चुनौतियों को गंभीरता से लें और उनके समाधान के लिए अपने बजट में एक निश्चित हिस्सा आरक्षित करें।

बैठक में संगठन के कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने, शरई मार्गदर्शन की सेवाओं का विस्तार करने, प्रचार-प्रसार के लिए प्रशिक्षित लोगों की नियुक्ति और डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।

इस्लाम पर उठने वाले सवालों के जवाब के लिए विशेष तैयारी

बैठक के अध्यक्षीय संबोधन में मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि मौजूदा दौर में नास्तिकता से जुड़े विचारों और इस्लामी मान्यताओं पर होने वाली आलोचनाओं के बीच धार्मिक संस्थानों की ज़िम्मेदारी बढ़ गई है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि नई पीढ़ी के सवालों को समझते हुए उनका जवाब ज्ञान, तर्क और प्रामाणिक दलीलों के साथ दिया जाना चाहिए।

उन्होंने मदरसों और धार्मिक संगठनों को सलाह दी कि वे इस उद्देश्य के लिए अपने बजट का एक निश्चित प्रतिशत निर्धारित करें, ताकि इस्लाम पर उठने वाली आपत्तियों का व्यवस्थित और प्रभावी जवाब देने की व्यवस्था की जा सके।

बैठक में ‘Help X Muslim’ नामक वेबसाइट और चैनल के काम की भी सराहना की गई। उपलब्ध कराए गए बैठक-विवरण के अनुसार, यह मंच इस्लाम से संबंधित सवालों और आपत्तियों के जवाब देने का काम कर रहा है।

प्रांतीय प्रचारकों की नियुक्ति का फ़ैसला

इमारत-ए-शरिया हिंद के उद्देश्यों, सेवाओं और कार्यप्रणाली को आम लोगों तथा उलेमा तक पहुंचाने के लिए प्रांतीय स्तर पर प्रचारकों की नियुक्ति का निर्णय लिया गया। इसके अलावा केंद्रीय स्तर पर एक अनुभवी और योग्य प्रचारक नियुक्त करने की योजना भी बनाई गई।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत केंद्रीय प्रचारक देश के विभिन्न हिस्सों में संचालित शरई अदालतों का दौरा करेंगे, उनके कामकाज की समीक्षा करेंगे और अपनी रिपोर्ट संगठन के मुख्यालय को सौंपेंगे। इसका उद्देश्य संस्थागत कामकाज की निगरानी तथा सेवाओं में बेहतर तालमेल स्थापित करना है।

बैठक में इमारत-ए-शरिया हिंद की सेवाओं और शरई मार्गदर्शन को अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए एक स्वतंत्र आधिकारिक वेबसाइट शुरू करने को भी मंज़ूरी दिए जाने की जानकारी दी गई।

संगठन की योजनाओं की समीक्षा और उन्हें समय पर पूरा करने के लिए साल में कम से कम दो बैठकें आयोजित करने का निर्णय भी लिया गया।

शरई अदालतों के विस्तार और कामकाज पर चर्चा

बैठक में मुफ्ती ज़कावत हुसैन कासमी ने देश के विभिन्न राज्यों में संचालित शरई अदालतों के बारे में विवरण प्रस्तुत किया। उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में 12 राज्यों में 170 से अधिक शरई अदालतें कार्यरत होने का दावा किया गया है।

इन अदालतों की कार्यप्रणाली, संगठनात्मक व्यवस्था और सेवाओं के विस्तार पर चर्चा हुई। बैठक का एक प्रमुख उद्देश्य शरई मार्गदर्शन की व्यवस्था को अधिक संगठित बनाना और लोगों तक इसकी पहुंच बढ़ाना बताया गया।

शरई अदालतों से संबंधित आंकड़ों का राज्यवार विवरण अंतिम रूप से प्रकाशित करने से पहले संगठन के आधिकारिक रिकॉर्ड से मिलान किया जाना आवश्यक है।

प्रशिक्षित काज़ियों और मुफ्तियों की कमी दूर करने पर ज़ोर

बैठक में ओडिशा, तमिलनाडु और महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने प्रशिक्षित काज़ियों और मुफ्तियों की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता बताई।

केंद्रीय नेतृत्व की ओर से इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया गया। प्रशिक्षण की व्यवस्था को मजबूत करना इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, ताकि शरई मामलों में मार्गदर्शन देने वाले लोगों की योग्यता और कार्यक्षमता को बेहतर बनाया जा सके।

देशभर के प्रमुख उलेमा ने लिया हिस्सा

बैठक में देश के विभिन्न हिस्सों से कई प्रमुख इस्लामी विद्वानों और धार्मिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें मौलाना महमूद असद मदनी, मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी, नायब अमीर-उल-हिंद मौलाना मुफ्ती सैयद मोहम्मद सलमान मंसूरपुरी, मौलाना नेमतुल्लाह आज़मी, मौलाना सैयद असजद मदनी और मुफ्ती सैयद मासूम साकिब कासमी सहित अन्य प्रमुख नाम शामिल बताए गए हैं।

बैठक में हुई चर्चाओं और प्रस्तावित निर्णयों का मुख्य केंद्र संगठनात्मक मजबूती, शरई सेवाओं का विस्तार, प्रशिक्षित धार्मिक मार्गदर्शकों की उपलब्धता और नई पीढ़ी के धार्मिक सवालों का ज्ञान व तर्क के आधार पर जवाब देने की तैयारी रहा।

–क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

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