(रईस खान)
आजकल देश में शिक्षा का सिस्टम कितना फर्जी हो गया है, ये गलगोटिया यूनिवर्सिटी का ताजा वाकिया देखकर साफ हो जाता है। यूनिवर्सिटी ने AI समिट में एक चाइनीज रोबो-डॉग को अपना खुद का बनाया हुआ बताकर दुनिया को चकमा देने की कोशिश की, लेकिन ये झूठ पकड़ा गया। मंत्री ने भी ट्वीट किया, फिर चुपके से डिलीट कर दिया। यूनिवर्सिटी को समिट से बाहर निकाल दिया गया।
स्टूडेंट्स अब शर्मिंदा हैं, रिश्तेदार पूछ रहे हैं कि “क्या तुम फेक यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हो?” ये सिर्फ एक वाकिया नहीं, बल्कि मोदी सरकार के दौर में फैलते फरेब की पूरी कहानी है। सरकार बनने से लेकर अब तक, कितने झूठ बोले गए हैं । गटर गैस से चाय बनाने से लेकर बादलों से रडार छिपाने तक। नोटबंदी से आतंकवाद खत्म करने का दावा, कोरोना में थाली बजाने की सलाह, शिक्षा में साजिशें और चुनावों में फर्जीवाड़ा। देखिए कैसे ये सब फरेब देश को अंधेरे में ढकेल रहे हैं।
गटर गैस से चाय बनाने का झूठा दावा
मोदी जी ने 2018 में वर्ल्ड बायोफ्यूल डे पर कहा था कि एक छोटे शहर में एक चायवाला गटर से निकलने वाली गैस से चाय बनाता है। बस एक उलटा बर्तन, छेद करके पाइप डालो और गैस इस्तेमाल करो। ये सुनकर सोशल मीडिया पर खूब मजाक उड़ा। एक शख्स श्याम राव शिर्के ने क्लेम किया कि उन्होंने ये किया, लेकिन वो चायवाला नहीं बल्कि मैकेनिकल कॉन्ट्रैक्टर था। 2018 में ANI ने शिर्के का इंटरव्यू लिया, लेकिन कोई बड़े स्केल पर ये नहीं चला। ये दावा सरकार के इनोवेशन प्रचार का हिस्सा था, लेकिन हकीकत में फेल हुआ।
बालाकोट स्ट्राइक में बादलों से रडार छिपाने का फरेब
2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक के बारे में मोदी ने कहा कि बादल और बारिश की वजह से पाकिस्तानी रडार इंडियन फाइटर प्लेन्स को नहीं पकड़ पाएंगे। उन्होंने एक्सपर्ट्स को ओवररूल कर ये सलाह दी। जबकि ये पूरी तरह गलत है। और जब एयर मार्शल वीके जिमी भाटिया ने कन्फर्म किया कि बादल रडार को अफेक्ट नहीं करते, बल्कि वो हथियारों की ऐक्यूरेसी को खराब कर सकते हैं। द प्रिंट ने बताया कि मिलिट्री रडार क्लाउड्स से नहीं रुकते। इंडियन एक्सप्रेस ने साइंटिफिक फैक्ट्स दिए कि रडार वेव्स क्लाउड्स से गुजर जाते हैं। लेकिन बाद में एयर मार्शल रघुनाथ नाम्बियार ने कहा कि भारी बादल रडार को थोड़ा कमजोर कर सकते हैं, लेकिन ये मोदी के क्लेम को फुली सपोर्ट नहीं करता। और क्लाउड थ्योरी फेक साबित हुई।
नोटबंदी से आतंकवाद की कमर तोड़ने का झूठ
