नगमा अंसारी की शान, दिल्ली की परेड में गाँव का नाम रोशन

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(रईस खान)

उन्नाव के ब्लॉक मियागंज गांव की प्रधान नगमा जफर अंसारी ने इस साल 26 जनवरी, 2026 को देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय समारोह गणतंत्र दिवस परेड, दिल्ली में भाग लेने का सम्मान पाया, यह उनके लिये और पूरे उन्नाव जिले के लिये गर्व का विषय है। दिल्ली में आयोजित इस ऐतिहासिक परेड में उन्हें खास मेहमान के रूप में आमंत्रित किया गया, जो पंचायत राज विभाग और भारत सरकार की तरफ़ से एक बड़ा दर्जा है।

यह सम्मान इस बात की मिसाल है कि कैसे एक आम परिवार से आने वाली महिला, अपनी ईमानदारी, मेहनत और जनता के प्रति लगाव से गाँव का नाम देश के सबसे बड़े समारोह में चमका रही है। सोशल मीडिया पर भी इस सम्मान को लेकर उनके समर्थकों और गाँववालों ने खुशी और मुबारकबाद साझा की हैं, जहाँ लोग कहते दिखे कि नगमा ने न केवल गाँव की, बल्कि पूरे मुस्लिम समुदाय और महिलाओं की आवाज़ को राष्ट्रीय मंच पर पहुँचाया।

दिल्ली में सम्मान और गाँव में स्वागत

जब नगमा अंसारी को दिल्ली में परेड के लिये बुलाया गया, तो यह उनके लिये मात्र एक कार्यक्रम नहीं था, यह सम्मान और पहचान की मिसाल थी। यह परेड सिर्फ आतंरिक सैन्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि हर भारतीय के लिये राष्ट्रीय गर्व और एकता का प्रतीक है, जहाँ गणतंत्र, संविधान और जनसंख्या के विविध रंग एक साथ दिखते हैं।

दिल्ली से वापसी पर मियागंज में प्रधान का गाँव के बुज़ुर्गों, बच्चों और महिलाओं ने जोरदार स्वागत किया, उन्हें फूलों और शाल से सम्मानित किया गया, और गाँव की तरफ़ से एक ख़ास खुशी-का माहौल देखा गया। ग्रामीणों ने कहा कि यह सम्मान उनके लिये उसी तरह गर्व की बात है जैसे किसी घर का बेटा या बेटी देश के लिये बुलाया गया हो।

संघर्ष से नेतृत्व तक

अंसारी समाज से आने वाली नगमा ने सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बीच अपनी राह बनाई। राजनीति उनके लिए सत्ता का साधन नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम रही। वर्ष 2013 से वे ग्राम पंचायत से जुड़ी रहीं और धीरे-धीरे जनता के बीच अपनी जगह बनाती चली गईं। 2018 में समाजवादी पार्टी से उनका जुड़ाव स्पष्ट हुआ और 2020 से वे मियागंज ग्राम पंचायत की प्रधान के रूप में जिम्मेदारी निभा रही हैं। उनकी यह यात्रा बताती है कि नेतृत्व अचानक नहीं मिलता, बल्कि समय और विश्वास से बनता है।

शिक्षा को भी उतनी ही अहमियत

ग्रामीण राजनीति में शिक्षा को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन नगमा जफर अंसारी इस सोच से अलग दिखाई देती हैं। वे छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर से उच्च शिक्षा से जुड़ी रही हैं। पंचायत की जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई को जारी रखना उनके आधुनिक और जागरूक दृष्टिकोण को दर्शाता है। वे मानती हैं कि पढ़ा-लिखा जनप्रतिनिधि ही जनता की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझ सकता है।

गांव के काम, जो खुद बोलते हैं

प्रधान बनने के बाद नगमा जफर अंसारी ने सबसे पहले गांव की बुनियादी समस्याओं पर ध्यान दिया। खराब सड़कें, गंदगी, जलभराव और अंधेरी गलियां लंबे समय से लोगों की परेशानी बनी हुई थीं। उनके कार्यकाल में सीसी रोड और इंटरलॉकिंग सड़कों का निर्माण कराया गया, नालियों की सफाई और जल निकासी की व्यवस्था सुधारी गई तथा रात में सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में सोलर लाइटें लगवाई गईं। नियमित कूड़ा उठाने से गांव का माहौल पहले से कहीं अधिक साफ और व्यवस्थित नजर आने लगा।

महिलाओं और बच्चों पर फोकस

नगमा जफर अंसारी का मानना है कि जब तक महिलाएं मजबूत नहीं होंगी, तब तक गांव का विकास अधूरा रहेगा। इसी सोच के साथ महिला स्वच्छता, स्वयं सहायता समूहों और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा दिया गया। शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों को स्कूल से जोड़ने, पढ़ाई का माहौल बेहतर बनाने और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए।

सम्मान और पहचान

मियागंज ग्राम पंचायत को राज्य स्तर पर सम्मान मिलना इस बात का प्रमाण है कि विकास कार्य कागजों तक सीमित नहीं रहे। यह उपलब्धि पूरे गांव की है, लेकिन इसका श्रेय नेतृत्व की जिम्मेदारी निभाने वाली प्रधान नगमा जफर अंसारी को भी जाता है। उनकी कार्यशैली में सादगी साफ दिखाई देती है। वे प्रचार से ज्यादा काम पर भरोसा करती हैं और गांव की समस्याओं को खुद जाकर देखने में विश्वास रखती हैं।

नई पंचायत राजनीति की तस्वीर

नगमा जफर अंसारी आज उस नई पंचायत राजनीति की तस्वीर हैं, जहां न धर्म दीवार बनता है, न महिला होना कमजोरी माना जाता है और न ही साधारण पृष्ठभूमि बड़े सपने देखने से रोकती है। मियागंज की यह प्रधान अपने काम से यह संदेश देती हैं कि अगर नीयत साफ हो और सेवा का भाव सच्चा हो, तो गांव की तस्वीर और तकदीर दोनों बदली जा सकती हैं।

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