(रईस खान)
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा एमपी राघव चड्ढा ने बुधवार को संसद में एक बड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अगर जनता नेताओं को चुनने का अधिकार रखती है, तो उन्हें निकालने का भी हक़ मिलना चाहिए। चड्ढा ने ‘राइट टू रिकॉल’ की मांग की, जिससे वोटर अपने एमपी या एमएलए को पांच साल पूरे होने से पहले ही हटा सकें, अगर वो काम न करें या गलत हरकत करें।
चड्ढा ने जीरो ऑवर में बोलते हुए कहा, “भारतीय नागरिकों को संसद और विधानसभाओं के सदस्य चुनने का संवैधानिक हक़ है, लेकिन नॉन-परफॉर्मेंस या मिसकंडक्ट पर उन्हें मिड-टर्म डी-इलेक्ट करने का कोई डायरेक्ट तरीका नहीं है।” उन्होंने बताया कि दुनिया के २४ से ज्यादा लोकतंत्रों में, जैसे अमेरिका और स्विट्जरलैंड में, ऐसा सिस्टम पहले से चल रहा है।
एमपी ने सोशल मीडिया पर भी अपनी बात रखी: “अगर वोटर नेता को हायर कर सकते हैं, तो फायर करने का भी हक़ होना चाहिए। अगर भारतीय वोटरों को इलेक्ट करने का राइट है, तो ‘राइट टू रिकॉल’ भी होना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और जजों को इम्पीच कर सकते हैं, सरकार के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन ला सकते हैं, तो फिर एमपी या एमएलए को क्यों पांच साल तक सहना पड़े? पांच साल बहुत लंबा वक्त है, जहां कोई परफॉर्म न करे और कोई सजा न हो।
चड्ढा ने इस रिफॉर्म को लोकतंत्र की इंश्योरेंस बताया, न कि नेताओं के खिलाफ हथियार। लेकिन मिसयूज रोकने के लिए कुछ सेफगार्ड्स भी सुझाए: रिकॉल शुरू करने के लिए कम से कम ३५-४०% वोटरों की वेरिफाइड पिटीशन जरूरी, चुनाव के बाद १८ महीने का कूलिंग पीरियड ताकि नेता को काम करने का मौका मिले, सिर्फ साबित मिसकंडक्ट, फ्रॉड, करप्शन या ड्यूटी में लापरवाही पर ही रिकॉल, और आखिर में ५०% से ज्यादा वोटरों का सपोर्ट अगर रिमूवल के लिए हो।
यह भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, और कई लोग इसे लोकतंत्र को मजबूत करने वाला कदम बता रहे हैं। एएपी लीडर ने कहा कि वोटरों को अपनी गलती सुधारने का हक़ मिलना चाहिए। अब देखना है कि संसद इस पर क्या फैसला लेती है।

