गोरेगांव में ड्रिंकटेक इंडिया और पैकमैच एशिया एक्सपो शुरू, मशीनों की नई तकनीक ने खींचा ध्यान

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खाने-पीने की चीज़ों की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग की मशीनों का प्रदर्शन, प्रोफूड सेक्शन में कम दिखे स्टॉल

(रईस खान)

मुंबई, 28 अक्टूबर 2026। मुंबई के गोरेगांव स्थित बॉम्बे एक्जीबिशन सेंटर में बुधवार से ड्रिंकटेक इंडिया 2026, पैकमैच एशिया एक्सपो और प्रोफूड इंडिया एक्सपो की शुरुआत हुई। तीन दिन तक चलने वाली यह प्रदर्शनी 30 अक्टूबर तक चलेगी। इसमें खाने-पीने की चीज़ें बनाने, जूस तैयार करने, पानी की बोतलों की पैकिंग और दूसरी औद्योगिक जरूरतों से जुड़ी नई मशीनें दिखाई जा रही हैं।

प्रदर्शनी के पहले दिन मशीनों और नई तकनीक को देखने के लिए कारोबारी और उद्योग से जुड़े लोग पहुंचे। खास तौर पर ड्रिंकटेक इंडिया और पैकमैच एशिया के हिस्सों में मशीनों और पैकेजिंग से जुड़ी तकनीक ने लोगों का ध्यान खींचा। वहीं, प्रोफूड इंडिया के हिस्से में दूसरे सेक्शनों के मुकाबले कम स्टॉल दिखाई देने की बात सामने आई।

तीन प्रदर्शनियां, एक ही जगह

इस आयोजन में तीन अलग-अलग प्रदर्शनियों को एक साथ रखा गया है। ड्रिंकटेक इंडिया में जूस, पानी और दूसरे पेय पदार्थ बनाने से जुड़ी मशीनों पर ध्यान है। पैकमैच एशिया में पैकिंग और पैकेजिंग की तकनीक दिखाई जा रही है, जबकि प्रोफूड इंडिया में खाने-पीने की चीज़ों की प्रोसेसिंग से जुड़ी मशीनों और उपकरणों को जगह दी गई है।

इस तरह एक ही जगह पर कारोबारियों को अपनी जरूरत के मुताबिक मशीनें देखने, उनकी जानकारी लेने और कंपनियों के प्रतिनिधियों से बातचीत करने का मौका मिल रहा है।

फूड सेक्शन में कम दिखे स्टॉल

प्रदर्शनी के पहले दिन प्रोफूड इंडिया के सेक्शन में स्टॉल की संख्या अपेक्षा से कम नजर आई। इस वजह से वहां कारोबार से जुड़ी गतिविधियां भी बाकी दोनों सेक्शनों के मुकाबले कम दिखाई दीं।

इसके उलट, ड्रिंकटेक इंडिया और पैकमैच एशिया के हिस्सों में मशीनों और पैकेजिंग से जुड़े उत्पादों को देखने के लिए लोगों की आवाजाही रही। हालांकि, पहले दिन की स्थिति के आधार पर पूरी प्रदर्शनी की व्यावसायिक सफलता का आकलन करना जल्दबाजी होगी।

छोटी फैक्ट्री से बड़े प्लांट तक की मशीनें

इस प्रदर्शनी की खास बात यह है कि यहां अलग-अलग जरूरतों और बजट के हिसाब से मशीनें देखने को मिल रही हैं। फ्रूट प्रोसेसिंग, जूस बनाने, पानी की बोतलों की पैकिंग और दूसरे पेय पदार्थों के उत्पादन से जुड़ी मशीनें प्रदर्शित की गई हैं।

यहां पूरी तरह ऑटोमैटिक और सेमी-ऑटोमैटिक मशीनों के विकल्प भी मौजूद हैं। ऑटोमैटिक मशीनों में उत्पादन का बड़ा हिस्सा अपने आप होता है, जबकि सेमी-ऑटोमैटिक मशीनों में कुछ काम मशीन और कुछ काम कर्मचारियों को करना पड़ता है।

बड़े उद्योगों के लिए आधुनिक और ज्यादा क्षमता वाले प्लांट के साथ छोटे और मंझोले कारोबारियों के काम आने वाली मशीनें भी इस तरह के आयोजनों का अहम हिस्सा हैं। इससे नए उद्यमियों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि वे अपनी पूंजी और उत्पादन की जरूरत के मुताबिक किस तरह की मशीन चुन सकते हैं।

मशीनों के लाइव डेमो ने खींचा ध्यान

प्रदर्शनी में मशीनों को काम करते हुए देखना कारोबारियों के लिए खास आकर्षण रहा। सोशल मीडिया पर भी इस आयोजन से जुड़े वीडियो और पोस्ट साझा किए जा रहे हैं। मशीनों के काम करने के तरीके, उत्पादन की प्रक्रिया और पैकेजिंग की तकनीक को देखकर लोगों को इनके इस्तेमाल की जानकारी मिल सकती है।

नई मशीनें खरीदने की योजना बना रहे उद्यमियों के लिए ऐसी प्रदर्शनियां उपयोगी होती हैं। वे अलग-अलग कंपनियों की मशीनों की जानकारी ले सकते हैं, उनकी क्षमता समझ सकते हैं और कीमत, रखरखाव तथा उत्पादन लागत जैसे सवालों पर बातचीत कर सकते हैं।

कारोबारियों के लिए क्या है खास?

खाने-पीने की चीज़ों का कारोबार शुरू करने या अपनी मौजूदा फैक्ट्री को आधुनिक बनाने की सोच रहे लोगों के लिए यह प्रदर्शनी जानकारी जुटाने का अच्छा मौका है। यहां जूस, पानी और दूसरे पेय पदार्थों के उत्पादन से लेकर उनकी पैकिंग तक की तकनीक को एक ही जगह समझा जा सकता है।

प्रदर्शनी में आने वाले कारोबारी अपनी जरूरत के हिसाब से मशीनों की तुलना कर सकते हैं। हालांकि, मशीन खरीदने से पहले उसकी कीमत के साथ उत्पादन क्षमता, बिजली की खपत, रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और बिक्री के बाद मिलने वाली सेवा की जानकारी लेना भी जरूरी है।

यह प्रदर्शनी 30 अक्टूबर तक जारी रहेगी। अगले दो दिनों में भी कारोबारियों को मशीन बनाने वाली कंपनियों से मिलने, नई तकनीक समझने और कारोबार बढ़ाने की संभावनाएं तलाशने का मौका मिलेगा।

–क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

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