(रईस खान)
न्यूयॉर्क से आई खबरों के मुताबिक, अमेरिकी न्याय विभाग ने हाल ही में जेफरी एपस्टीन की फाइलें जारी की हैं, जो 2026 में रिलीज हुईं। ये फाइलें लाखों पेजों की हैं और इनमें मुस्लिम-बहुल देशों के कई बड़े नाम सामने आए हैं। एपस्टीन, जो एक कुख्यात सेक्स अपराधी था, उसके साथ इन लोगों के ईमेल, मीटिंग्स और बिजनेस डील्स के सबूत मिले हैं। इसमें यूएई, सऊदी अरेबिया, ईरान और कतर जैसे देशों के अमीर और पावरफुल लोग शामिल हैं। कोई सीधा अपराध का आरोप नहीं लगा, लेकिन ये कनेक्शन दुनिया को हिला रहे हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा यूएई की राजनयिक हिंद अल-ओवैस की हो रही है। वो यूएई की ह्यूमन राइट्स कमिटी की डायरेक्टर हैं और पहले यूएन में काम कर चुकी हैं। फाइलों में पता चला कि उन्होंने एपस्टीन से 2011 से 2012 तक करीब 469 ईमेल किए थे। इनमें उनकी छोटी बहन का जिक्र है, जो एपस्टीन से मिलना चाहती थीं। अल-ओवैस ने लिखा कि उनकी बहन उनसे भी ज्यादा खूबसूरत है। ये ईमेल सामाजिक मुलाकातों के बारे में हैं, लेकिन लोगों को शक हो रहा है क्योंकि एपस्टीन के घरों में हिडन कैमरे और रिकॉर्डिंग सिस्टम लगे थे। अल-ओवैस पर कोई क्राइम का चार्ज नहीं, लेकिन ये खबर उनकी इमेज को नुकसान पहुंचा रही है।
फाइलों में यूएई के बड़े बिजनेसमैन सुल्तान अहमद बिन सुलायेम का नाम भी हजारों बार आया है। वो डीपी वर्ल्ड के सीईओ हैं और दुबई के अमीरों में शुमार हैं। एपस्टीन से उनके हजारों ईमेल थे, जिसमें बिजनेस, पॉलिटिक्स और यहां तक कि काबा की पवित्र कपड़े की तस्वीरें शामिल हैं। एक फोटो में दोनों काबा की किस्वा नाम की ब्लैक-गोल्ड क्लॉथ को देख रहे हैं। ये क्लॉथ मक्का की काबा को कवर करती है और मुसलमानों के लिए बहुत मुकद्दस है। सुलायेम ने एपस्टीन को कुरान की आयतों के बारे में भी ईमेल किए। कुछ रिपोर्ट्स में टॉर्चर वीडियो का जिक्र है, जो सुलायेम को भेजा गया था। ये रिश्ता इजरायल-यूएई डील्स से जुड़ा लगता है, जो अब्राहम एकॉर्ड्स से पहले का है।
एक और चौंकाने वाली बात अजीजा अल-अहमदी की है, जो यूएई की बिजनेसवुमन हैं। 2017 में उन्होंने काबा की किस्वा के तीन पीस एपस्टीन को सऊदी से फ्लोरिडा भेजे। ये काम अब्दुल्ला अल-मारी की मदद से हुआ। मुसलमानों के लिए ये बहुत बड़ी बेहुरमती है, क्योंकि किस्वा को करोड़ों हज यात्री छूते हैं। फाइलों में ये लिखा है कि अल-अहमदी ने क्लॉथ की रिलीजियस वैल्यू बताई थी। ये खबर मुस्लिम दुनिया में गुस्से की वजह बन रही है और लोग इसे ब्लासफेमी कह रहे हैं।
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का भी नाम आया है। एपस्टीन ने उन्हें गिफ्ट्स दिए और मीटिंग्स कीं। एक रिपोर्ट में लिखा है कि एपस्टीन 2016 में रियाद गया और एमबीएस से मिला। इसके अलावा ईरान के पूर्व प्रेसिडेंट महमूद अहमदीनेजाद से न्यूयॉर्क में मीटिंग का जिक्र है। कतर के पूर्व पीएम हमद बिन जसिम अल थानी, पाकिस्तान के पूर्व फॉरेन मिनिस्टर मखदूम शाह महमूद और ब्रुनेई के सुल्तान का नाम भी फाइलों में है। ब्रुनेई सुल्तान को पेडोफाइल कहा गया है। कुल मिलाकर 12-15 बड़े मुस्लिम नाम सामने आए हैं, लेकिन फाइलों में मुस्लिम देशों के हजारों रेफरेंस हैं।
सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी है कि ये नाम क्यों रेडैक्टेड हैं और क्यों मुस्लिम कम्युनिटी पर फोकस नहीं। कुछ लोग कहते हैं कि एपस्टीन अगर मुस्लिम होता तो इस्लाम को बदनाम किया जाता, लेकिन यहां ज्यादातर एसोसिएशंस पावर और पैसे से जुड़े हैं। अमेरिकी कांग्रेस में भी ये मुद्दा उठा है कि फाइलों में रेडैक्शंस क्यों हैं। ये स्कैंडल अभी और बड़ा हो सकता है, क्योंकि एपस्टीन के नेटवर्क में हॉलीवुड, पॉलिटिक्स और बिजनेस के लोग शामिल थे।

