(फजलुर्रहमान)
सड़कों पर बढ़ती रफ्तार और यातायात नियमों की अनदेखी आज एक गंभीर समस्या बन चुकी है। हाल ही में जारी यातायात रिपोर्टों के अनुसार, दोपहिया वाहन दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण ‘हेलमेट न पहनना’ पाया गया है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 70% जानलेवा सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ित ने या तो हेलमेट नहीं पहना था या वह मानक स्तर का नहीं था।
यातायात विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में बिना हेलमेट वाहन चलाने के कारण होने वाली मृत्यु दर में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अस्पताल के ट्रॉमा सेंटरों में भर्ती होने वाले अधिकांश युवाओं के सिर में गंभीर चोटें पाई गई हैं, जो सीधे तौर पर हेलमेट की अनुपस्थिति का परिणाम है।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि दोपहिया वाहन से गिरने पर सबसे पहले सिर जमीन से टकराता है। एक अच्छी गुणवत्ता वाला हेलमेट जिससे सर और मस्तिष्क सुरक्षित रहता है।
हेलमेट का वाइजर धूल, हवा और कीड़ों से आंखों को बचाता है, जिससे ध्यान नहीं भटकता। सिर की हड्डी टूटने और इंटरनल ब्लीडिंग के खतरे को 80% तक कम कर देता है।
पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “लोग अक्सर पास की दुकान पर जाने या गलियों में वाहन चलाते समय हेलमेट नहीं पहनते। वे इसे एक ‘बोझ’ या ‘चालान से बचने का जरिया’ समझते हैं, जबकि यह उनकी अपनी जान की सुरक्षा के लिए है। बढ़ते हादसों को देखते हुए प्रशासन ने अब नियमों को और सख्त कर दिया है। बिना हेलमेट पकड़े जाने पर 1000 रुपये तक का जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान। स्कूलों और कॉलेजों में ‘हेलमेट जागरूकता’ सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। अब केवल पुलिस की मौजूदगी ही नहीं, बल्कि कैमरों की मदद से भी ई-चालान काटे जा रहे हैं।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि “सुरक्षा घर से शुरू होती है।” माता-पिता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके बच्चे बिना हेलमेट के घर से बाहर न निकलें। याद रखें, आपका इंतजार घर पर कोई कर रहा है। सावधान रहें, सुरक्षित रहें और हमेशा हेलमेट पहने। हेलमेट चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि अपनी जान बचाने के लिए पहनें। एक छोटा सा फैसला आपके परिवार की खुशियां सुरक्षित रख सकता है।

