नॉर्थ जोन महिला वॉलीबॉल चैंपियनशिप में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी बनी चैंपियन, कुरुक्षेत्र को दूसरा और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी को मिला तीसरा स्थान
(एम जेड खान)
लखनऊ | खेल का मैदान सिर्फ जीत और हार का फैसला नहीं करता, बल्कि हौसले, मेहनत, अनुशासन और टीम भावना की भी पहचान बनता है। जब मैदान पर बेटियां उतरती हैं, तो उनका हर शानदार प्रदर्शन इस बात का संदेश देता है कि सही मौका और बेहतर माहौल मिले, तो वे हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत साबित कर सकती हैं। लखनऊ की इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में आयोजित नॉर्थ जोन अंतर-विश्वविद्यालय महिला वॉलीबॉल चैंपियनशिप 2026–27 ने इसी जज्बे की शानदार तस्वीर पेश की।

एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के तत्वावधान में 15 से 20 अक्टूबर तक चली इस छह दिवसीय प्रतियोगिता में उत्तर भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों की महिला टीमों ने हिस्सा लिया। मुकाबलों के दौरान खिलाड़ियों ने अपनी फुर्ती, तालमेल, खेल कौशल और जीत के लिए आखिरी दम तक संघर्ष करने का जज्बा दिखाया।
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने मारी बाजी
चैंपियनशिप के अंतिम परिणामों में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया और खिताब अपने नाम कर लिया। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी दूसरे स्थान पर रही, जबकि लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी ने तीसरा स्थान हासिल किया।
इन टीमों की उपलब्धि खिलाड़ियों की मेहनत, नियमित अभ्यास और आपसी तालमेल का नतीजा है। वॉलीबॉल जैसे तेज रफ्तार खेल में हर खिलाड़ी की भूमिका अहम होती है। एक खिलाड़ी की सर्विस, दूसरी का शानदार बचाव और तीसरी का सटीक अटैक पूरी टीम के प्रदर्शन को नई ऊंचाई दे सकता है। यही टीम भावना इस प्रतियोगिता की खास पहचान रही।
महिला सशक्तीकरण का संदेश
चैंपियनशिप के समापन समारोह में आईएएस अधिकारी टी. के. शिबू और उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य ऋतु शाही सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
समारोह को संबोधित करते हुए टी. के. शिबू ने विजेता टीमों को बधाई दी और प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सभी खिलाड़ियों के समर्पण, मेहनत और खेल भावना की सराहना की। उन्होंने खिलाड़ियों के अनुशासन और प्रतिबद्धता को प्रतियोगिता की सफलता का अहम हिस्सा बताया।
वहीं, ऋतु शाही ने खेलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं को खेल समेत जिंदगी के हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखाने के समान अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने युवा खिलाड़ियों को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने, अपने लक्ष्य पर ध्यान देने और लगातार मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।
उनके संदेश का सार साफ था, बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर मिले, तो वे अपनी मेहनत और प्रतिभा से नई पहचान बना सकती हैं।
पढ़ाई के साथ खेल भी जरूरी
आज विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक समझ को विकसित करना भी शिक्षा का अहम हिस्सा है। खेल इन खूबियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मैदान पर खिलाड़ी जीत के साथ हार को स्वीकार करना, मुश्किल हालात में धैर्य बनाए रखना और पूरी टीम के साथ मिलकर लक्ष्य हासिल करना सीखते हैं। ये गुण आगे चलकर उनकी पढ़ाई, कामकाज और सामाजिक जीवन में भी मददगार साबित होते हैं।
महिला वॉलीबॉल चैंपियनशिप जैसे आयोजन छात्राओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ बड़े स्तर पर प्रतिस्पर्धा का अनुभव भी देते हैं। इससे उन्हें अपनी कमजोरियों को समझने, प्रदर्शन सुधारने और भविष्य में बेहतर अवसरों के लिए तैयार होने का मौका मिलता है।
इंटीग्रल यूनिवर्सिटी की मेजबानी
समापन समारोह में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। इनमें छात्र कल्याण के डीन प्रो. मोनावर आलम खालिद, प्रोवोस्ट डॉ. फैसल खान, मुख्य प्रॉक्टर डॉ. नसीम अहमद और खेल निदेशक डॉ. मोहम्मद ज़फर शामिल रहे। इसके अलावा एनडीआरएफ के उप कमांडेंट नवीन शर्मा और डी. के. शाही भी मौजूद थे।
विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता ने विभिन्न संस्थानों की खिलाड़ियों को एक साझा मंच दिया, जहां उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने और दूसरे विश्वविद्यालयों की टीमों से मुकाबला करने का अवसर मिला।
इंटीग्रल यूनिवर्सिटी शैक्षणिक गतिविधियों के साथ खेल और अन्य पाठ्येतर कार्यक्रमों को भी बढ़ावा देने पर जोर देती है। ऐसे आयोजनों के जरिए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और खेल संस्कृति को मजबूत करने का प्रयास किया जाता है।
मैदान से आगे तक पहुंचेगा बेटियों का हौसला
नॉर्थ जोन अंतर-विश्वविद्यालय महिला वॉलीबॉल चैंपियनशिप का समापन भले ही हो गया हो, लेकिन इस आयोजन का संदेश इससे कहीं आगे तक जाता है। प्रतियोगिता में शामिल हर खिलाड़ी ने अभ्यास, अनुशासन, धैर्य और टीम भावना के जरिए अपनी क्षमता दिखाने का अवसर पाया।
चैंपियन टीम के लिए यह खिताब गर्व की बात है, जबकि दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने वाली टीमों के लिए यह अनुभव आगे बेहतर प्रदर्शन की प्रेरणा बनेगा। बाकी प्रतिभागियों के लिए भी यह प्रतियोगिता सीखने और खुद को निखारने का मौका रही।
असल मायने में खेल की सफलता केवल ट्रॉफी जीतने में नहीं, बल्कि ऐसे अवसर पैदा करने में है, जहां बेटियां बिना झिझक अपनी प्रतिभा दिखा सकें, नए लक्ष्य तय करें और अपनी मेहनत से आगे बढ़ें। लखनऊ में आयोजित इस चैंपियनशिप ने इसी उम्मीद को मजबूत किया कि खेलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के साथ उनके लिए नए रास्ते भी खुलेंगे।
–क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

