(फजलुर्रहमान)
सूफ़ी-संतों की धरती सफ़ीपुर में हज़रत मखदूम शाह खादिम सफ़ी रहमतुल्लाह अलैह का उर्स मुबारक बड़ी अकीदत, एहतराम और रूहानी माहौल के साथ संपन्न हुआ। इस मौके पर दरगाह शरीफ को ख़ूबसूरती से सजाया गया था और पूरे क़स्बे में उर्स की रौनक़ देखने लायक थी।
उर्स का आग़ाज़ परंपरागत तरीके से कुरआन ख्वानी से हुआ। दरगाह के सज्जादानशीन और खादिमों की मौजूदगी में मजार शरीफ पर ग़ुस्ल की रस्म अदा की गई। इसके बाद दूर-दराज़ से आए जायरीनों ने चादर पेश कर बारगाह-ए-मखदूम में हाज़िरी दी।
रविवार को दिन में महफ़िल-ए-समां का आयोजन किया गया, जिसमें मशहूर क़व्वालों ने सूफ़ियाना कलाम पेश कर समां बांध दिया। शाम को बाद नमाज़ असर कुल शरीफ की रस्म अदा हुई, जिसमें मुल्क में अमन-चैन, खुशहाली और भाईचारे के लिए दुआएं मांगी गईं।
उर्स के दौरान सफ़ीपुर, उन्नाव सहित आसपास के ज़िलों और दूसरे राज्यों से भी बड़ी तादाद में जायरीन पहुंचे। जायरीनों के लिए जगह-जगह लंगर का इंतज़ाम किया गया था। मेले जैसा माहौल होने से बच्चों और महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला।
यह उर्स हमेशा से गंगा-जमुनी तहज़ीब और हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल रहा है। इस बार भी हर मज़हब के लोगों ने बढ़-चढ़कर शिरकत की।
उर्स में खानकाहे सफ़विया के सज्जादानशीन हज़रत नवाज़िश मोहम्मद फारूक़ी सफ़वी , अफ़ज़ाल मोहम्मद फारूक़ी सफ़वी, सैयद लायक मियां, शाहिद मियां, वकील अहमद खलीली उर्फ पुत्तन मियां, बांगरमऊ के पूर्व अध्यक्ष इज़हार ख़ान गुड्डू, समाजसेवी फ़ज़लुर्रहमान, मो. अकरम सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

