सामाजिक सरोकार —500 बच्चों के चेहरों पर मुस्कान, कपड़ों के साथ मिला अपनापन का उपहार

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कानपुर में ‘उपहार से मुस्कान’ पहल: बच्चों को मंच पर मिली विशेष अतिथि की जगह, सामाजिक सरोकार और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश

कानपुर। क़ौमी फ़रमान :

किसी बच्चे के लिए नए कपड़े सिर्फ पहनने की चीज नहीं, बल्कि खुशी, आत्मसम्मान और अपनेपन का एहसास भी होते हैं। कानपुर में आयोजित ‘उपहार से मुस्कान’ कार्यक्रम में इसी भावना को केंद्र में रखते हुए 500 जरूरतमंद बच्चों को नए कपड़े भेंट किए गए। उत्तर प्रदेश गारमेंट्स मैन्युफैक्चरर्स एण्ड ट्रेडर्स एसोसिएशन और ‘कानपुर सुपर 100’ की संयुक्त पहल के तहत आयोजित यह कार्यक्रम ‘प्रोजेक्ट खुशहाल कानपुर’ का हिस्सा था।

रविवार, 25 अक्टूबर को बी.एन.एस.डी. शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज में आयोजित समारोह का खास पहलू यह रहा कि बच्चों को केवल सहायता प्राप्त करने वालों के रूप में नहीं, बल्कि कार्यक्रम के विशेष अतिथियों के रूप में सम्मान दिया गया। इस प्रतीकात्मक पहल ने आयोजन को वस्त्र वितरण से आगे बढ़ाकर बच्चों के सम्मान और सामाजिक भागीदारी का संदेश देने का अवसर बनाया।

डीएम महेंद्र सिंह तंवर की मौजूदगी

कार्यक्रम में कानपुर नगर के जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने आयोजकों की पहल की सराहना की। जिलाधिकारी का इस आयोजन में शामिल होना सामाजिक संस्थाओं और व्यापारिक संगठनों की जनकल्याणकारी गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा।

जिला प्रशासन की भूमिका केवल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं होती। समाज के विभिन्न वर्गों, संस्थाओं और नागरिक संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाना भी जनकल्याण के व्यापक उद्देश्य को आगे ले जा सकता है। ऐसे आयोजनों से यह सवाल भी सामने आता है कि जरूरतमंद बच्चों तक सहायता पहुंचाने के लिए सामाजिक संगठनों और प्रशासन के बीच सहयोग को किस तरह निरंतर बनाया जा सकता है।

व्यापारिक संगठन से सामाजिक जिम्मेदारी तक

इस आयोजन में वस्त्र कारोबार से जुड़े व्यापारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी ने उद्योग जगत की सामाजिक जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया। उत्तर प्रदेश गारमेंट्स मैन्युफैक्चरर्स एण्ड ट्रेडर्स एसोसिएशन और कानपुर सुपर 100 ने मिलकर बच्चों के लिए कपड़ों की व्यवस्था की। इस प्रयास के पीछे संस्थापक डॉ. सिद्धांशु राय का मार्गदर्शन रहा, जबकि संरक्षक नजम हमराज, बलराम नरुला और विमल झाझरिया का सहयोग बताया गया।

कार्यक्रम के संयोजक आरिफ मार्टिन और सह-संयोजक शाहिद कामरान ने आयोजन की व्यवस्थाएं संभालीं। टीम के सदस्यों और सहयोगियों की भागीदारी ने सामूहिक प्रयास की भूमिका को सामने रखा।

सहायता नहीं, सम्मान का एहसास

समाज में जरूरतमंद बच्चों की मदद के लिए कई कार्यक्रम आयोजित होते हैं, लेकिन किसी भी कल्याणकारी पहल की सार्थकता केवल वितरित की गई वस्तुओं की संख्या से नहीं, बल्कि लाभार्थियों के साथ किए जाने वाले व्यवहार से भी तय होती है। ‘उपहार से मुस्कान’ में बच्चों को मंच पर विशेष अतिथि के रूप में स्थान देना इसी दृष्टिकोण को सामने लाता है।

नए कपड़े पाकर बच्चों के चेहरों पर खुशी दिखाई दी। ऐसे आयोजनों का महत्व उन परिवारों के लिए और बढ़ जाता है, जिनके लिए बच्चों की बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी घरेलू बजट के भीतर एक चुनौती हो सकता है।

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