2016 में नोटबंदी का ऐलान करते हुए मोदी ने कहा कि ये ब्लैक मनी, टेरर फंडिंग और फेक करेंसी को खत्म कर देगी। दावा था कि टेररिस्टों की कैश खत्म हो जाएगी। फिर एक साल बाद एनडीटीवी ने डेटा दिखाया कि जम्मू-कश्मीर में टेरर इंसिडेंट्स 38% बढ़े, सिविलियन डेथ्स 2500% ऊपर। नक्सल इलाकों में सिक्योरिटी फोर्सेस की मौत 82% बढ़ी। साबित किया गया कि टेरर फंडिंग पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। होम मिनिस्ट्री के रिकॉर्ड्स दिखाते हैं कि नोटबंदी के 10 महीने बाद भी टेरर एक्टिविटी बढ़ी।
कोरोना में थाली बजाकर वायरस भगाने की मूर्खतापूर्ण सलाह
2020 में कोरोना के दौरान मोदी जी ने जनता कर्फ्यू में थाली, ताली और घंटी बजाने की अपील की। दावा किया गया कि ये वायरस को भगाने में मदद करेगा। तब शिवसेना ने तंज कसा कि लोग इसे सीरियस नहीं ले रहे। द हिंदू ने कहा कि ये सिंबॉलिक था, लेकिन कोई मेडिकल वैल्यू नहीं। 2020 में लॉकडाउन स्पीच में कोई स्पेसिफिक प्लान नहीं। लेकिन लाखों मजदूरों को परेशान किया गया। प्रिंट ने लिखा कि मोदी ने पिछली गलतियों से नहीं सीखा। ये फरेब ने लोगों को भ्रम में रखा।
शिक्षा सिस्टम में फर्जीवाड़ा और साजिशें
मोदी सरकार में शिक्षा का क्या हाल है? नीट और UGC-NET जैसे एग्जाम्स में पेपर लीक और चीटिंग स्कैंडल्स हुए। अल जजीरा ने बताया था कि 30 लाख स्टूडेंट्स का फ्यूचर खतरे में है। बीबीसी ने व्यापम स्कैंडल का जिक्र किया, जहां 2015 में फ्रॉड हुआ। फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने कहा कि फेक डिग्री क्राइसिस बढ़ी है। 2024 में नीट में 67 टॉपर्स बने, लेकिन लीक की वजह से री-टेस्ट हुए। गलगोटिया का एआई रोबो-डॉग फेक क्लेम इसी का हिस्सा है। ये साजिश शिक्षा को प्राइवेटाइज करके अमीरों का खेल बना रही है।
चुनावों में फर्जीवाड़ा, देश को अंधेरे में ढकेलना
कांग्रेस ने दावा किया कि 2024 इलेक्शन में वोटर लिस्ट्स में फेक एंट्रीज हुई हैं। रॉयटर्स ने बताया कि ट्रंप और वोट रिगिंग चार्जेस से मोदी बैकफुट पर हैं। विकिपीडिया ने 2025 इलेक्टोरल कंट्रोवर्सी का जिक्र किया किया। बीबीसी ने कहा कि चुनाव आयोग पर क्रेडिबिलिटी का क्राइसिस है। राहुल गांधी ने महाराष्ट्र और हरियाणा में 25 लाख फेक वोटर्स का क्लेम किया। 2025 में बिहार इलेक्शन में एनडीए की जीत पर रिगिंग चार्जेस का आरोप लगा। अल जजीरा ने ईवीएम हैकिंग का जिक्र किया। दरअसल ये फरेब लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है।
देश अंधेरे की ओर क्यों?
ये सब झूठ, फरेब और तिकड़म देश को एक ऐसे अंधेरे में ढकेल रहे हैं जहां से निकलना मुश्किल लगता है। कारवां ने 2020 में कहा कि मोदी सरकार ने कोरोना में झूठ बोले, जैसे कम्युनिटी ट्रांसमिशन नहीं है। 8 लाख करोड़ का बैंक फ्रॉड सामने आया, लेकिन कोई एक्शन नहीं। क्या ये सरकार लोगों को झांसा दे रही है? हकीकत ये है कि आलोचना होती है, लेकिन परवाह किसे है? देश को जागना होगा, वरना ये अंधेरा और गहरा होगा।

